क्या राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने प्रदेश और जिला इकाई को भंग किया?

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क्या राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने प्रदेश और जिला इकाई को भंग किया?

सारांश

राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने प्रदेश और जिला इकाई को भंग कर दिया है। यह निर्णय कोर कमेटी की बैठक में लिया गया। पार्टी में चल रही आंतरिक असंतोष और इस्तीफों के बीच यह बड़ा बदलाव हुआ है। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे की कहानी और इसके प्रभाव!

मुख्य बातें

राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने सभी इकाइयों को भंग किया है।
पार्टी में आंतरिक असंतोष और इस्तीफे का मामला सामने आया है।
पांच सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है।

पटना, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने प्रदेश इकाई सहित सभी प्रकोष्ठों व जिला इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता फजल इमाम मल्लिक ने इसकी जानकारी दी।

फजल इमाम मल्लिक ने बताया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा की प्रदेश इकाई सहित सभी प्रकोष्ठों व जिला इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग करने का फैसला लिया गया है। रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता फजल इमाम मल्लिक ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी के संचालन के लिए तत्काल पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति का संयोजक मदन चौधरी को बनाया गया है। सुभाष चंद्रवंशी, प्रशांत पंकज, हिमांशु पटेल और आरके. सिन्हा समिति के सदस्य बनाए गए हैं।

उपेंद्र कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में मुख्य रूप से विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह, राम पुकार सिन्हा, जंगबहादुर सिंह, अंगद कुशवाहा, ठाकुर धर्मेंद्र सिंह, ब्रजेन्द्र पप्पू, चंदन बागची, सुकुल राम और स्मृति कुमुद शामिल थे।

हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ सहित कई नेताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ के अलावा इस्तीफा देने वालों में प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता राहुल कुमार और कई अन्य नेता भी शामिल हैं। सभी ने अपने-अपने त्यागपत्रों में पार्टी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ ने अपने पत्र में कहा था, "मैं लगभग 9 वर्ष से आपके साथ काम कर रहा हूं, लेकिन अब कई राजनीतिक और सांगठनिक निर्णयों से स्वयं को जोड़ नहीं पा रहा हूं। ऐसी स्थिति में अब साथ काम करना संभव नहीं रह गया है। इसलिए पार्टी की अपनी जिम्मेदारी और प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देना ही उचित है।"

इसके साथ ही प्रदेश महासचिव राहुल कुमार ने अपने इस्तीफे में लिखा कि पार्टी द्वारा हाल में लिए गए कई निर्णयों से वे असहज हैं, जिन्हें वे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले कई नेता विधानसभा चुनाव में हुई उपेक्षा से भी नाराज थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने क्यों निर्णय लिया?
पार्टी में चल रहे आंतरिक असंतोष और कई नेताओं के इस्तीफे के कारण यह निर्णय लिया गया।
कौन है समिति का संयोजक?
समिति का संयोजक मदन चौधरी को बनाया गया है।
क्या इस फैसले का प्रभाव पार्टी पर पड़ेगा?
हाँ, यह निर्णय पार्टी की संगठनात्मक संरचना और उसके जनाधार पर प्रभाव डाल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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