रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 70 तस्वीरें हटाने पर बवाल, गहलोत बोले— 'यह सेंसरशिप है'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित युवा कलाकार रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी 'नो आइडिया इज फाइनल' से 70 से अधिक तस्वीरें हटाए जाने पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रदर्शनी बुधवार शाम शुरू होनी थी, लेकिन कथित तौर पर कुछ घंटे पहले ही बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अधिकांश तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया। रेहान वाड्रा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पुत्र हैं।
क्या है पूरा मामला
रेहान वाड्रा ने आरोप लगाया है कि राजस्थान सरकार द्वारा संचालित बीकानेर हाउस के प्रबंधन ने प्रदर्शनी खुलने से महज कुछ घंटे पहले उनकी 70 से ज़्यादा तस्वीरें प्रदर्शित न करने को कहा। इन तस्वीरों में राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए युवा आंदोलनों और प्रदर्शनों के दृश्य थे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रबंधन ने तिरंगे वाली दो तस्वीरें हटाने का विशेष अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया।
गहलोत की तीखी प्रतिक्रिया
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे खुली सेंसरशिप करार दिया। उन्होंने लिखा, 'रेहान वाड्रा से तिरंगे वाली दो तस्वीरें हटाने को कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया। उनकी यह दृढ़ता सराहनीय है। उन्होंने दिखा दिया है कि तिरंगे के सम्मान से कोई समझौता नहीं हो सकता।'
गहलोत ने आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है और वहाँ से तस्वीरें हटाना एक युवा कलाकार की अभिव्यक्ति को दबाने जैसा है। उनके अनुसार, यह सब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की देखरेख में हुआ है।
BJP पर सीधा हमला
गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनी में लगी अनेक तस्वीरें दिल्ली में हुए युवा आंदोलनों से जुड़ी सच्चाई को सामने रखती थीं। उन्होंने कहा, 'BJP को डर है कि लोग इन आंदोलनों की सच्चाई जान जाएंगे, इसलिए वह इसे छिपाने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने पार्टी से यह सफ़ाई देने की माँग की कि सच्चाई दिखाने वाली तस्वीरों को क्यों हटाया गया।
गौरतलब है कि बीकानेर हाउस नई दिल्ली में राजस्थान सरकार का अतिथि भवन और सांस्कृतिक केंद्र है, जहाँ नियमित रूप से कला प्रदर्शनियाँ आयोजित होती हैं। राजस्थान में इस समय BJP की सरकार है।
लोकतंत्र और कलात्मक स्वतंत्रता का सवाल
गहलोत ने इस पूरी घटना को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। उनका कहना है, 'कलाकारों की आवाज़ को दबाना लोकतंत्र पर हमला है। यह सेंसरशिप का स्पष्ट मामला है।' आलोचकों का कहना है कि यह घटना कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के व्यापक सवालों को एक बार फिर सामने लाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक स्थलों पर कलात्मक अभिव्यक्ति और सरकारी नियंत्रण के बीच तनाव पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। BJP की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
रेहान वाड्रा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे तिरंगे वाली तस्वीरें नहीं हटाएंगे। प्रदर्शनी की स्थिति और शेष तस्वीरों के प्रदर्शन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस मामले में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है, जो राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती हैं।