रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से 70+ तस्वीरें हटाईं, प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 70 से अधिक तस्वीरें हटाए जाने का मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस फैसले को कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है, जबकि शिवसेना नेता आनंद दुबे ने बीकानेर हाउस प्रबंधन के अधिकार का बचाव किया है। उल्लेखनीय है कि रेहान वाड्रा, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे हैं।
प्रदर्शनी विवाद का पूरा घटनाक्रम
बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अपनी नियमावली का हवाला देते हुए रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 70 से अधिक तस्वीरें हटा दीं। प्रबंधन का कहना था कि ये तस्वीरें उनकी निर्धारित नीति के अनुकूल नहीं थीं, जिसके तहत राजनीतिक, भ्रामक या विवादास्पद सामग्री की अनुमति नहीं है। हटाई गई तस्वीरों में कथित तौर पर विरोध-प्रदर्शनों की छवियाँ शामिल थीं।
प्रियंका चतुर्वेदी की आपत्ति
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'मैंने बीकानेर हाउस की नियमावली देखी, जिसमें लिखा है कि किसी भी तरह की राजनीतिक, भ्रामक या विवादास्पद सामग्री नहीं होनी चाहिए, लेकिन मैं जानना चाहती हूं कि अगर एक क्रिएटिव फोटोग्राफर अपने आसपास हो रही घटनाओं को देखकर उसे विजुअलाइज करके तस्वीरें लेता है, जैसे कि विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरें, तो उससे किस तरह का विवाद खड़ा हो सकता है।'
चतुर्वेदी ने यह भी कहा, 'रेहान वाड्रा राजनीति में नहीं हैं, सिर्फ इसलिए कि वह एक राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं, उन पर पाबंदी लगाना गलत है। हर कलाकार को, खासकर क्रिएटिव आर्टिस्ट को अपने विजुअल्स और अपने अनुभवों को दिखाने का मौका मिलना चाहिए।' उनके अनुसार यह एक प्रत्यक्षदर्शी का वृत्तांत है, जिसे महज राजनीतिक पृष्ठभूमि के आधार पर दबाया नहीं जाना चाहिए।
आनंद दुबे का समर्थन — प्रबंधन के पक्ष में
दूसरी ओर, मुंबई में शिवसेना नेता आनंद दुबे ने बीकानेर हाउस के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। उन्होंने कहा, 'बीकानेर हाउस ने स्पष्टीकरण दिया है कि कुछ तस्वीरें उनकी नियमावली पर फिट नहीं बैठती थीं, इसलिए उन्हें हटाया गया। इसमें न तो कांग्रेस की बात है और न ही भाजपा की।'
दुबे ने आगे कहा, 'एक कलाकार, कलाकार होता है। आप किसी भी क्षेत्र में हों — अच्छे फोटोग्राफर हैं, अच्छे कलाकार हैं — प्रदर्शनी लगाइए, लेकिन अगर कोई प्रदर्शनी आपत्तिजनक है तो उसे हटाने का अधिकार बोर्ड के पास है, उस जगह के प्रबंधन के पास है।' उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि इसे रॉबर्ट वाड्रा के परिवार से जोड़ना उचित नहीं है।
कलात्मक स्वतंत्रता बनाम संस्थागत नियमावली
यह विवाद एक व्यापक बहस को भी सामने लाता है — सरकारी या अर्ध-सरकारी स्थानों पर आयोजित कला प्रदर्शनियों में सामग्री नियंत्रण की सीमा क्या होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि 'विवादास्पद सामग्री' की परिभाषा अस्पष्ट है और इसका दुरुपयोग असुविधाजनक कला को रोकने में हो सकता है। वहीं, प्रबंधन के समर्थकों का तर्क है कि हर संस्था को अपने परिसर में प्रदर्शित सामग्री तय करने का अधिकार है।
आगे क्या होगा
फिलहाल बीकानेर हाउस प्रबंधन ने तस्वीरें हटाने के फैसले पर कोई अतिरिक्त विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। रेहान वाड्रा या प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद या सार्वजनिक मंचों पर और आगे ले जाते हैं।