राजद का परिसीमन विधेयक के खिलाफ जबरदस्त विरोध, अभय सिन्हा की अपील- पहले हो जातीय जनगणना

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राजद का परिसीमन विधेयक के खिलाफ जबरदस्त विरोध, अभय सिन्हा की अपील- पहले हो जातीय जनगणना

सारांश

नई दिल्ली में राजद के सांसद अभय सिन्हा ने परिसीमन विधेयक का तीखा विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले जातीय जनगणना कराई जानी चाहिए ताकि सही आंकड़े प्राप्त हों। सरकार की मंशा पर उठाए सवालों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

Key Takeaways

  • अभय कुमार सिन्हा का विधेयक पर कड़ा विरोध।
  • जातीय जनगणना की मांग।
  • महिला आरक्षण का महत्व।
  • सरकार की मंशा पर सवाल।
  • परिसीमन प्रक्रिया की आलोचना।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में गुरुवार को संविधान (131वां) संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक पर पक्ष और विपक्ष के बीच गहन बहस हुई। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध करते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।

अभय कुमार सिन्हा ने अपने भाषण की शुरुआत बिहार की ऐतिहासिक और सामाजिक विरासत की चर्चा करके की। उन्होंने कहा कि वे उस बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, राजेंद्र प्रसाद, कर्पूरी ठाकुर और जगदेव प्रसाद जैसी महान हस्तियों की भूमि है। बिहार सामाजिक न्याय और मंडल राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

उन्होंने यह आरोप लगाया कि यह विधेयक चुनावी सुधार के नाम पर पेश किया गया है, लेकिन असल में इसका उद्देश्य देश की राजनीतिक संरचना को स्थायी रूप से एक पार्टी के पक्ष में मोड़ना है। 'एक व्यक्ति, एक वोट' के नारे में इसे लपेटकर जल्दबाजी में पेश किया गया है, जिससे सरकार की वास्तविक मंशा साफ झलकती है। जो सरकार 2021 की जनगणना को वर्षों तक टालती रही और 106वें संविधान संशोधन को तीन साल तक लंबित रखा, वह अब इतनी जल्दी क्यों दिखा रही है?

उन्होंने कहा कि 15 साल पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि पहले जातीय जनगणना कराई जाए ताकि सही आंकड़े सामने आ सकें और उसके बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जाए। अभय कुमार सिन्हा ने विधेयक के एक प्रावधान को 'सबसे खतरनाक' बताते हुए कहा कि आयोग का अंतिम आदेश गजट में प्रकाशित होते ही कानून बन जाएगा और उस पर अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। उन्होंने इसे संविधान की मूल संरचना पर एक हमले के रूप में देखा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण की समर्थक है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव का हवाला देते हुए कहा कि बिना पिछड़ा, अति पिछड़ा, अल्पसंख्यक और दलित वर्ग की महिलाओं को शामिल किए महिला आरक्षण अधूरा रहेगा। यह विधेयक शहरी और संपन्न वर्ग की महिलाओं को अधिक लाभ पहुंचाएगा, जबकि संघर्ष कर रही और वंचित वर्ग की महिलाएं पीछे छूट जाएंगी। सच्चा सशक्तीकरण केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से नहीं होगा, बल्कि तब होगा, जब हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिलें। उन्होंने सरकार से पूछा कि वह जातीय जनगणना से क्यों बच रही है?

Point of View

निश्चित रूप से विचारणीय है।
NationPress
16/04/2026

Frequently Asked Questions

परिसीमन विधेयक क्या है?
परिसीमन विधेयक एक ऐसा विधेयक है जो चुनावी क्षेत्रों के सीमांकन का कार्य करता है।
जातीय जनगणना का महत्व क्या है?
जातीय जनगणना से विभिन्न जातियों और समुदायों की सही संख्या और स्थिति का पता चलता है, जो नीतियों के निर्माण में मददगार होता है।
राजद का क्या कहना है?
राजद के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा है कि पहले जातीय जनगणना होनी चाहिए।
महिला आरक्षण विधेयक में क्या शामिल है?
महिला आरक्षण विधेयक में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।
सरकार का तर्क क्या है?
सरकार का तर्क है कि परिसीमन विधेयक चुनावी सुधार के लिए आवश्यक है।
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