कैप्टन स्मित मच्छार पर कांग्रेस की चुप्पी शर्मनाक: BJP सचिव रोहन गुप्ता का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने 5 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर में कांग्रेस पर कई मोर्चों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार की वीरता पर कांग्रेस की चुप्पी को 'शर्मनाक' करार दिया और कहा कि देश के सैनिकों के सम्मान के मामले में भी राजनीति करना पार्टी की तुष्टीकरण नीति को उजागर करता है।
कैप्टन स्मित मच्छार पर कांग्रेस की चुप्पी
रोहन गुप्ता ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार वैश्विक स्तर पर प्रशंसा पाने वाले वीर हैं। उन्होंने कहा, 'पूरी दुनिया के नेताओं ने उनकी बहादुरी को सलाम किया, लेकिन कांग्रेस की ओर से एक शब्द तक नहीं आया।' गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्र-नायक के सम्मान का प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि यदि देश के वीरों के सम्मान में भी राजनीतिक हित आड़े आते हैं, तो यह न केवल शर्म की बात है, बल्कि यह जनता को भी स्वीकार्य नहीं होगा। गुप्ता ने सवाल उठाया कि जब दुनियाभर के नेताओं ने कैप्टन की वीरता की सराहना की, तो कांग्रेस के लिए ऐसा करने में क्या बाधा थी।
दिग्विजय सिंह की पदयात्रा पर प्रहार
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की पदयात्रा पर भी गुप्ता ने तीखा वार किया। उन्होंने दिग्विजय सिंह के पूर्व बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ही 'भगवा आतंकवाद' जैसी शब्दावली को सार्वजनिक विमर्श में लाया था और देश पर हुए हमलों के संदर्भ में भी हिंदुओं पर सवाल उठाए थे।
गुप्ता ने कहा कि ऐसे में हिंदू धर्म और सनातन की बात करने का नैतिक आधार क्या बचता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सनातन का विरोध करने वालों को राजनीतिक संरक्षण दिया और भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों के साथ खड़ी रही। गुप्ता ने कहा, 'दिया जब बुझने वाला होता है तो ज़्यादा फड़फड़ाता है — कांग्रेस की मौजूदा स्थिति भी कुछ ऐसी ही है।'
मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद और सुप्रीम कोर्ट
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तत्काल निलंबन से इनकार किए जाने के बाद गुप्ता ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और अब इस पर अनावश्यक राजनीति नहीं होनी चाहिए।
गुप्ता ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी संकेत दिया कि केवल किसी अखबार की खबर या लेख के आधार पर गंभीर आरोपों को वैध नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकारें होने पर वहाँ की चुनावी प्रक्रिया पर कभी सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बनाया जाता है।
संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का सवाल
गुप्ता ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है और बार-बार किसी संस्था को दोषी ठहराना समाधान नहीं है।
गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और सवाल किया कि क्या उसके लिए भी किसी संस्था को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने विपक्ष से अपने संगठन की आंतरिक कमियों पर विचार करने की अपील की।
आगे क्या
गुप्ता के इन बयानों से BJP और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध और तेज होने की संभावना है, खासकर कैप्टन स्मित मच्छार के सम्मान और चुनाव आयोग की स्वायत्तता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़ी याचिकाओं की आगामी सुनवाई पर सभी की नज़र रहेगी।