डेनिस मंटुरोव: नई दिल्ली में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर महत्वपूर्ण वार्ता के लिए पहुंचे
सारांश
Key Takeaways
- डेनिस मंटुरोव की नई दिल्ली यात्रा
- द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का प्रयास
- रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर महत्वपूर्ण चर्चा
- पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक प्रभाव पर विचार
- अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट के बाद कच्चे तेल का सप्लाई
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अन्य कई द्विपक्षीय मुद्दों पर उच्च स्तरीय चर्चा के लिए गुरुवार तड़के नई दिल्ली में कदम रखा। पालम हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
विदेश मंत्रालय ने एक्स पोस्ट में कहा, "रूसी संघ के प्रथम उपाध्यक्ष और भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सांस्कृतिक सहयोग) के सह अध्यक्ष डेनिस मंटुरोव का नई दिल्ली में हार्दिक स्वागत।"
इस यात्रा के दौरान वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर से परामर्श करेंगे और अन्य द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे।"
अधिकारियों के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से संबंधित घटनाक्रम भी चर्चा का प्रमुख विषय रहने की संभावना है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंटुरोव अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है।
अमेरिकी प्रतिबंधों में एक महीने की छूट के बाद रूस हाल के हफ्तों में एक बार फिर भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है।
इससे पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूसी उप विदेश मंत्री एंड्री रुडेंको ने 30 मार्च को नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता की, जहां दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया था।
दोनों पक्षों ने पिछले दिसंबर में नई दिल्ली में आयोजित भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन में हुई प्रगति का भी मूल्यांकन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
भारत में मंटुरोव की मुलाकातों में पश्चिम एशिया संघर्ष के व्यापक आर्थिक प्रभाव, विशेष रूप से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और दोनों देशों पर इसके प्रभावों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।