3 अक्टूबर 2026
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'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख' पुस्तक का अनावरण, उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा — यह विरासत इस क्षेत्र की आत्मा है

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'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख' पुस्तक का अनावरण, उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा — यह विरासत इस क्षेत्र की आत्मा है

सारांश

लद्दाख की लुप्त होती बौद्ध कला और पवित्र विरासत को दस्तावेज़ में जीवित रखने की कोशिश — उद्योगपति श्रीकांत सोमानी की पुस्तक 'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख: फेडिंग ट्रेजर्स' का अनावरण उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लेह में किया। एक पर्यटक से विरासत संरक्षक बनने की सोमानी की यात्रा उतनी ही प्रेरणादायक है जितनी यह पुस्तक।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 2 अक्टूबर 2026 को लेह में पुस्तक 'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख: फेडिंग ट्रेजर्स' का अनावरण किया।
पुस्तक में लद्दाख की बौद्ध कला , वास्तुकला, आध्यात्मिक परंपराओं और पवित्र विरासत स्थलों को विस्तार से दर्ज किया गया है।
लेखक श्रीकांत सोमानी , सोमानी सेरामिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं, जो लद्दाख की यात्राओं के दौरान यहाँ की विरासत से प्रभावित हुए।
सक्सेना ने पुस्तक को केवल चित्र-संग्रह नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ी प्रयास बताया।
यह पुस्तक लद्दाख की धीरे-धीरे लुप्त होती कला और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 2 अक्टूबर 2026 को लेह में लेखक श्रीकांत सोमानी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक 'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख: फेडिंग ट्रेजर्स' का विधिवत अनावरण किया। इस पुस्तक में लद्दाख की बौद्ध कला, वास्तुकला, आध्यात्मिक परंपराओं और पवित्र विरासत स्थलों को विस्तारपूर्वक दस्तावेज़ के रूप में संकलित किया गया है। यह अनावरण ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब हिमालयी क्षेत्र की सदियों पुरानी कला और सांस्कृतिक विरासत के क्षरण को लेकर चिंताएँ गहराती जा रही हैं।

पुस्तक की विषयवस्तु और महत्व

उपराज्यपाल सक्सेना ने अनावरण समारोह में कहा कि 'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख: फेडिंग ट्रेजर्स' महज़ तस्वीरों का संग्रह नहीं, बल्कि लद्दाख की समृद्ध संस्कृति, कला, परंपरा और विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ी प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यही विरासत इस क्षेत्र की आत्मा है।' सक्सेना ने यह भी बताया कि अनावरण से पहले उन्होंने स्वयं पुस्तक के पन्ने पलटे और लेखक की बारीकी से प्रभावित हुए।

पुस्तक में लद्दाख के विभिन्न पवित्र विरासत स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और कलात्मक विशेषताओं के साथ-साथ उनकी प्रतीकात्मकता और दृश्यात्मक पक्ष को बारीकी से प्रस्तुत किया गया है। इसके माध्यम से लुप्त होती कला और विरासत के संरक्षण की अनिवार्यता को रेखांकित किया गया है।

लेखक श्रीकांत सोमानी की प्रेरणादायक यात्रा

पुस्तक के लेखक श्रीकांत सोमानी प्रसिद्ध उद्योगपति और सोमानी सेरामिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं। लद्दाख की यात्राओं के दौरान वे यहाँ की कला और सांस्कृतिक विरासत से गहराई से प्रभावित हुए, जिसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र की धरोहर को दस्तावेज़ीकृत करने का संकल्प लिया।

उपराज्यपाल सक्सेना ने इस सफर को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि एक पर्यटक से खोजकर्ता और फिर लद्दाख की विरासत के समर्पित संरक्षक बनने तक सोमानी की यात्रा अनुकरणीय है। गौरतलब है कि इस प्रकार के निजी दस्तावेज़ीकरण प्रयास उन अंतरालों को भरते हैं जिन्हें सरकारी संरक्षण कार्यक्रम अक्सर पाट नहीं पाते।

विरासत संरक्षण की व्यापक चुनौती

लद्दाख के मठों, भित्तिचित्रों और पारंपरिक स्थापत्य पर जलवायु परिवर्तन, पर्यटन के बढ़ते दबाव और संसाधनों की कमी का असर पड़ रहा है। यह पुस्तक ऐसे संदर्भ में आई है जब सांस्कृतिक विशेषज्ञ और पुरातत्वविद लगातार यह चेतावनी देते रहे हैं कि यदि समयरहते दस्तावेज़ीकरण नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियाँ इस अमूल्य धरोहर से वंचित रह जाएँगी। 'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख: फेडिंग ट्रेजर्स' इसी खाई को पाटने की एक ठोस कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

आगे की राह

उपराज्यपाल सक्सेना ने इस पहल की सराहना करते हुए ऐसे और प्रयासों को प्रोत्साहन देने का संकेत दिया। यह पुस्तक शोधकर्ताओं, कला प्रेमियों और नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री बन सकती है, और लद्दाख की विरासत के व्यवस्थित संरक्षण की दिशा में नई बहस को जन्म दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक पुस्तक का अनावरण तब तक नीतिगत बदलाव नहीं ला सकता जब तक इसे व्यापक संरक्षण ढाँचे से नहीं जोड़ा जाता। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे दस्तावेज़ीकरण को सरकारी बजट और अंतरराष्ट्रीय विरासत संस्थाओं की प्राथमिकता सूची में स्थान मिलेगा।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सेक्रेड आर्ट ऑफ लद्दाख: फेडिंग ट्रेजर्स' पुस्तक किस बारे में है?
यह पुस्तक लद्दाख की बौद्ध कला, वास्तुकला, आध्यात्मिक परंपराओं और पवित्र विरासत स्थलों का विस्तृत दस्तावेज़ीकरण है। इसमें लुप्त होती कला और सांस्कृतिक धरोहर को ऐतिहासिक, धार्मिक और कलात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।
इस पुस्तक के लेखक श्रीकांत सोमानी कौन हैं?
श्रीकांत सोमानी प्रसिद्ध उद्योगपति और सोमानी सेरामिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं। लद्दाख की यात्राओं के दौरान वे यहाँ की कला और विरासत से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे दस्तावेज़ीकृत करने का बीड़ा उठाया।
पुस्तक का अनावरण किसने और कहाँ किया?
पुस्तक का अनावरण लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 2 अक्टूबर 2026 को लेह में किया। उन्होंने इसे लद्दाख की संस्कृति और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत को खतरा क्यों है?
जलवायु परिवर्तन, बढ़ते पर्यटन और संसाधनों की कमी के कारण लद्दाख के मठों, भित्तिचित्रों और पारंपरिक स्थापत्य को नुकसान पहुँच रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, समयरहते दस्तावेज़ीकरण न हो तो यह अमूल्य धरोहर भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपूरणीय क्षति बन सकती है।
उपराज्यपाल सक्सेना ने पुस्तक के बारे में क्या कहा?
उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा कि यह पुस्तक केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ी प्रयास है। उन्होंने कहा कि 'यही विरासत इस क्षेत्र की आत्मा है' और लेखक सोमानी की पर्यटक से संरक्षक बनने की यात्रा को प्रेरणादायक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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