31 जुलाई 2026
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लद्दाख में देश का पहला ब्लैक-नेक्ड क्रेन फेस्टिवल 11–14 अगस्त को, LG सक्सेना ने की घोषणा

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लद्दाख में देश का पहला ब्लैक-नेक्ड क्रेन फेस्टिवल 11–14 अगस्त को, LG सक्सेना ने की घोषणा

सारांश

लद्दाख में 11–14 अगस्त 2026 को देश का पहला ब्लैक-नेक्ड क्रेन फेस्टिवल आयोजित होगा — यह सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि भारत के एकमात्र अल्पाइन क्रेन के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। लेह, त्सो कार और हानले में होने वाला यह आयोजन संस्कृति, बर्डवॉचिंग और सामुदायिक जागरूकता को एक मंच पर लाएगा।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 31 जुलाई 2026 को देश के पहले ब्लैक-नेक्ड क्रेन फेस्टिवल की घोषणा की।
फेस्टिवल 11–14 अगस्त 2026 को लेह , त्सो कार और हानले में आयोजित होगा।
ब्लैक-नेक्ड क्रेन लद्दाख का राज्य पक्षी है; भारत में केवल लद्दाख में ही इसका सफल प्रजनन होता है।
यह पक्षी प्रतिवर्ष मार्च–अप्रैल में चांगथांग क्षेत्र के वेटलैंड में आता है और लगभग 30 सेमी गहरे पानी में घोंसला बनाता है।
आवारा कुत्ते, अत्यधिक चराई और पर्यटकों की बाधा इस दुर्लभ प्रजाति के लिए प्रमुख खतरे हैं।

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 31 जुलाई 2026 को देश के पहले ब्लैक-नेक्ड क्रेन फेस्टिवल की घोषणा की, जो 11 अगस्त से 14 अगस्त 2026 तक लेह, त्सो कार और हानले में आयोजित होगा। यह आयोजन लद्दाख की अनूठी प्राकृतिक विरासत और वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

फेस्टिवल में क्या होगा

उपराज्यपाल सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'देश का पहला ब्लैक-नेक्ड क्रेन फेस्टिवल लद्दाख की बेमिसाल प्राकृतिक विरासत और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन के लिए हमारे मिलकर किए गए वादे का जश्न है।' उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे 11–14 अगस्त के दौरान संरक्षण, संस्कृति, बर्डवॉचिंग और सामुदायिक सहभागिता की इस अनोखी यात्रा में शामिल हों। फेस्टिवल का केंद्रीय उद्देश्य दुनिया के एकमात्र अल्पाइन क्रेन की सुरक्षा के लिए जन-जागरूकता बढ़ाना है।

ब्लैक-नेक्ड क्रेन और लद्दाख का गहरा नाता

ब्लैक-नेक्ड क्रेन लद्दाख का राज्य पक्षी है और स्थानीय संस्कृति में 'चा थुंग-थुंग' के नाम से जाना जाता है। इसे खुशहाली और सौभाग्य का पवित्र प्रतीक माना जाता है — लोककथाओं के अनुसार इस पक्षी के जोड़े का दर्शन शुभ होता है। इस पक्षी के भव्य कोर्टशिप नृत्य ने पारंपरिक लद्दाखी लोक प्रदर्शन 'चार्टसेस' नृत्य को सीधे प्रेरित किया है।

भारत में केवल लद्दाख ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ ये दुर्लभ पक्षी सफलतापूर्वक प्रजनन करते हैं। ये प्रतिवर्ष मार्च–अप्रैल में चांगथांग क्षेत्र के त्सो कार, त्सो मोरीरी और हानले के ऊँचाई वाले दलदल, वेटलैंड और झीलों में प्रजनन के लिए आते हैं। ये पक्षी शिकारियों से अंडों की रक्षा के लिए लगभग 30 सेंटीमीटर गहरे वेटलैंड जल में घोंसले बनाते हैं।

खतरे और संरक्षण की ज़रूरत

इस दुर्लभ प्रजाति पर कई तरफ से दबाव है। आवारा कुत्तों द्वारा अंडों को नुकसान, अत्यधिक पशु-चराई से आवास का क्षरण, और प्रजनन के महीनों में पर्यटकों की अनावश्यक आवाजाही इस पक्षी के अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घोंसला-स्थलों की सुरक्षा के लिए सामुदायिक भागीदारी अनिवार्य है।

आम जनता और पर्यटकों पर असर

यह फेस्टिवल न केवल संरक्षण की दृष्टि से, बल्कि इको-टूरिज्म के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। लेह, त्सो कार और हानले में होने वाले इस आयोजन से स्थानीय समुदायों को आजीविका के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब लद्दाख में पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को बढ़ावा देने की माँग लगातार उठ रही है।

आगे की राह

उपराज्यपाल सक्सेना ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे 'इन पवित्र पंखों की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए लद्दाख के पुराने इकोसिस्टम को बचाएं।' यह फेस्टिवल भविष्य में वार्षिक परंपरा बनने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है, जो लद्दाख को वैश्विक बर्डवॉचिंग मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा उत्सव के बाद की नीति में होगी। लद्दाख के वेटलैंड पहले से ही जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित पर्यटन के दोहरे दबाव में हैं — फेस्टिवल यदि और अधिक पर्यटकों को प्रजनन-स्थलों की ओर खींचता है, तो यह उसी समस्या को बढ़ा सकता है जिसे हल करने का दावा किया जा रहा है। स्थायी संरक्षण के लिए उत्सव के साथ-साथ बफर ज़ोन नियमों का कड़ा क्रियान्वयन और स्थानीय समुदायों को संरक्षण का आर्थिक हिस्सेदार बनाना भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देश का पहला ब्लैक-नेक्ड क्रेन फेस्टिवल कब और कहाँ होगा?
यह फेस्टिवल 11 से 14 अगस्त 2026 तक लद्दाख के लेह, त्सो कार और हानले में आयोजित होगा। इसकी घोषणा उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 31 जुलाई 2026 को की।
ब्लैक-नेक्ड क्रेन को लद्दाख में 'चा थुंग-थुंग' क्यों कहते हैं?
'चा थुंग-थुंग' इस पक्षी का स्थानीय लद्दाखी नाम है। इसे खुशहाली और सौभाग्य का पवित्र प्रतीक माना जाता है और लोककथाओं में इसके जोड़े का दर्शन शुभ माना जाता है।
भारत में ब्लैक-नेक्ड क्रेन कहाँ प्रजनन करता है?
लद्दाख भारत का एकमात्र क्षेत्र है जहाँ ब्लैक-नेक्ड क्रेन सफलतापूर्वक प्रजनन करता है। ये पक्षी मार्च–अप्रैल में चांगथांग क्षेत्र के त्सो कार, त्सो मोरीरी और हानले के वेटलैंड में आते हैं।
ब्लैक-नेक्ड क्रेन के सामने क्या खतरे हैं?
इस दुर्लभ प्रजाति को आवारा कुत्तों से अंडों को खतरा, अत्यधिक पशु-चराई से आवास का नुकसान, और प्रजनन के महीनों में पर्यटकों की आवाजाही से व्यवधान जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
इस फेस्टिवल का स्थानीय समुदाय पर क्या असर होगा?
फेस्टिवल से लेह, त्सो कार और हानले के स्थानीय समुदायों को इको-टूरिज्म के ज़रिए आजीविका के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। साथ ही, सामुदायिक सहभागिता के ज़रिए संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
राष्ट्र प्रेस
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