साध्वी प्रेम बाईसा की मृत्यु: कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की गिरफ्तारी और जमानत
सारांश
Key Takeaways
- साध्वी प्रेम बाईसा का निधन 28 जनवरी को हुआ था।
- कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित पर साध्वी को इंजेक्शन लगाने का आरोप है।
- राजपुरोहित को 19 फरवरी को जमानत पर रिहा किया गया।
- मामला चिकित्सा लापरवाही से संबंधित है।
- जांच जारी है और आगे की कार्रवाई आवश्यक है।
जोधपुर, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। साध्वी प्रेम बाईसा के निधन से संबंधित मामले में गिरफ्तार किए गए कंपाउंडर को पुलिस ने उसी दिन रिहा कर दिया।
आरोपी कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित पर साध्वी को इंजेक्शन लगाने का आरोप था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल जाते समय उनकी मृत्यु हो गई। राजपुरोहित को 19 फरवरी को जमानत पर रिहा किया गया था।
पुलिस के सूत्रों के अनुसार, साध्वी की मृत्यु के करीब 20 दिन बाद 16 फरवरी को बोरनाडा पुलिस स्टेशन में कंपाउंडर के खिलाफ लापरवाही और चिकित्सा से संबंधित लापरवाही का मामला दर्ज किया गया था।
मामला दर्ज होने के बाद देवी सिंह राजपुरोहित को 19 फरवरी को गिरफ्तार किया गया और जमानत बांड जमा करने के बाद रिहा कर दिया गया। उसकी गिरफ्तारी और रिहाई की जानकारी रविवार को सामने आई।
इस मामले में डीसीपी पश्चिम विनीत बंसल ने पुष्टि की कि आरोप जमानती थे, और कहा कि गिरफ्तारी और रिहाई कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई थी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो कंपाउंडर को दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है।
साध्वी प्रेम बाईसा का निधन 28 जनवरी को जोधपुर के बोरनाडा क्षेत्र में स्थित उनके आरती नगर आश्रम में हुआ था। परिवार के सदस्यों के अनुसार, उन्हें सर्दी-जुकाम और सांस लेने में कठिनाई हो रही थी, जिसके बाद कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को इलाज के लिए बुलाया गया था।
देवी सिंह राजपुरोहित ने साध्वी को दो इंजेक्शन दिए, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत पाल रोड स्थित प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
साध्वी के पिता वीरम नाथ ने बाद में शव को आश्रम वापस ले आए। मामले की जानकारी पुलिस को मिलने के बाद शव को महात्मा गांधी अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस लाया गया और 29 जनवरी को पोस्टमार्टम किया गया।
पोस्टमार्टम के बाद उसी शाम को शव परिवार को सौंप दिया गया। 30 जनवरी को बाड़मेर में साध्वी का अंतिम संस्कार किया गया। दो फरवरी को आंतरिक अंगों के नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए, और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) ने 11 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी की।
पोस्टमार्टम और एफएसएल की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मृत्यु के कारण का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लिया। जांच के तहत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने साध्वी के पिता, सोशल मीडिया स्टाफ, रसोइया, कंपाउंडर और अस्पताल के कर्मचारियों से पूछताछ की।
जोधपुर पुलिस आयुक्त ओम प्रकाश ने बताया कि मृत्यु का प्राथमिक कारण फेफड़ों की गंभीर बीमारी के चलते हृदय गति रुकना था, लेकिन जांच में यह भी पाया गया कि कंपाउंडर ने कथित तौर पर इलाज के दौरान चिकित्सा प्रोटोकॉल की अनदेखी की, जो बड़ी लापरवाही का संकेत है।
इस मामले में जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई अदालती कार्यवाही और विशेषज्ञ चिकित्सा राय पर निर्भर करेगी।