क्या सैयदा हमीद का विवादित बयान कांग्रेस के लिए मुश्किल साबित होगा?

सारांश
Key Takeaways
- सैयदा हमीद का विवादास्पद बयान राजनीतिक बहस का कारण बना।
- कांग्रेस ने उनके बयान से दूरी बनाई।
- अवधि में अवैध प्रवासियों की समस्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
- बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर विचार करने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में योजना आयोग की सदस्य रहीं सैयदा हमीद के द्वारा अवैध बांग्लादेशियों के भारत में निवास को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि अवैध बांग्लादेशियों को भारत में रहने का अधिकार होना चाहिए। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस उनके इस बयान से स्पष्ट दूरी बनाते हुए नजर आ रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि सैयदा हमीद का यह बयान पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा, "जब से भाजपा केंद्र में आई है, तब से बांग्लादेशी और बाहरी लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर रहे हैं। ११ साल एक बड़ा समय है। ऐसे मामलों में एक साल भी बहुत होता है कि अवैध प्रवासियों को पहचानकर बाहर निकाला जा सके।"
उन्होंने यह भी कहा, "झारखंड और दिल्ली में चुनाव के दौरान बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासी दिखाई दिए। अब असम में चुनाव हो रहे हैं। बिहार में एसआईआर के दौरान अवैध प्रवासियों को क्यों नहीं पकड़ा गया? ऐसा लगता है कि सरकार खुद अवैध प्रवासियों को भारत में प्रवेश करा रही है। भारत कोई चारागाह नहीं है कि लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश से आकर हमारे देश में रहें। सैयदा हमीद ने जो कहा, वह गलत है। यह कांग्रेस पार्टी का स्टैंड नहीं है। पार्टी इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी अवैध आगमन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
उदित राज ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार के बारे में कहा, "बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है। यदि केंद्र में कांग्रेस होती, तो अब तक वहां सेना भेज दी होती। यह हमारे पड़ोसी देश है, जहां सत्ता परिवर्तन हुआ है, लेकिन भारत सरकार को इसकी जानकारी नहीं है। हमारी विदेश नीति और इंटेलिजेंस क्या हैं? हिंदू, बौद्ध और ईसाई मारे जा रहे हैं। ये घटनाएँ किसके कार्यकाल में हो रही हैं? कांग्रेस के कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं हुआ। उस समय पड़ोसी देश का विभाजन भी हुआ था। यदि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक मारे जा रहे हैं, तो इसके लिए प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं। वे पूरी दुनिया में घूम रहे हैं, लेकिन अपने घर के आसपास अंधेरा है। इस स्थिति में हमारी विदेश नीति क्या है?"