6 अक्टूबर 2026
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दुर्गा पूजा में नॉन-वेज विवाद पर संजय निरुपम: 'हिंदू परंपरा केवल शाकाहार तक सीमित नहीं'

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दुर्गा पूजा में नॉन-वेज विवाद पर संजय निरुपम: 'हिंदू परंपरा केवल शाकाहार तक सीमित नहीं'

सारांश

दुर्गा पूजा के बीच मांसाहार की बहस पर शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम का दोटूक — हिंदुस्तान कभी 100% शाकाहारी नहीं रहा, बंगाल की बलि परंपरा सदियों पुरानी है। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग मार्च को राजनीतिक दलों को बचाने की कवायद और SIR को लोकतांत्रिक ज़रूरत बताया।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि हिंदू और सनातन परंपराएँ केवल शाकाहार तक सीमित नहीं हैं।
नवरात्रि और नवमी पर देवी को पशु बलि और उसके मांस को प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परंपरा का उन्होंने उल्लेख किया।
इंडिया ब्लॉक के डेढ़ से पौने दो सौ सांसदों के चुनाव आयोग मार्च को निरुपम ने 'राजनीतिक दलों को बचाने की कवायद' बताया।
SIR प्रक्रिया को उन्होंने मतदाता सूची शुद्धता के लिए आवश्यक कदम बताया; विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोप को खारिज किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद पर बोले — मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, टिप्पणी उचित नहीं।
PM नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन की प्रशंसा करते हुए उन्हें कठोर प्रशासनिक कार्यशैली का नेता बताया।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 6 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा के दौरान नॉन-वेज भोजन को लेकर छिड़ी बहस में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि हिंदू और सनातन परंपराओं को केवल शाकाहारी भोजन तक सीमित करके देखना उचित नहीं है। उनके अनुसार, भारत में मांसाहार की परंपरा सदियों पुरानी है और कुछ धार्मिक मान्यताओं में इसका अपना स्थान है।

बंगाल की परंपरा और देवी भक्तों की भावनाएँ

निरुपम ने कहा कि वे स्वयं अत्यधिक मांसाहार के समर्थक नहीं हैं, परंतु इसका विरोध भी उचित नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने नवरात्रि और नवमी के अवसर पर प्रचलित बलि की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से कुछ स्थानों पर देवी को पशु बलि देने की प्रथा रही है। उस पशु के मांस को पकाकर देवी को अर्पित करने के बाद श्रद्धालु प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

निरुपम के अनुसार, जिन पशुओं को समाज में सम्मान या पूजा की दृष्टि से देखा जाता है, उनके मांस का विरोध किया जा सकता है — किंतु जहाँ धार्मिक परंपराएँ किसी पशु को देवी को अर्पित करने से जुड़ी हों, वहाँ विरोध करने से बंगाल के देवी भक्तों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। उन्होंने दोटूक कहा, 'हिंदुस्तान कभी भी 100 फीसदी शाकाहारी देश नहीं रहा है।'

इंडिया ब्लॉक के मार्च पर विपक्ष को घेरा

निरुपम ने इंडिया ब्लॉक के सांसदों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ संसद से निर्वाचन सदन तक निकाले गए मार्च की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि करीब डेढ़ से पौने दो सौ सांसदों ने इस मार्च को 'लोकतंत्र बचाने' का नाम दिया, किंतु यह वास्तव में राजनीतिक दलों और नेताओं को बचाने की कवायद है।

उन्होंने याद दिलाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग संविधान के प्रावधानों के तहत कार्य करते हैं तथा किसी भी सरकार के अधीन नहीं हैं। इसलिए चुनाव आयोग को सरकारी दबाव में काम करने वाली संस्था के रूप में चित्रित करना संवैधानिक तथ्यों के विपरीत है।

एसआईआर प्रक्रिया का बचाव

निरुपम ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने का आवश्यक कदम बताया। उनके अनुसार, वर्षों में बनी मतदाता सूचियों में दिवंगत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों जैसी विसंगतियाँ स्वाभाविक रूप से आ जाती हैं।

महाराष्ट्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं जो एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे। SIR अभी बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में जारी है। उन्होंने विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि किसी दिवंगत व्यक्ति का नाम सूची से हटाना या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम को एकीकृत करना वोट चोरी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ज़रूरत है।

मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का हवाला

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर निरुपम ने कहा कि यह मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार, जब कोई प्रकरण न्यायालय के समक्ष हो तो उस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं है और अंतिम निर्णय तक प्रतीक्षा करना समझदारी है।

PM मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन की सराहना

निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक पद पर 25 वर्ष पूरे होने पर उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक सक्रिय सार्वजनिक जीवन में बने रहना और गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक की यात्रा कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। उनके अनुसार, मोदी ने विकास और सुशासन को प्राथमिकता देते हुए एक कठोर प्रशासनिक कार्यशैली अपनाई और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सतत ध्यान दिया।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुर्गा पूजा उत्सव के बीच मांसाहार पर राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता का प्रश्न संसद से सड़क तक गूँज रहा है। आने वाले दिनों में SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला इस बहस की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 'परंपरा की विविधता' की आड़ में बंगाल के हिंदू वोटबैंक को साधने की कोशिश साफ दिखती है। गौरतलब है कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) का पारंपरिक आधार महाराष्ट्र में है, इसलिए बंगाल की परंपराओं का इतने आग्रह से बचाव राष्ट्रीय राजनीतिक पुनर्स्थापन की ओर संकेत करता है। SIR पर विपक्ष के तर्कों को 'वोट चोरी नैरेटिव' कहकर खारिज करना सत्तापक्ष की मानक स्क्रिप्ट है — असली सवाल यह है कि हटाए गए नामों का सत्यापन किस स्वतंत्र तंत्र से होगा, जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने दुर्गा पूजा में नॉन-वेज विवाद पर क्या कहा?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि हिंदू और सनातन परंपराओं को केवल शाकाहारी भोजन तक सीमित नहीं किया जा सकता और हिंदुस्तान कभी भी 100 फीसदी शाकाहारी देश नहीं रहा। उन्होंने नवरात्रि-नवमी पर देवी को पशु बलि और उसके मांस को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा का हवाला दिया तथा बंगाल के देवी भक्तों की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
इंडिया ब्लॉक के चुनाव आयोग मार्च पर निरुपम का क्या रुख है?
निरुपम ने इंडिया ब्लॉक के डेढ़ से पौने दो सौ सांसदों के संसद से निर्वाचन सदन तक के मार्च को 'लोकतंत्र बचाने' का नाम देने पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि यह वास्तव में राजनीतिक दलों और नेताओं को बचाने की कोशिश है, क्योंकि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है जो किसी सरकार के अधीन नहीं है।
SIR प्रक्रिया क्या है और विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों में दिवंगत, स्थानांतरित या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों की विसंगतियाँ दूर की जाती हैं। विपक्ष इसे 'वोट चोरी' का माध्यम बता रहा है, जबकि निरुपम ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता के लिए आवश्यक कदम करार दिया। SIR फिलहाल बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में जारी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद पर निरुपम ने क्या कहा?
निरुपम ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार, न्यायालय के अंतिम फैसले से पहले इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
संजय निरुपम ने PM मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर क्या कहा?
निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष तक निरंतर सक्रिय सार्वजनिक जीवन को असाधारण उपलब्धि बताया। उन्होंने मोदी को कठोर प्रशासनिक कार्यशैली वाला नेता बताते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक की उनकी यात्रा और विकास-सुशासन पर जोर आने वाले समय में याद किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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