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संजय निषाद के 'बैसाखी' बयान पर सपा का तीखा जवाब: 'हम साझेदार हैं, सहारा नहीं'

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संजय निषाद के 'बैसाखी' बयान पर सपा का तीखा जवाब: 'हम साझेदार हैं, सहारा नहीं'

सारांश

संजय निषाद के 'बैसाखी' वाले बयान ने UP की राजनीति गर्मा दी। सपा ने साफ़ कर दिया — वे अधीन नहीं, बराबर के साझेदार हैं। 2027 चुनाव की बिसात बिछने लगी है और पीडीए बनाम NDA का समीकरण तय करेगा उत्तर प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

मुख्य बातें

निषाद पार्टी अध्यक्ष व मंत्री संजय निषाद ने कहा था कि उन्हें सपा की 'बैसाखी' की ज़रूरत नहीं, वे NDA के अटूट हिस्से हैं।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने पलटवार करते हुए कहा — 'हम किसी की बैसाखी नहीं बनते, गठबंधन में बराबरी होती है।' सपा ने दावा किया कि पार्टी ने मेनका गांधी जैसी नेता के सामने भी निषाद समाज के प्रतिनिधि को संसद तक पहुँचाया।
मुख्यमंत्री योगी के 9.5 लाख नौकरियों के दावे को सपा ने 30 करोड़ की आबादी के मद्देनज़र 'ऊंट के मुंह में जीरा' बताया।
लखनऊ में शाहनवाज-घटना पर सपा ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए; BJP नेता अपर्णा यादव के 'लव जिहाद' बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।
सपा ने 2027 विधानसभा चुनाव में पीडीए गठबंधन की जीत का दावा दोहराया।

समाजवादी पार्टी (सपा) ने 17 सितंबर 2026 को लखनऊ में निषाद पार्टी के अध्यक्ष एवं योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि निषाद पार्टी को सपा की 'बैसाखी' की ज़रूरत नहीं है और वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का अटूट हिस्सा है। सपा के इस जवाब ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बयानबाज़ी को और तीखा कर दिया है।

सपा का सीधा जवाब

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'पहले तो हम किसी की बैसाखी बनते नहीं हैं। चुनाव में गठबंधन होता है और बराबरी की बात होती है। यह शब्द भारतीय जनता पार्टी (BJP) के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है कि किसी को किसी की बैसाखी बनना है।' वर्मा ने यह भी कहा कि सपा का रुख सदैव साझेदारी का रहा है, अधीनता का नहीं।

उन्होंने निषाद समाज के प्रति सपा की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पार्टी ने मेनका गांधी जैसी वरिष्ठ नेता के सामने भी निषाद समाज के प्रतिनिधि को संसद तक पहुँचाया है। 'हमें निषाद समाज के लिए बैसाखी नहीं बनना है, हमें उनके साथ चाहिए' — वर्मा ने यही रेखा खींची।

पीडीए रणनीति और 2027 का लक्ष्य

सपा प्रवक्ता ने पार्टी की 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को दोहराते हुए कहा कि पीडीए यात्रा, पीडीए रैली और पीडीए समागम के ज़रिये पार्टी निरंतर ज़मीन पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया, 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक ने हम पर विश्वास जताया है और हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा सत्ता में भागीदारी दें।'

वर्मा ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में कहा कि पीडीए गठबंधन पूरी तरह सपा के साथ रहेगा और 'पीडीए ही सरकार बनाएगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब NDA घटकों के बीच सीट-बँटवारे को लेकर भी अटकलें तेज़ हैं।

नौकरियों के दावे पर सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 9.5 लाख सरकारी नौकरियाँ देने के दावे को सपा प्रवक्ता ने 'ऊंट के मुंह में जीरा' करार दिया। वर्मा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'आपकी किताबों में मौसम गुलाबी है, लेकिन यह हकीकत नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि तीस करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 9 लाख नौकरियों का आँकड़ा पर्याप्त नहीं है और सरकार को 'आँकड़ों की बाज़ीगरी' छोड़कर जमीनी हकीकत देखनी चाहिए।

लखनऊ कानून-व्यवस्था पर सवाल

राजधानी लखनऊ में शाहनवाज द्वारा अपनी पूर्व प्रेमिका को कार के बोनट पर घसीटने की घटना का ज़िक्र करते हुए वर्मा ने योगी सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'प्रदेश की राजधानी में रोज़ टेलीविजन पर कानून-व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ती हैं, जबकि सरकार दावे कर रही है कि स्थिति चाक-चौबंद है।'

महिला आयोग की उपाध्यक्ष एवं BJP नेता अपर्णा यादव द्वारा इस घटना को 'लव जिहाद' बताए जाने पर वर्मा ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा, 'एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को पहले मामले की जाँच करनी चाहिए — यह बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और हल्का बयान है।'

आगे क्या

यह राजनीतिक बयानबाज़ी 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियों का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें NDA के भीतर गठबंधन की एकता और विपक्षी पीडीए के समीकरण — दोनों परीक्षा की कसौटी पर हैं। आने वाले महीनों में निषाद समाज की राजनीतिक दिशा तय करने वाले गठबंधन-संकेत और स्पष्ट होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 की ज़मीन पर निषाद वोट-बैंक को लेकर चल रही असली खींचतान है। दिलचस्प यह है कि NDA के भीतर भी निषाद पार्टी को अपनी स्वायत्तता साबित करनी पड़ रही है — जो गठबंधन की आंतरिक असुरक्षा को उजागर करता है। दूसरी तरफ, सपा की पीडीए रणनीति तब तक कागज़ी लगती है जब तक वह यह नहीं बताती कि 2022 में जो पिछड़े वर्ग BJP की तरफ गए, उन्हें वापस कैसे लाया जाएगा। नौकरियों के दावे पर सपा की आलोचना तर्कसंगत है, लेकिन उसका अपना विकल्प-प्रस्ताव अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद ने 'बैसाखी' वाला बयान क्यों दिया?
निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा था कि उनकी पार्टी को समाजवादी पार्टी की 'बैसाखी' की ज़रूरत नहीं है और वे NDA के अटूट हिस्से हैं। यह बयान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी की स्वतंत्र पहचान स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सपा ने संजय निषाद के बयान पर क्या कहा?
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि पार्टी किसी की 'बैसाखी' नहीं बनती — गठबंधन में बराबरी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि सपा ने मेनका गांधी जैसी वरिष्ठ नेता के सामने भी निषाद समाज को संसद तक पहुँचाया है।
सपा की पीडीए रणनीति क्या है और 2027 में इसका क्या महत्व है?
पीडीए का अर्थ है — पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक। सपा इस गठबंधन को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अपनी जीत का आधार मानती है। पार्टी पीडीए यात्रा, रैली और समागम के ज़रिये इन वर्गों को एकजुट कर सत्ता में भागीदारी देने का वादा कर रही है।
योगी सरकार के 9.5 लाख नौकरियों के दावे पर सपा की क्या प्रतिक्रिया है?
सपा प्रवक्ता वर्मा ने इसे 30 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 'ऊंट के मुंह में जीरा' करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार आँकड़ों की बाज़ीगरी छोड़कर ज़मीनी हकीकत देखे।
लखनऊ में शाहनवाज-घटना और 'लव जिहाद' बयान पर सपा का क्या रुख है?
सपा ने लखनऊ में शाहनवाज द्वारा पूर्व प्रेमिका को कार के बोनट पर घसीटने की घटना को कानून-व्यवस्था की विफलता बताया। BJP नेता अपर्णा यादव के इसे 'लव जिहाद' बताने वाले बयान को सपा ने गैर-ज़िम्मेदाराना और समाज में विघटन फैलाने वाला करार देते हुए जाँच के बाद टिप्पणी करने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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