संजय निषाद का पलटवार: एनडीए हर जाति-वर्ग के हित में काम करता है, पीडीए केवल राजनीति
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 13 सितंबर 2026 को बाराबंकी में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) किसी एक जाति या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक जाति, धर्म और समाज के हर तबके के हित में काम कर रहा है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच जारी बयानबाज़ी को जाति-आधारित राजनीति का उदाहरण बताया।
पीडीए बनाम एनडीए: निषाद का जवाब
सपा सांसद डिंपल यादव द्वारा बसपा सुप्रीमो मायावती पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निषाद ने कहा कि एनडीए ही वास्तविक अर्थों में पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक (PDA) की लड़ाई लड़ रहा है। उनके अनुसार, सरकार बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग के साथ खड़ी है।
उन्होंने विपक्ष पर सीधा आरोप लगाया कि सपा और अन्य विपक्षी दल अलग-अलग जातियों के बीच वैमनस्य और दुश्मनी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। निषाद ने कहा, 'जाति के आधार पर समाज को बाँटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए।'
भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब
सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से उठाए गए भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संजय निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्य कर रही है और जनता के हितों के साथ दृढ़ता से खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली पारदर्शी रही है।
गोंडा हत्याकांड और कानून-व्यवस्था
गोंडा हत्याकांड पर पूछे गए सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि आरोपी होने और दोषी होने में स्पष्ट कानूनी अंतर है। उन्होंने मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए बताया कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जो दल इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, वे ही असली ज़िम्मेदार हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन और भारत की वैश्विक भूमिका
ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन पर बोलते हुए संजय निषाद ने कहा कि भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि वे न केवल देश के बारे में, बल्कि पूरे विश्व की भलाई के बारे में सोचते हैं।
नेतृत्व पर निषाद का संकल्प
संजय निषाद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता जनहित है — पार्टी और सत्ता नहीं। उन्होंने कहा, 'शोषित-वंचित वर्ग का हित, सम्मान और उनके कानूनी अधिकार हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी हैं।' उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे पाँच वर्षों तक पीड़ितों की सुध नहीं लेते, लेकिन चुनावी मौसम में सक्रिय हो जाते हैं और फिर मैदान से गायब हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले जातीय समीकरणों पर यह बहस और तीखी होने के आसार हैं।