संजय निषाद का विपक्ष पर हमला: 'हाथी, साइकिल और पंजा वाले माहौल बिगाड़ने की फिराक में रहते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 18 जून को लखनऊ में कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी — जिसमें जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा, विपक्षी सांसदों के एनडीए में संभावित शामिल होने के दावे और राम मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था जैसे विषय शामिल थे। निषाद ने विपक्षी दलों — बसपा, सपा और कांग्रेस — पर सीधा निशाना साधते हुए उन पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाया।
विपक्ष पर सीधा प्रहार
संजय निषाद ने कहा, 'हाथी, साइकिल और पंजा वाले जहाँ रहते हैं, वहाँ मौका मिलते ही माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं।' उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उनके संज्ञान में कोई भी मामला आने पर विस्तृत जाँच कराई जाती है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। यह टिप्पणी राम मंदिर परिसर से जुड़े हालिया विवाद के संदर्भ में की गई।
जी7 और पीएम मोदी की वैश्विक भूमिका
जी7 सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा किए जाने पर निषाद ने कहा कि वे ट्रंप के प्रति आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने भारत की महाशक्ति को समझा। उन्होंने कहा कि मोदी ने वैश्विक परिदृश्य में भारत को सशक्त बनाया और डूबती अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की राह पर लाए।
सपा सांसदों के एनडीए में आने की अटकलें
समाजवादी पार्टी के कुछ सांसदों के एनडीए में शामिल होने की अटकलों पर निषाद ने कहा कि जो सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा से सहमत हैं, उनका स्वागत है। उन्होंने तर्क दिया कि विकास का विरोध कोई नहीं कर सकता और जो विकास के साथ आएंगे, उनकी राजनीति भी बनी रहेगी।
महिला आरक्षण विधेयक और ब्राह्मण समुदाय
मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक लाने की तैयारियों पर निषाद ने कहा कि जिन दलों ने इस बिल के विरोध में मतदान किया था, वे बंगाल चुनाव में हार गए और आगे भी हारेंगे। उन्होंने दावा किया कि एक भी महिला ने उन्हें वोट नहीं दिया। समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण समुदाय को साधने के प्रयासों पर उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों की विचारधारा BJP की है — 'वे फोटो कहीं भी खिंचवा लेंगे, लेकिन बटन वहीं दबाएंगे।'
धर्म और राजनीति का अंतर
निषाद ने धर्म और राजनीति को अलग-अलग बताते हुए कहा कि राजनीतिक व्यवस्था में चुनाव और चयन होता है, जबकि धार्मिक व्यवस्था में विचारधारा से लोग आते हैं। उन्होंने जोर दिया कि देश के सभी मंदिरों के आगे किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।