हिमंता बिस्वा सरमा का विपक्ष पर वार: 'वोट से बदलती है सरकार, मसल पावर से नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 18 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद दिल्ली में हुए विपक्षी विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार वोट से बदलती है, धमकी और दादागिरी से नहीं, और जो लोग मसल पावर से सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं, उन्हें बांग्लादेश या नेपाल जाना होगा।
अयोध्या दर्शन के बाद विपक्ष पर हमला
मुख्यमंत्री सरमा अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए पहुँचे थे। दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने दिल्ली में आयोजित विपक्षी प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ऐसा कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं था; लगभग 5,000 से 10,000 लोग इकट्ठा हुए थे और विपक्ष के पास स्वाभाविक रूप से इतना समर्थन तो है ही।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक बार जब भाजपा समर्थक हर जिले में बाहर आएँगे, तब असली ताकत का अंदाज़ा हो जाएगा।
अखिलेश यादव पर तीखी टिप्पणी
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सरमा ने कहा, 'अखिलेश यादव क्या कह रहे हैं? हम लोग जहाँ होते हैं, वहाँ अखिलेश यादव की कोई चर्चा नहीं होती है।' उन्होंने आगे कहा, 'मैं तो उनके बारे में सिर्फ इतना ही जानता हूँ कि उन्होंने अपने पिता को पीछे से छुरी मारी थी।' यह टिप्पणी अखिलेश और उनके पिता व सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बीच दशकों पुरानी राजनीतिक तकरार की ओर संकेत मानी जा रही है।
चोरबागान भगदड़ पर बयान
चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ पर भी सरमा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'यह बहुत ही दुखद घटना है, लेकिन सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए काम किया, सभी के इलाज की व्यवस्था की और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि भविष्य में ऐसी घटना न हो।' उन्होंने माना कि ऐसी घटनाएँ पूरी तरह किसी के हाथ में नहीं होतीं, लेकिन त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई से लोगों को राहत मिली।
राम और धर्म पर सरमा का संदेश
रामलला दर्शन के अनुभव को साझा करते हुए सरमा ने कहा कि भगवान राम लला के दर्शन के बाद मन श्रद्धा से पूरी तरह परिपूर्ण हो जाता है। विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'जब-जब बाबर दुनिया में होगा, तब-तब राम-लक्ष्मण और हनुमान तो रहेंगे ही।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मंदिर बदनाम नहीं होता और दुनिया में कोई ऐसी ताकत नहीं जो राम को पराजित कर सके।
राजनीतिक संदर्भ और आगे का रुख
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। गौरतलब है कि सरमा भाजपा के उन मुखर नेताओं में हैं जो राष्ट्रीय राजनीतिक बहसों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनकी यह अयोध्या यात्रा और विपक्ष पर किए गए हमले को आने वाले विधानसभा चुनावों की राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।