सौगत रॉय का केंद्र पर हमला: 'युवाओं में आक्रोश, सत्ता परिवर्तन चुनाव से ही हो'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा शासन के विरुद्ध जनता में गहरा असंतोष पनप रहा है, विशेष रूप से युवा पीढ़ी (जेन जी) में। उनकी यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान की पृष्ठभूमि में आई है। रॉय ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का एकमात्र स्वीकार्य रास्ता चुनाव ही है।
सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक मार्ग
सांसद सौगत रॉय ने कहा कि जनता के पास सरकार बदलने का संवैधानिक अधिकार है और इसे केवल चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से ही प्रयोग में लाया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं में व्याप्त नाराज़गी को एक संकेत बताया कि आने वाले चुनावों में बड़े बदलाव की संभावना है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब RSS प्रमुख के एक कथित बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पर सवाल
रॉय ने पश्चिम बंगाल में चुनावी पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंताएँ जताईं। उन्होंने कहा कि राज्य के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को दो ज़रूरी फीचर्स तक पहुँच नहीं दी गई है, जिससे मतदाता सूची के संशोधन का काम अधूरा रह सकता है। उन्होंने इसे 'अजीब और चिंताजनक' स्थिति बताया।
रॉय के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 37.18 लाख मामले अभी भी लंबित हैं, जबकि केवल 1.02 लाख अपीलों का निपटारा हो सका है। उन्होंने माँग की कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित की जाए, और किसी भी पात्र मतदाता को प्रशासनिक या दस्तावेज़ी त्रुटि के कारण मताधिकार से वंचित न किया जाए।
कोलकाता भगदड़ पर जवाबदेही की माँग
कोलकाता के चोरबागन पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर सौगत रॉय ने राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस की कार्यप्रणाली को 'पूरी तरह विफल' करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के उद्घाटन में व्यस्त रहे, जिससे प्रशासनिक पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका।
रॉय ने ज़ोर देकर कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीज़न में बड़े जमावड़ों की सुरक्षा को लेकर पूरे देश में बहस चल रही है।
विशेषज्ञ और राजनीतिक संदर्भ
सौगत रॉय का यह बहु-आयामी बयान — केंद्र सरकार की आलोचना, चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और राज्य प्रशासन की जवाबदेही — तीनों मोर्चों पर TMC की स्थिति को स्पष्ट करता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए विपक्षी दलों की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। आने वाले हफ्तों में मतदाता सूची विवाद और भगदड़ मामले में राजनीतिक दबाव और तेज़ होने की संभावना है।