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सौगत रॉय का केंद्र पर हमला: 'युवाओं में आक्रोश, सत्ता परिवर्तन चुनाव से ही हो'

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सौगत रॉय का केंद्र पर हमला: 'युवाओं में आक्रोश, सत्ता परिवर्तन चुनाव से ही हो'

सारांश

TMC सांसद सौगत रॉय ने एक साथ तीन मोर्चे खोले — केंद्र सरकार के खिलाफ युवा आक्रोश, पश्चिम बंगाल में 37.18 लाख लंबित मतदाता सूची मामले, और कोलकाता भगदड़ में पुलिस-प्रशासन की विफलता। RSS प्रमुख के बयान की पृष्ठभूमि में आया यह हमला चुनावी मौसम की आहट दे रहा है।

मुख्य बातें

TMC सांसद सौगत रॉय ने 20 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर निशाना साधा, कहा — युवाओं में गहरा असंतोष है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया में रॉय ने कहा — बदलाव चुनाव से ही होना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में 37.18 लाख मतदाता सूची मामले लंबित, केवल 1.02 लाख अपीलों का निपटारा।
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को दो ज़रूरी फीचर्स तक पहुँच न मिलने पर रॉय ने सवाल उठाए।
कोलकाता चोरबागन पंडाल भगदड़ को रॉय ने राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस की 'पूरी विफलता' बताया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा शासन के विरुद्ध जनता में गहरा असंतोष पनप रहा है, विशेष रूप से युवा पीढ़ी (जेन जी) में। उनकी यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान की पृष्ठभूमि में आई है। रॉय ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का एकमात्र स्वीकार्य रास्ता चुनाव ही है।

सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक मार्ग

सांसद सौगत रॉय ने कहा कि जनता के पास सरकार बदलने का संवैधानिक अधिकार है और इसे केवल चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से ही प्रयोग में लाया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं में व्याप्त नाराज़गी को एक संकेत बताया कि आने वाले चुनावों में बड़े बदलाव की संभावना है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब RSS प्रमुख के एक कथित बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पर सवाल

रॉय ने पश्चिम बंगाल में चुनावी पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंताएँ जताईं। उन्होंने कहा कि राज्य के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को दो ज़रूरी फीचर्स तक पहुँच नहीं दी गई है, जिससे मतदाता सूची के संशोधन का काम अधूरा रह सकता है। उन्होंने इसे 'अजीब और चिंताजनक' स्थिति बताया।

रॉय के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 37.18 लाख मामले अभी भी लंबित हैं, जबकि केवल 1.02 लाख अपीलों का निपटारा हो सका है। उन्होंने माँग की कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित की जाए, और किसी भी पात्र मतदाता को प्रशासनिक या दस्तावेज़ी त्रुटि के कारण मताधिकार से वंचित न किया जाए।

कोलकाता भगदड़ पर जवाबदेही की माँग

कोलकाता के चोरबागन पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर सौगत रॉय ने राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस की कार्यप्रणाली को 'पूरी तरह विफल' करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के उद्घाटन में व्यस्त रहे, जिससे प्रशासनिक पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका।

रॉय ने ज़ोर देकर कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीज़न में बड़े जमावड़ों की सुरक्षा को लेकर पूरे देश में बहस चल रही है।

विशेषज्ञ और राजनीतिक संदर्भ

सौगत रॉय का यह बहु-आयामी बयान — केंद्र सरकार की आलोचना, चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और राज्य प्रशासन की जवाबदेही — तीनों मोर्चों पर TMC की स्थिति को स्पष्ट करता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए विपक्षी दलों की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। आने वाले हफ्तों में मतदाता सूची विवाद और भगदड़ मामले में राजनीतिक दबाव और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह TMC की उस रणनीति का हिस्सा है जो केंद्र-विरोधी भावना को चुनावी एजेंडे में बदलना चाहती है। विडंबना यह है कि वही रॉय राज्य में मतदाता सूची की गड़बड़ियों और भगदड़ में ममता सरकार की विफलता भी उजागर कर रहे हैं — यानी वे अपनी ही पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। 37.18 लाख लंबित मामलों का आँकड़ा चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है। बिना ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, यह बयान राजनीतिक स्कोरकार्ड तो बना सकता है लेकिन ज़मीनी बदलाव की गारंटी नहीं देता।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौगत रॉय ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर क्या कहा?
TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार के खिलाफ, विशेष रूप से युवाओं में, गहरी नाराज़गी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव के माध्यम से ही होना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर क्या विवाद है?
रॉय के अनुसार, राज्य में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को दो ज़रूरी फीचर्स तक पहुँच नहीं दी गई है, जिससे मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। राज्य में 37.18 लाख मामले लंबित हैं और केवल 1.02 लाख अपीलों का निपटारा हुआ है।
कोलकाता चोरबागन पंडाल भगदड़ पर सौगत रॉय ने क्या कहा?
रॉय ने इस घटना को राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस की 'पूरी विफलता' बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दुर्गा पूजा पंडालों के उद्घाटन में व्यस्त रहे, जिससे प्रशासनिक और सुरक्षा पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया पर रॉय का क्या रुख है?
रॉय ने माना कि मृत, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाना ज़रूरी है, लेकिन उन्होंने ज़ोर दिया कि यह प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी पात्र मतदाता को प्रशासनिक त्रुटि के कारण मताधिकार से वंचित न किया जाए।
सौगत रॉय कौन हैं और वे किस पार्टी से हैं?
सौगत रॉय अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद हैं। वे पश्चिम बंगाल से कई बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में से एक माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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