आरजी कर केस के बाद TMC की हार तय थी: इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर रॉय का बड़ा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने 9 जून 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आरजी कर रेप और मर्डर केस उनके लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जिसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने का मन बना लिया। उनका कहना था कि इस घटना के बाद जनता में जो आक्रोश उमड़ा, उससे स्पष्ट हो गया था कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में पराजय की ओर बढ़ रही है।
इस्तीफे की वजह: अंतरात्मा की आवाज़
रॉय ने स्पष्ट किया कि यह फैसला पूरी तरह उनका अपना था। उन्होंने कहा, 'एक स्वतंत्रता सेनानी के बेटे के तौर पर मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनी। मुझ पर न तो कोई दबाव डाला गया और न ही मुझे बहकाया गया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे काफी समय से पार्टी छोड़ने के बारे में सोच रहे थे और बस एक उचित अवसर की प्रतीक्षा में थे।
रॉय ने तृणमूल नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में सेवा का अवसर दिया, इसके लिए वे कृतज्ञ हैं। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर कई अच्छे नेता होने के बावजूद लगातार यौन उत्पीड़न के मामले उनकी अंतरात्मा को झकझोरते रहे।
यौन उत्पीड़न के मामलों पर गंभीर आरोप
रॉय ने पार्क स्ट्रीट रेप केस, कामदुनी गैंग रेप और मर्डर केस तथा आरजी कर रेप और मर्डर केस का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इन मामलों में शामिल कई लोगों को तृणमूल कांग्रेस का संरक्षण प्राप्त था और उनमें से कुछ सीधे पार्टी से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि जब ऐसी घटनाएँ हुईं तो उनके मित्रों और परिवार ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि वे अभी भी इस पार्टी का हिस्सा क्यों हैं।
जनता का संदेश और पार्टी की अनदेखी
रॉय ने कहा कि आरजी कर कांड के बाद जिन लोगों ने महज पाँच महीने पहले लोकसभा चुनाव में तृणमूल को वोट दिया था, वे ही सड़कों पर उतर आए। उनके अनुसार, 'हमें यह सोचना चाहिए था कि अगर जनता सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार को 34 साल बाद सत्ता से हटाकर तृणमूल को ला सकती है, तो वह हमें भी हटा सकती है।'
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के भीतर कई ऐसे लोग भी हैं जो खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं और वे भी पार्टी छोड़ना चाहते हैं। जनता ने बार-बार संकेत दिए, लेकिन पार्टी ने वे सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जिनकी उससे अपेक्षा थी।
पश्चिम बंगाल की दुर्दशा पर तीखी टिप्पणी
रॉय ने कहा कि वामपंथी सरकार के 34 वर्षों और उसके बाद तृणमूल के 15 वर्षों के शासन ने पश्चिम बंगाल को 'रेगिस्तान' बना दिया है। उनके अनुसार राज्य में कोई उल्लेखनीय निवेश नहीं हुआ, बेरोज़गारी दूर करने के कोई ठोस उपाय नहीं किए गए और शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नकली दवाएँ, सलाइन और इंजेक्शन की खरीद हो रही है और उन्होंने इस मामले में फोरेंसिक ऑडिट की माँग की है।
आगे की राह: अनिश्चितता और नई उम्मीद
रॉय ने स्वीकार किया कि उन्हें निश्चित रूप से नहीं पता कि वे राजनीति में बने रहेंगे या नहीं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उसने घोषणापत्र में किए गए वादों पर अमल शुरू कर दिया है। उनका यह भी मानना है कि कुछ महीनों या वर्षों में तृणमूल कांग्रेस अपने मौजूदा स्वरूप में नहीं टिक पाएगी और इतिहास का हिस्सा बन जाएगी।