टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का बड़ा बयान: जनता की चेतावनी अनसुनी की, इसीलिए सत्ता गई
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने 28 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए भ्रष्टाचार, जनता की उपेक्षा और वोटर लिस्ट विवाद को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्वीकार किया कि आम लोगों ने पार्टी को समय रहते चेतावनी दी थी, लेकिन नेतृत्व ने उस संकेत को नजरअंदाज किया — और परिणाम स्वाभाविक रूप से सत्ता से बेदखली के रूप में सामने आया।
वोटर लिस्ट विवाद और नागरिकता का सवाल
सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने माना कि पश्चिम बंगाल में आधार वेरिफिकेशन और वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ रहीं। उनके अनुसार, 'यह सच है कि वोटर लिस्ट से कुछ असली लोगों के नाम हटा दिए गए थे। उनके पक्ष में कोई नतीजा नहीं आया और उन्हें राहत नहीं मिली।'
हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद नागरिकता खोने का कोई खतरा नहीं है। कुछ औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता बनी रहेगी।
घुसपैठ पर पार्टी का पक्ष
घुसपैठ के मुद्दे पर रॉय ने स्पष्ट किया कि यह समस्या मुख्यतः बांग्लादेश से हुई घुसपैठ से जुड़ी है, और कुछ रोहिंग्या म्यांमार से आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया, 'इसमें धर्म की बात कहाँ से आ गई? घुसपैठ बांग्लादेश से हुई है, पाकिस्तान से नहीं।' उन्होंने सीमावर्ती इलाकों का उदाहरण देते हुए बताया कि बांग्लादेश लौटने के लिए हजारों लोग जमा हो गए थे, जिससे स्थिति की गंभीरता साफ जाहिर होती है।
हार के कारण: भ्रष्टाचार और जनता की नाराजगी
विधानसभा चुनाव में TMC की हार पर रॉय ने पार्टी की आंतरिक खामियों को बेबाकी से स्वीकार किया। उनके शब्दों में, 'राजनीति में भ्रष्टाचार होता है, लेकिन जब हमने इसे संस्थागत रूप दे दिया — पंचायत स्तर से लेकर उच्चतम स्तर तक — तो हर जगह भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार हो गया। हमारे पास कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं बचा था।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी ने विपक्ष को पनपने का मौका ही नहीं दिया, और राजनीतिक कार्यकर्ता भले ही पार्टी का कार्यक्रम आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन भ्रष्टाचार और बिचौलियों ने माहौल खराब कर दिया।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में TMC ने 29 सीटें जीती थीं। रॉय ने सवाल उठाया, 'दो साल के अंदर ऐसा क्या हुआ कि आम लोग इतने नाराज हो गए कि उन्होंने हमें सत्ता से ही हटा दिया? अगर हमने उस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए सही कदम उठाए होते, तो शायद आज हमें यह दिन देखना न पड़ता।'
केंद्रीय बलों की तैनाती और मतदाताओं का भरोसा
सांसद ने बताया कि जब लोगों ने देखा कि 2.5 लाख केंद्रीय बल तैनात किए जा रहे हैं, तो उन्हें लगा कि उनका वोट देने का अधिकार वापस मिल जाएगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि मतदाताओं में राज्य प्रशासन के प्रति विश्वास की कमी थी और केंद्रीय बलों की उपस्थिति ने उन्हें निडर होकर मतदान करने का अवसर दिया।
नई सरकार पर रॉय की टिप्पणी
रॉय ने सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा, 'सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार ने अब तक जो काम किए हैं और जो कदम उठाए हैं, उनसे आम जनता इस समय बहुत खुश है। सीएम सुवेंदु अधिकारी बहुत मेहनती हैं — मुझे शायद ही कभी कोई ऐसा नेता मिला हो जो उनके जितना मेहनती हो।' यह टिप्पणी इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि सुवेंदु अधिकारी स्वयं एक समय TMC के प्रमुख नेता रहे थे, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। एक TMC सांसद का विपक्षी मुख्यमंत्री की इस तरह तारीफ करना पार्टी के भीतर आत्मनिरीक्षण की गहराई को दर्शाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब TMC अपनी रणनीति और संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुटी है। आने वाले समय में पार्टी किस दिशा में जाती है, यह उसके आंतरिक सुधारों पर निर्भर करेगा।