21 अक्टूबर 2026
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वाईएसआरसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा, आंध्र ULB नामांकन विवाद पहुँचा शीर्ष अदालत

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वाईएसआरसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा, आंध्र ULB नामांकन विवाद पहुँचा शीर्ष अदालत

सारांश

आंध्र ULB चुनाव नामांकन विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय पहुँच गया है। वाईएसआरसीपी ने कडप्पा, तिरुपति सहित कई जगहों पर कथित बाधा का हवाला देते हुए एसएलपी दायर की है। न्यायमूर्ति बागची और न्यायमूर्ति मोहना की पीठ आज 10:30 बजे सुनवाई करेगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी.
मोहना की पीठ 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे वाईएसआरसीपी की एसएलपी पर सुनवाई करेगी।
वाईएसआरसीपी का आरोप है कि 16 अक्टूबर को पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति में उसके उम्मीदवारों को नामांकन से रोका गया।
कडप्पा में नामांकन पत्र कथित तौर पर जब्त कर फाड़े गए; तिरुपति में उम्मीदवारों को कार्यालय में प्रवेश से रोका गया।
सांसद पीवी मिथुन रेड्डी और पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया गया है।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 18 अक्टूबर को नामांकन समय सीमा विस्तार की याचिका यह कहते हुए खारिज की कि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

युवजन श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने आंध्र प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनावों में नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने से इनकार करने वाले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिस पर बुधवार, 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे IST सुनवाई निर्धारित है। पार्टी का आरोप है कि 16 अक्टूबर को नामांकन के पहले दिन कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों को जानबूझकर रोका गया।

मामले का मूल विवाद

वाईएसआरसीपी ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति सहित कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया। पार्टी ने नामांकन की समय सीमा में एक दिन के विस्तार की माँग की थी, जिसे उच्च न्यायालय ने 18 अक्टूबर को खारिज कर दिया।

कथित हिंसा और बाधा के आरोप

याचिका के अनुसार, कडप्पा में पार्टी के एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र कथित तौर पर जब्त करके फाड़ दिए गए। तिरुपति में कई उम्मीदवारों को कथित तौर पर संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों के कमरों में शारीरिक रूप से प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसके अतिरिक्त, नामांकन दाखिल करने के लिए यात्रा कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और सांसद पीवी मिथुन रेड्डी पर भी हमले का आरोप लगाया गया है।

उच्च न्यायालय का रुख और खारिज याचिका

वाईएसआरसीपी ने पहले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में पर्याप्त सुरक्षा वाले वैकल्पिक नामांकन केंद्रों के निर्देश माँगे थे। 15 अक्टूबर को एकल न्यायाधीश ने व्यापक राहत देने से इनकार कर दिया, हालाँकि धमकियों का सामना कर रहे व्यक्तिगत उम्मीदवारों को वैकल्पिक स्थानों पर नामांकन के लिए चुनाव अधिकारियों से संपर्क की अनुमति दी गई।

इसके बाद पार्टी ने समय सीमा विस्तार के लिए अपील दायर की। 18 अक्टूबर को उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि नामांकन की अंतिम तिथि बीत चुकी है और इस स्तर पर कोई निर्देश देना चुनावी प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप होगा।

सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई

सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित मामले की सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस एसएलपी पर सुनवाई करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में ULB चुनावों की प्रक्रिया जारी है और विपक्ष सत्तारूढ़ दल पर व्यवस्थित बाधा डालने का आरोप लगा रहा है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय अमूमन त्वरित सुनवाई करता है, लेकिन नामांकन की समय सीमा बीत जाने के बाद राहत की संभावना सीमित हो जाती है। अदालत का फैसला न केवल इस चुनाव बल्कि भविष्य में नामांकन प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रक्रियागत रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह उस मूल आरोप को संबोधित नहीं करता कि बाधा जानबूझकर डाली गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के लिए असली परीक्षा यह है कि वह यह संकेत दे कि चुनावी हिंसा और बाधा के आरोप निराधार साबित होने पर भी जवाबदेही तय होती है। अगर अदालत केवल प्रक्रियागत आधार पर इसे खारिज करती है, तो यह भविष्य में ऐसी शिकायतों के लिए एक कमज़ोर मिसाल बनेगा।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाईएसआरसीपी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर की है?
वाईएसआरसीपी ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है, जिसमें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसने ULB चुनावों की नामांकन समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया था। पार्टी का आरोप है कि नामांकन प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डाली गई।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने याचिका क्यों खारिज की?
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 18 अक्टूबर को कहा कि नामांकन दाखिल करने की समय सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है और इस स्तर पर कोई भी निर्देश चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान होगा। इससे पहले 15 अक्टूबर को एकल न्यायाधीश ने भी व्यापक राहत देने से मना कर दिया था।
वाईएसआरसीपी ने किन क्षेत्रों में बाधा का आरोप लगाया है?
पार्टी ने पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति में बाधा का आरोप लगाया है। कडप्पा में नामांकन पत्र कथित तौर पर जब्त कर फाड़े गए, जबकि तिरुपति में उम्मीदवारों को रिटर्निंग अधिकारी के कमरे में जाने से शारीरिक रूप से रोका गया।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कौन करेगा और कब?
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ बुधवार 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे IST इस मामले की सुनवाई करेगी। यह जानकारी सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित मामले की सूची से ली गई है।
इस मामले में सांसद पीवी मिथुन रेड्डी की क्या भूमिका है?
याचिका के अनुसार, सांसद पीवी मिथुन रेड्डी उन लोगों में शामिल हैं जिन पर नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए यात्रा के दौरान कथित तौर पर हमला किया गया। यह मामला पार्टी की उस दलील को मज़बूत करता है कि बाधा किसी स्थानीय घटना तक सीमित नहीं थी।
राष्ट्र प्रेस
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