सुप्रीम कोर्ट ने YSRCP को राहत दी, आंध्र निकाय चुनाव उम्मीदवार सूची 25 अक्टूबर तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अक्टूबर 2026 को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की याचिका पर सुनवाई करते हुए आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक प्रकाशित न की जाए। पार्टी ने आरोप लगाया था कि चुनावी हिंसा के कारण उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से जबरन रोका गया।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की वेकेशन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह नामांकन की तिथि बदलने का कोई एकतरफा आदेश जारी नहीं करेगी। इसके बजाय राज्य चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया गया कि वह प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग परखे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय ले।
अदालत ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को नामांकन केंद्रों और उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और इस संबंध में रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा। जस्टिस बागची ने कहा, 'सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। दूसरी पार्टी सत्ताधारी दल से मुकाबला करने की कोशिश कर रही है, इसे सम्मानजनक तरीके से होने दें।'
YSRCP के आरोप
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने अपनी याचिका में गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के अनुसार, उसके उम्मीदवारों पर हमले किए गए, उनके नामांकन पत्र फाड़ दिए गए और उन्हें नामांकन केंद्रों से जबरन खदेड़ा गया। पार्टी ने इन आरोपों के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक और अन्य प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। चुनाव आयोग को इन्हीं सबूतों के आधार पर प्रत्येक उम्मीदवार की अर्जी पर विचार करना है।
हाईकोर्ट का इनकार और सर्वोच्च न्यायालय की शरण
गौरतलब है कि इससे पहले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने YSRCP की नामांकन दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाने की माँग को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है।
आगे क्या होगा
नगर निगम चुनावों के लिए मतदान 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। राज्य चुनाव आयोग को गुरुवार तक — अर्थात 23 अक्टूबर तक — प्रत्येक उम्मीदवार की अर्जी पर निर्णय लेना होगा। यदि साक्ष्य पर्याप्त पाए जाते हैं, तो संबंधित सीटों पर नामांकन की तिथि आगे बढ़ाई जा सकती है। DGP की सुरक्षा रिपोर्ट भी इसी दौरान सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी जानी है, जो इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता की कसौटी होगी।