20 अक्टूबर 2026
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वाईएसआरसीपी ने आंध्र चुनाव आयोग से 22 शहरी निकायों में नामांकन प्रक्रिया दोहराने की माँग की

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वाईएसआरसीपी ने आंध्र चुनाव आयोग से 22 शहरी निकायों में नामांकन प्रक्रिया दोहराने की माँग की

सारांश

आंध्र प्रदेश के शहरी निकाय चुनावों में वाईएसआरसीपी ने 22 निकायों में 488 वार्ड नामांकन से वंचित रहने, उम्मीदवारों पर हमलों और एक उम्मीदवार के अपहरण का आरोप लगाते हुए राज्य चुनाव आयोग से नई नामांकन प्रक्रिया की माँग की है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने 19 अक्टूबर 2026 को राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा से मिलकर 22 शहरी स्थानीय निकायों में नई नामांकन प्रक्रिया या चुनाव स्थगन की माँग की।
पार्टी के अनुसार, 809 में से केवल 321 वार्डों में नामांकन हो पाया; 488 वार्ड और मंडल तथा 8 नगर पालिका अध्यक्ष पद बिना नामांकन रह गए।
कुप्पम में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय कुमार के अपहरण का आरोप; ठिकाना अज्ञात।
आत्मकुर , कनिगिरी , प्रोद्दातुर और कुप्पम में हिंसा और नामांकन पत्र नष्ट किए जाने के आरोप।
पार्टी ने सीसीटीवी, वेबकास्टिंग, दोषी अधिकारियों को हटाने और टीडीपी नेताओं पर मुकदमे की माँग की।
एसईसी ने अभी तक ज्ञापनों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 19 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) से माँग की कि 22 शहरी स्थानीय निकायों में नामांकन प्रक्रिया नए सिरे से कराई जाए या चुनाव स्थगित किए जाएँ। पार्टी का कहना है कि कथित तौर पर उसके उम्मीदवारों को जबरन नामांकन दाखिल करने से रोका गया, हमले हुए और कई स्थानों पर नामांकन पत्र नष्ट कर दिए गए।

आयोग के समक्ष पेश हुआ प्रतिनिधिमंडल

वाईएसआरसीपी के एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा से मुलाकात की और हमलों, धमकियों तथा नामांकन पत्र नष्ट किए जाने के वीडियो साक्ष्य एक पेन ड्राइव में सौंपे। प्रतिनिधिमंडल में एमएलसी एवं राज्य महासचिव लेल्ला अप्पी रेड्डी, पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू, नारायण मूर्ति और अन्य नेता शामिल थे। उन्होंने तीन अलग-अलग ज्ञापन भी आयोग को सुपुर्द किए।

मुख्य आरोप: 488 वार्ड नामांकन से वंचित

पार्टी द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, वाईएसआरसीपी के उम्मीदवार 22 स्थानीय निकायों के 809 वार्डों और मंडलों में से केवल 321 में ही नामांकन दाखिल कर पाए, जिससे 488 वार्ड और मंडल बिना नामांकन के रह गए। इसके अलावा, 8 नगर पालिका अध्यक्ष पदों के लिए भी नामांकन नहीं हो सके।

मीडिया को संबोधित करते हुए अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के कार्यकर्ताओं ने हार के भय से विपक्षी नामांकन पत्र फाड़ दिए, जबकि पुलिस ने उनका समर्थन किया — और कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर स्वयं नामांकन पत्र छीन लिए। ये आरोप गंभीर हैं; राज्य सरकार या पुलिस की तरफ से इन पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हिंसा और अपहरण के आरोप

अप्पी रेड्डी ने सांसदों मिथुन रेड्डी, गुरुमूर्ति और अविनाश रेड्डी पर हुए हमलों का मुद्दा भी आयोग के संज्ञान में लाया। बताया गया कि आत्मकुर और कनिगिरी में मतदान केंद्रों के अंदर नामांकन पत्र फाड़े गए और जाँच के दौरान हिंसा जारी रही। प्रोद्दातुर और कुप्पम में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमलों की खबरें हैं।

सबसे गंभीर आरोप कुप्पम से आया — कुप्पम नगर पालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय कुमार का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया और उनका ठिकाना अज्ञात बताया गया। पार्टी ने अपहृत उम्मीदवारों की तत्काल रिहाई और उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की।

प्रक्रियागत माँगें और अदालती निर्देशों का हवाला

अप्पी रेड्डी ने एसईसी से आग्रह किया कि सीसीटीवी निगरानी, पुलिस सुरक्षा और वेबकास्टिंग के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद कई केंद्रों पर इनकी व्यवस्था नहीं की गई। साथ ही माँग की गई कि रिकॉर्डिंग सामग्री सुरक्षित रखी जाए, हिंसा के लिए जिम्मेदार टीडीपी नेताओं पर मुकदमा चलाया जाए, और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों को चुनाव-संबंधी कार्यों से हटाया जाए।

पार्टी ने यह भी आग्रह किया कि तिरुपति महापौर पद के उम्मीदवार वासु यादव के बीसी प्रमाण-पत्रों की राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर नियमानुसार जाँच की जाए, और किसी भी निर्विरोध घोषणा से पहले प्रभावित उम्मीदवारों को एक और अवसर दिया जाए।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया निर्णायक दौर में है। एसईसी ने अभी तक इन ज्ञापनों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यदि आयोग नए सिरे से नामांकन की अनुमति नहीं देता, तो सैकड़ों वार्डों में निर्विरोध चुनाव परिणाम की संभावना बन सकती है, जो लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा पर गंभीर सवाल खड़े करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्नचिह्न है। 488 वार्डों का नामांकन-रहित रह जाना और एक उम्मीदवार का अपहरण — ये आँकड़े और आरोप राज्य चुनाव आयोग की निगरानी क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों की परीक्षा हैं। उच्च न्यायालय के वेबकास्टिंग निर्देशों का पालन न होना यह संकेत देता है कि संस्थागत जवाबदेही की खामियाँ व्यवस्थागत हैं, आकस्मिक नहीं। टीडीपी की ओर से आधिकारिक खंडन की अनुपस्थिति और एसईसी की चुप्पी इस मामले को और अधिक गंभीर बनाती है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाईएसआरसीपी ने राज्य चुनाव आयोग से क्या माँग की है?
वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग से 22 शहरी स्थानीय निकायों में नए सिरे से नामांकन प्रक्रिया कराने या चुनाव स्थगित करने की माँग की है। पार्टी ने हमलों और नामांकन पत्र नष्ट किए जाने के वीडियो साक्ष्य भी आयोग को सौंपे हैं।
कितने वार्डों में नामांकन नहीं हो पाया?
पार्टी के आँकड़ों के अनुसार, 22 स्थानीय निकायों के 809 वार्डों और मंडलों में से केवल 321 में नामांकन हो पाया। इस तरह 488 वार्ड और मंडल तथा 8 नगर पालिका अध्यक्ष पद बिना नामांकन के रह गए।
कुप्पम उम्मीदवार के अपहरण का क्या मामला है?
वाईएसआरसीपी के अनुसार, कुप्पम नगर पालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय कुमार का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया और उनका ठिकाना अभी तक अज्ञात है। पार्टी ने उनकी तत्काल रिहाई और परिजनों की सुरक्षा की माँग की है।
टीडीपी पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
वाईएसआरसीपी नेता लेल्ला अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि टीडीपी कार्यकर्ताओं ने हार के भय से विपक्षी नामांकन पत्र फाड़ दिए और पुलिस ने उनका साथ दिया। आत्मकुर, कनिगिरी, प्रोद्दातुर और कुप्पम में हिंसा की घटनाएँ भी बताई गई हैं। टीडीपी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राज्य चुनाव आयोग ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
अभी तक राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा की ओर से वाईएसआरसीपी के ज्ञापनों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यदि आयोग नई नामांकन प्रक्रिया की अनुमति नहीं देता, तो सैकड़ों वार्डों में निर्विरोध परिणाम की स्थिति बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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