सेखों IAF मैराथन 2026: वायुसेना प्रमुख AP सिंह समेत देशभर में परमवीर को श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता, फ्लाइट लेफ्टिनेंट निर्मलजीत सिंह सेखों की अदम्य वीरता और सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देते हुए 4 अक्टूबर 2026 को देशभर में 'सेखों इंडियन एयर फोर्स मैराथन 2026' का दूसरा संस्करण आयोजित किया गया। नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से लेकर चंडीगढ़, गुवाहाटी और जोधपुर तक, विभिन्न उम्र और पृष्ठभूमि के हज़ारों धावकों ने एक साथ कदम बढ़ाकर उस अमर योद्धा को याद किया, जिन्होंने 1971 के युद्ध में आखिरी साँस तक अपने देश की रक्षा की थी।
मैराथन का आयोजन और वायुसेना प्रमुख की भागीदारी
एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मैराथन के दूसरे संस्करण का विधिवत उद्घाटन किया और स्वयं भी इसमें भाग लिया। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को महज़ एक दौड़ से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बना दिया। मैराथन में 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की तीन श्रेणियाँ रखी गई थीं, जिनमें वायुसेना के जवानों के साथ-साथ आम नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह आयोजन केवल एक खेल प्रतिस्पर्धा नहीं था — वायुसेना ने स्पष्ट रूप से फ्लाइट लेफ्टिनेंट सेखों को अपना प्रेरणास्रोत और आदर्श घोषित किया। पूर्वोत्तर के मैदानों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तानों तक हर स्थान पर एक ही भावना गूँजती रही — देशभक्ति, अनुशासन और वीरता।
1971 युद्ध में सेखों का अदम्य पराक्रम
14 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी वायुसेना के छह लड़ाकू विमानों ने श्रीनगर एयरफील्ड पर हमला बोला। उस संकटपूर्ण क्षण में ग्नैट पायलट के रूप में तैनात निर्मलजीत सिंह सेखों ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने विमान को आकाश में उड़ाया और दुश्मन के सामने खड़े हो गए।
अकेले आधा दर्जन विमानों से लोहा लेते हुए उन्होंने एक पाकिस्तानी सेबर जेट को मार गिराया और दूसरे लड़ाकू विमान को भारी क्षति पहुँचाई। सेखों पाकिस्तानी वायुसेना के लिए एक अप्रत्याशित और दुर्जेय चुनौती बन गए। इस असमान लड़ाई में उन्होंने अपनी श्रीनगर एयरफील्ड की रक्षा करते हुए अंतिम साँस तक युद्ध किया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के इतिहास में फ्लाइट लेफ्टिनेंट निर्मलजीत सिंह सेखों एकमात्र वायुसेना अधिकारी हैं जिन्हें परमवीर चक्र — भारत का सर्वोच्च वीरता सम्मान — प्रदान किया गया।
देशभर में एक साथ मैराथन का विस्तार
चंडीगढ़ में भी मैराथन के दूसरे संस्करण का उत्साहपूर्ण आयोजन हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में वायुसेना कर्मियों और नागरिकों ने हिस्सा लिया। असम के गुवाहाटी में वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों और आम नागरिकों ने एक साथ दौड़कर इस राष्ट्रीय भावना को जीवंत किया।
राजस्थान के जोधपुर में भी भारतीय वायुसेना ने मैराथन का आयोजन किया। इस प्रकार पूर्वोत्तर से लेकर उत्तर, उत्तर-पश्चिम तक देश के कोने-कोने में एक ही दिन, एक ही भावना के साथ लोग दौड़े।
बलिदान की विरासत और आगे की राह
यह मैराथन लगातार दूसरे वर्ष आयोजित की गई, जो दर्शाता है कि वायुसेना सेखों की स्मृति को एक जीवंत परंपरा का रूप देना चाहती है। 4 अक्टूबर की भोर में जब सूरज की पहली किरणें जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पर पड़ीं, तब हज़ारों कदम एक साथ आगे बढ़े — उस वीर को याद करते हुए जिसने अपना जीवन देश की सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
आने वाले वर्षों में इस आयोजन के और अधिक शहरों तक विस्तार की संभावना जताई जा रही है, ताकि नई पीढ़ी फ्लाइट लेफ्टिनेंट निर्मलजीत सिंह सेखों के शौर्य और त्याग से प्रेरणा लेती रहे।