भाजपा मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल: 'सेवा ही संकल्प' से जोड़ रहे समाज के कमजोर वर्गों को, 17 सितंबर तक चलेगा अभियान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने सोमवार, 31 अगस्त को रांची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पार्टी के 'सेवा ही संकल्प' अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के दबे-कुचले और गरीब वर्गों तक पहुँचने का एक सुनियोजित प्रयास है।
अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीति में 25 वर्षों का नेतृत्व रहा है। 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि BJP इस अवसर पर केक काटकर या मिठाई बाँटकर उत्सव नहीं मनाती, बल्कि 'सेवा ही संकल्प' के सिद्धांत को जमीन पर उतारते हुए आम जनता से सीधा संपर्क स्थापित करती है।
उनके अनुसार, यह कार्यक्रम करीब एक महीने तक जारी रहेगा और इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता स्वच्छता अभियान, मरीजों की सेवा और समाज कल्याण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेंगे।
कमजोर वर्गों तक पहुँचने की कोशिश
जायसवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी 'सेवा ही संकल्प' के माध्यम से समाज के सबसे कमजोर और वंचित तबके के लोगों से संपर्क स्थापित करती है। उनका कहना था कि पार्टी का उद्देश्य इन लोगों को सशक्त बनाना है, ताकि यह संदेश जाए कि राजनीति से जुड़े लोग केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सेवाभाव से प्रेरित होकर भी जनता के बीच पहुँचते हैं।
उन्होंने दावा किया कि आज की तारीख में भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी है और समाज कल्याण के हर कार्य में अग्रणी भूमिका निभाती रही है।
कानून के समान लागू होने पर जोर
जायसवाल ने देश की 150 करोड़ जनसंख्या का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे आम नागरिक हो, मुख्यमंत्री हो या नेता प्रतिपक्ष — सभी के लिए कानून एक समान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ या किसी पर अत्याचार हुआ, तो देश में गरीब और अमीर दोनों के लिए एक ही कानून लागू होता है।
आगे क्या
पार्टी का यह सेवा अभियान 17 सितंबर तक और उसके बाद भी जारी रहने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता कार्यक्रम और जन-संपर्क अभियान के जरिये आम लोगों से जुड़ेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अभियान का झारखंड की राजनीतिक जमीन पर क्या असर पड़ता है।