'बाहों में चले आओ' है बॉलीवुड का सबसे मॉडर्न गाना: शान, बोले- 'पंचम दा जैसा कोई नहीं हुआ'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के जाने-माने गायक शान ने सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' के मंच पर दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार और जया बच्चन पर फिल्माए गए क्लासिक गीत 'बाहों में चले आओ' को हिंदी फिल्म संगीत का सबसे मॉडर्न गाना करार दिया। उन्होंने कहा कि इस गीत में संगीत, भावनाओं और बदलाव का जो अद्वितीय संयोजन है, वैसा आज के दौर में भी शायद ही कहीं देखने को मिले। यह टिप्पणी उस वक्त आई जब शो की कंटेस्टेंट ज्योतिर्मयी ने इसी गाने पर अपनी परफॉर्मेंस दी।
गाने की बारीकियों पर शान की नज़र
शान ने ज्योतिर्मयी की परफॉर्मेंस के बाद गाने की धुन, फिल्मांकन और संगीत की बारीकियों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि यह गाना रात के माहौल में एक कमरे के भीतर फिल्माया गया था, जहाँ संजीव कुमार का किरदार जया बच्चन से धीरे से गाने का आग्रह करता है — और ठीक उसी पल गाने का मूड और संगीत दोनों एकसाथ बदल जाते हैं।
शान ने कहा, 'लोग अक्सर पुराने और नए गानों को लेकर बहस करते रहते हैं, लेकिन मेरे हिसाब से पुराने दौर के कई गाने आज के गानों से कहीं ज़्यादा मॉडर्न थे। इन गानों में जो बदलाव आते हैं, संगीत जिस तरह बहता है, वह कहीं और देखने को नहीं मिलता। कई बार समझ ही नहीं आता कि गाना कहाँ से शुरू हुआ और कहाँ खत्म हो गया — यही उसकी खूबसूरती है।'
पंचम दा को श्रद्धांजलि
शान ने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन, जिन्हें प्यार से पंचम दा कहा जाता है, की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'पंचम दा अपने समय से बहुत आगे सोचते थे। उनके संगीत में हमेशा कुछ नया देखने को मिलता था — वह बॉलीवुड के सबसे मॉडर्न संगीतकार थे। जिस तरह उन्होंने संगीत में नए प्रयोग किए, वैसा आज भी बहुत कम संगीतकार कर पाते हैं। उनके बनाए गाने आज भी ताज़गी से भरे लगते हैं।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उस दौर के संगीतकार महज धुनें नहीं बनाते थे — हर गाने के पीछे एक पूरी कहानी और गहरी भावना होती थी, जो सुनने वाले को भीतर तक छू जाती थी।
विशाल ददलानी का समर्थन
शो के जज विशाल ददलानी ने भी शान की बात का समर्थन करते हुए कहा कि पंचम दा जैसा संगीतकार दूसरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पंचम दा का संगीत सुना नहीं, बल्कि महसूस किया जाता था — यह फर्क ही उन्हें अमर बनाता है।
नए गायकों को शान की सलाह
इस अवसर पर शान ने कंटेस्टेंट्स को एक अहम सलाह भी दी। उन्होंने कहा, 'अगर कोई गायक किसी गाने को सही तरीके से गाना चाहता है, तो उसे सिर्फ सुर और शब्दों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। यह भी समझना ज़रूरी है कि वह गाना फिल्म में किस परिस्थिति में आया है — गाने की कहानी, कलाकारों के भाव और फिल्मांकन को समझने से गायक उस गीत की भावना को कहीं बेहतर तरीके से महसूस कर सकता है।'
शान की यह टिप्पणी भारतीय फिल्म संगीत की उस विरासत की याद दिलाती है, जिसे आर.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने दशकों पहले रचा था — और जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक बनी हुई है।