शब्बीर बलूच गुमशुदगी के 10 साल: बीएसओ-आजाद की संयुक्त राष्ट्र से जबरन बरामदगी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन-आजाद (बीएसओ-आजाद) ने 5 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक भावुक अपील रखी है, जिसमें छात्र नेता शब्बीर बलूच की बरामदगी की माँग की गई है। कथित तौर पर 4 अक्टूबर 2016 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा बलूचिस्तान के केच जिले के ग्वारकोप इलाके से जबरन उठाए गए शब्बीर बलूच के लापता होने को अब पूरा एक दशक बीत चुका है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी) और जबरन या अनैच्छिक गुमशुदगी पर संयुक्त राष्ट्र वर्किंग ग्रुप (डब्ल्यूजीईआईडी) को पत्र लिखकर पाकिस्तानी अधिकारियों पर दबाव बनाने की गुहार लगाई है।
गायब होने की परिस्थितियाँ
बीएसओ-आजाद के अनुसार, शब्बीर बलूच — जो संगठन के पूर्व सूचना सचिव थे — को उनकी पत्नी जरीना बलूच की आँखों के सामने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उठा लिया था। तब से परिवार उनके ठिकाने की कोई पुख्ता जानकारी हासिल करने में विफल रहा है। संगठन ने बताया कि शब्बीर की बहन और पत्नी पिछले दस वर्षों से उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए संघर्ष कर रही हैं।
गौरतलब है कि यह गुमशुदगी किसी अकेली घटना नहीं है। बीएसओ-आजाद ने पत्र में उल्लेख किया कि संगठन के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं — जिनमें पूर्व अध्यक्ष जाहिद बलोच, उपाध्यक्ष जाकिर मजीद बलोच और संयुक्त सचिव असद बलोच शामिल हैं — को भी कथित तौर पर जबरन उठाया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
बीएसओ-आजाद ने अपने पत्र में लिखा, 'दुनिया के लोगों, पाकिस्तानी सरकार ने बलूचों पर बेरहमी जारी रखी है। इसमें बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं समेत लाखों लोगों की हत्या की गई है, चाहे वे किसी भी समूह से जुड़े हों। पाकिस्तानी सेना कई सैन्य अभियान और नरसंहार करती रही है; सुराब, मस्तुंग और दश्त की हालिया दुखद घटनाएँ इस क्रूरता को दर्शाती हैं।' संगठन ने वैश्विक बिरादरी से आग्रह किया कि वे पाकिस्तानी अधिकारियों पर दबाव डालें, ताकि शब्बीर बलूच सहित सभी राजनीतिक कैदियों और बंधकों को कथित 'यातना केंद्रों' से सुरक्षित रिहा कराया जा सके।
पत्र में यह भी दर्ज किया गया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर 'लाखों लोगों को जबरन गायब किया है, जिनमें छात्र, शिक्षक, प्रोफेसर, डॉक्टर, वकील, पत्रकार, बुद्धिजीवी, राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं।'
मानवाधिकार संगठनों की आवाज़
बलूचिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने शब्बीर बलूच की गुमशुदगी की दसवीं बरसी पर कहा, 'पिछले एक दशक में, उनके परिवार ने हर उपलब्ध कानूनी रास्ता अपनाया है, फिर भी अधिकारी उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी देने में नाकाम रहे हैं। सरकार को यह बताना चाहिए कि वे कहाँ हैं और उनके परिवार को वह सच और न्याय देना चाहिए जिसके वे हकदार हैं।'
बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों से शब्बीर के ठिकाने का खुलासा करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके मौलिक अधिकारों का सम्मान करने का आग्रह किया। 'पांक' ने कहा, 'उनके परिवार को सच, न्याय और जवाबदेही का अधिकार है।'
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार उठाया जा रहा है। मानवाधिकार संगठन लंबे समय से इस क्षेत्र में व्यापक दमन का आरोप लगाते आए हैं, हालाँकि पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को सिरे से नकारती है। बीएसओ-आजाद की यह अपील शब्बीर बलूच की गुमशुदगी की दसवीं बरसी पर आई है, जिससे यह मामला एक बार फिर वैश्विक ध्यान के केंद्र में आ गया है। संगठन की उम्मीद है कि यूएनएचआरसी और डब्ल्यूजीईआईडी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पाकिस्तान पर जवाबदेही सुनिश्चित करने का दबाव डालेंगे।