शशि थरूर का बयान: ईरान-अमेरिका मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका और भारत के लिए शांति का महत्व
सारांश
Key Takeaways
- शांति का महत्व: युद्ध समाप्त होना चाहिए।
- पाकिस्तान की भूगोलिक स्थिति महत्वपूर्ण है।
- अर्थव्यवस्था पर असर: युद्ध का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
- शरणार्थियों की सुरक्षा: युद्ध की स्थिति में शरणार्थी पाकिस्तान की ओर जाएंगे।
- खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर उठते सवालों के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इस मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के लिए स्थितियाँ अलग हैं, इसलिए किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए।
थरूर ने स्पष्ट किया, "पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी देश है, जिसकी सीमा 900 किलोमीटर लंबी है और यहाँ लगभग चार करोड़ शिया पाकिस्तानी रहते हैं। इसलिए, पाकिस्तान का इस मध्यस्थता में शामिल होना एक अलग मुद्दा है। अगर ईरान में फिर से कोई हमले होते हैं, तो शरणार्थी पाकिस्तान की ओर ही जाएंगे।"
पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता पर शशि थरूर ने कहा कि यह कार्य केवल पाकिस्तान ही कर सकता है, क्योंकि वह अमेरिका के इशारे पर ऐसा कर रहा है।
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के वाशिंगटन के साथ रिश्ते इस कदर हैं कि अमेरिका ने उनसे मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है। कुछ आरोप यह भी हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को उनका संदेश एक ड्राफ्ट के रूप में भेजा था, जिसमें वाशिंगटन की भाषा का प्रयोग किया गया था। इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका अद्वितीय है।"
शशि थरूर ने यह भी कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीद हर कोई कर रहा है। इस युद्ध के कारण भारत पर भी काफी असर पड़ा है और हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव है। शांति और समाधान में ही हमारे हित हैं। हम चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो जाए।
उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते कतर और बहरीन जैसे देशों से हमारे लिए प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम गैस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आता था, लेकिन युद्ध की स्थिति में यह मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही, खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक निवास कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए भी युद्ध की स्थिति अनुकूल नहीं है।