11वीं सदी में निर्मित रानी-की-वाव: जल वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण

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11वीं सदी में निर्मित रानी-की-वाव: जल वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण

सारांश

गुजरात के पाटन में स्थित रानी-की-वाव एक अद्वितीय जल संरचना है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में हुआ। यह उल्टे मंदिर की आकृति में है और इसे भारतीय 100 रुपये के नोट पर भी दर्शाया गया है।

Key Takeaways

  • रानी-की-वाव 11वीं सदी में बनी एक अद्वितीय जल संरचना है।
  • यह उल्टे मंदिर जैसी आकृति लिए हुए है।
  • यह भारतीय 100 रुपये के नोट पर अंकित है।
  • यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • इसकी डिजाइन और कला अद्वितीय हैं, जिसमें सैकड़ों मूर्तियां शामिल हैं।

पाटन, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत एक ऐसा अद्भुत देश है, जहां के विभिन्न कोनों में प्राकृतिक और मानवनिर्मित सुंदरता देखने को मिलती है। प्राचीन वास्तुकला के मामले में यह विश्वभर में प्रसिद्ध है। गुजरात राज्य में भी एक ऐसी अनोखी धरोहर है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में किया गया था। यह सीढ़ीदार कुआं एक उल्टे मंदिर के समान दिखता है और जल वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है। इसे इतना महत्व दिया गया है कि इसकी छवि भारतीय 100 रुपये के नोट पर भी अंकित है।

इन ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करने से मन और आत्मा दोनों को एक नई ऊर्जा मिलती है। यह न केवल दृश्यात्मक रूप से आकर्षक है, बल्कि इसकी संरचना आज भी देखने वालों को आश्चर्यचकित कर देती है। गुजरात के पाटन में स्थित रानी-की-वाव ऐसी ही एक अद्वितीय धरोहर है, जो 11वीं सदी में निर्मित हुई थी। यह सीढ़ीदार कुआं उल्टे मंदिर की आकृति लिए हुए है। रानी उदयमति द्वारा निर्मित यह भव्य वाव 500 से अधिक मूर्तियों और हजारों नक्काशियों से भरा हुआ है। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त रानी-की-वाव आज भी अपनी भव्यता और कला के लिए पर्यटकों को आकर्षित करती है।

गुजरात के पाटन में स्थित रानी-की-वाव न केवल इंजीनियरिंग और कला का अद्भुत समागम है, बल्कि जल की पवित्रता का एक जीवंत प्रमाण भी है। इसकी विशेषता यह है कि भारतीय सौ रुपये के नोट पर भी रानी-की-वाव की छवि अंकित की गई है।

गुजरात पर्यटन विभाग के अनुसार, रानी-की-वाव का निर्माण वर्ष 1063 ईस्वी में सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम की स्मृति में उनकी पत्नी रानी उदयमति ने करवाया था। रानी उदयमति जूनागढ़ के चूड़ासमा शासक रा खेंगार की पुत्री थीं। यह भव्य बावड़ी सरस्वती नदी के किनारे स्थित है। यह कुआं सात मंजिलों तक नीचे जाता है और मारू-गुर्जरा वास्तुकला का शानदार नमूना है। इसमें 500 से अधिक बड़ी मूर्तियां और 1,000 से ज्यादा छोटी नक्काशीदार आकृतियां हैं। इनमें देवी-देवता, पौराणिक कथाएं और उस काल के दैनिक जीवन के दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं।

चौथा स्तर सबसे गहरा है, जो 23 मीटर की गहराई पर बने 9.5 गुणे 9.4 मीटर के आयताकार तालाब तक पहुंचता है। कुएं में 10 मीटर व्यास और 30 मीटर गहराई का एक शाफ्ट भी है। रानी-की-वाव को उल्टे मंदिर के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो जल की पवित्रता पर ध्यान केंद्रित करता है। प्राचीन काल में भूमिगत जल संरक्षण की यह अनोखी शैली काफी पुरानी है। समय के साथ साधारण गड्ढों से निकलकर ये बावड़ियां भव्य कलात्मक संरचनाओं में परिवर्तित हो गईं।

रानी-की-वाव इसमें चरम उत्कृष्टता का उदाहरण है। भरे और खाली स्थानों का सुंदर अनुपात, मूर्तियों की बारीकी और समतल जमीन से अचानक नीचे उतरने वाली संरचना इसे देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर देती है। साल 2014 में यूनेस्को ने रानी-की-वाव को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।

साल 2016 में इसे भारत का “सबसे स्वच्छ प्रतिष्ठित स्थल” का खिताब भी मिला, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।

अब सवाल उठता है कि गुजरात के पाटन स्थित रानी की वाव पर भ्रमण के लिए कैसे पहुंचा जाए? हवाई मार्ग से सबसे निकटतम अहमदाबाद हवाई अड्डा है, जो पाटन से 125 किलोमीटर दूर है। अहमदाबाद से टैक्सी या बस द्वारा पाटन पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग से देखें तो पाटन भारतीय रेलवे के पश्चिमी रेलवे नेटवर्क पर स्थित है। अहमदाबाद, वडोदरा और अन्य प्रमुख शहरों से कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें नियमित रूप से चलती हैं।

अगर सड़क मार्ग से जाना चाहें तो पाटन अच्छे सड़क नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के जरिए गुजरात के सभी बड़े शहरों और अन्य राज्यों से बस और निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। राज्य परिवहन निगम की बसें नियमित रूप से चलती हैं।

Point of View

बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाता है। इसका संरक्षण और प्रचार महत्वपूर्ण है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस धरोहर की महत्ता को समझ सकें।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

रानी-की-वाव कहां स्थित है?
रानी-की-वाव गुजरात के पाटन में स्थित है।
रानी-की-वाव का निर्माण किसने करवाया था?
रानी-की-वाव का निर्माण रानी उदयमति ने करवाया था।
रानी-की-वाव कब बनी थी?
रानी-की-वाव का निर्माण 1063 ईस्वी में हुआ था।
क्या रानी-की-वाव यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है?
हां, रानी-की-वाव को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
रानी-की-वाव की खासियत क्या है?
रानी-की-वाव का डिज़ाइन उल्टे मंदिर जैसा है और इसमें 500 से अधिक मूर्तियां और नक्काशियां हैं।
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