महिला आरक्षण विधेयक को जल्दबाजी में लागू कर रही भाजपा सरकार: मनोज कुमार झा

Click to start listening
महिला आरक्षण विधेयक को जल्दबाजी में लागू कर रही भाजपा सरकार: मनोज कुमार झा

सारांश

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने भाजपा सरकार की जल्दबाजी में महिला आरक्षण विधेयक लागू करने की आलोचना की है। उन्होंने बंगाल और बिहार के मुद्दों पर भी सवाल उठाए, जबकि पप्पू यादव ने सभी वर्गों की महिलाओं के प्रतिनिधित्व की मांग की।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण विधेयक का जल्दी लागू होना राजनीतिक दबाव का नतीजा है।
  • मनोज कुमार झा ने राजनीतिक भेदभाव की ओर इशारा किया।
  • पप्पू यादव ने सभी वर्गों की महिलाओं के लिए समान प्रतिनिधित्व की बात की।

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज कुमार झा ने भाजपा के बंगाल घोषणापत्र और महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी राय व्यक्त की। इसी बीच, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने सभी वर्गों की महिलाओं को लोकसभा में प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मनोज कुमार झा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "यदि पश्चिम बंगाल में महिलाओं को प्रति माह 3,000 रुपये दिए जा रहे हैं, तो बिहार के लोगों ने किस बात का अपराध किया है? शुरू में 10,000 रुपये की घोषणा के बाद चुप्पी क्यों? 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति देने की बात की गई थी, तो अब यह खामोशी क्यों? एक ही राजनीतिक पार्टी विभिन्न राज्यों में इतना बड़ा भेदभाव क्यों कर रही है? यहां उन्होंने बेरोजगार युवाओं को एकमुश्त 15,000 रुपये देने का वादा किया है। बिहार के युवाओं ने क्या गलती की है? उन्हें उनका हक क्यों नहीं मिलना चाहिए? कुल मिलाकर, यह बंगाल में एक हताशा भरा कदम है।"

महिला आरक्षण विधेयक पर उन्होंने कहा, "इस विधेयक के कई पहलू असंगत हैं। जब 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, तब भाजपा के सदस्यों और शीर्ष नेतृत्व के बीच यह सहमति बनी थी कि इसका कार्यान्वयन लगभग 2034 में होगा। लेकिन अब उनकी राजनीतिक मुश्किलें बढ़ने के कारण, इसे जल्दी लागू करने का निर्णय लिया गया है। फिर भी, इसे इतना अधूरा लागू नहीं किया जाना चाहिए। हमारी पार्टी और अन्य सहयोगी पार्टियों का मानना है कि जब तक 'कोटा के भीतर कोटा' का प्रावधान नहीं किया जाता, तब तक जो भी प्रगति होगी, वह अधूरी रहेगी।"

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने महिला आरक्षण विधेयक पर कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि समाज के गरीब और वंचित वर्गों की यही आशा है कि EBC, OBC, ST, SC और अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं के साथ-साथ सामान्य वर्ग की गरीब महिलाओं को भी लोकसभा में स्थान मिले। यदि कोई ऐसा विधेयक लाने की कोशिश करता है जो गरीब वर्गों की महिलाओं को अनदेखा करता है, तो उसका विरोध किया जाएगा।"

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के इस्तीफे पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा, "मुझे विश्वास नहीं होता कि वर्तमान में कोई न्यायाधीश घर में नकद रखेगा। न्यायमूर्ति वर्मा पर लगे आरोपों की ठीक से जांच नहीं हुई है।"

Point of View

जिसमें आरजेडी ने भाजपा की नीति पर सवाल उठाए हैं। यह मुद्दा न केवल महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा है बल्कि विभिन्न वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से भी संबंधित है।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करना है।
मनोज कुमार झा का इस विधेयक पर क्या कहना है?
मनोज कुमार झा ने इस विधेयक के कई पहलुओं को असंगत बताते हुए जल्दबाजी में लागू करने की आलोचना की है।
पप्पू यादव ने क्या कहा?
पप्पू यादव ने सभी वर्गों की महिलाओं को लोकसभा में प्रतिनिधित्व मिलने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इस विधेयक का कब लागू होना है?
इसका कार्यान्वयन लगभग 2034 में होने की बात की गई थी, लेकिन इसे जल्दी लागू करने का निर्णय लिया गया है।
महिला आरक्षण विधेयक में 'कोटा के भीतर कोटा' का क्या महत्व है?
'कोटा के भीतर कोटा' का प्रावधान महिलाओं के विभिन्न वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।
Nation Press