शी चिनफिंग के विशेष दूत लोसांग ग्यांवछुन ने कम्पाला में मुसेवेनी के शपथ ग्रहण में लिया भाग
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विशेष दूत और चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थाई समिति के उपाध्यक्ष लोसांग ग्यांवछुन ने 12 मई 2026 को युगांडा की राजधानी कम्पाला में राष्ट्रपति योवेरी कगूता मुसेवेनी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया। यह यात्रा मुसेवेनी के निमंत्रण पर हुई और इसे चीन-युगांडा व्यापक रणनीतिक साझेदारी की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
14 मई को मुसेवेनी ने राष्ट्रपति भवन में लोसांग ग्यांवछुन से मुलाकात की। इस अवसर पर लोसांग ग्यांवछुन ने राष्ट्रपति मुसेवेनी को शी चिनफिंग की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ पहुँचाईं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के रणनीतिक मार्गदर्शन में चीन-युगांडा व्यापक रणनीतिक साझेदारी उच्च स्तर पर आगे बढ़ती रही है।
चीन की प्राथमिकताएँ और प्रस्ताव
लोसांग ग्यांवछुन ने स्पष्ट किया कि चीन युगांडा के साथ पारंपरिक मित्रता को और गहरा करते हुए रणनीतिक जुड़ाव मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाएँगे, ताकि नए युग में सभी परिस्थितियों में टिकाऊ चीन-अफ्रीका साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण में योगदान किया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब चीन अफ्रीकी देशों के साथ अपनी कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को व्यापक रूप से सुदृढ़ कर रहा है।
युगांडा की प्रतिक्रिया
मुसेवेनी ने लोसांग ग्यांवछुन से अनुरोध किया कि वे शी चिनफिंग को उनकी ओर से अभिवादन और शुभकामनाएँ पहुँचाएँ। उन्होंने चीन के विकास पथ और युगांडा-चीन संबंधों की सराहना की। मुसेवेनी ने कहा कि युगांडा, चीन के साथ परस्पर हितों और मुख्य चिंताओं के मुद्दों पर मजबूत आपसी समर्थन जारी रखना चाहता है, और विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को और विस्तार देना चाहता है, जिससे दोनों देशों की जनता को अधिकतम लाभ मिल सके।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि चीन, अफ्रीकी देशों में अपने राजनयिक और आर्थिक संबंध लगातार प्रगाढ़ कर रहा है। युगांडा के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी इसी व्यापक अफ्रीका नीति का हिस्सा है, जिसमें बुनियादी ढाँचे, व्यापार और राजनीतिक सहयोग को केंद्र में रखा गया है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क की निरंतरता को दर्शाती है।
आगे की राह
इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नई रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। विश्लेषकों के अनुसार, चीन की यह कूटनीतिक सक्रियता अफ्रीका में उसके बढ़ते प्रभाव का संकेत है, जो आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है।