शिवा शर्मा हत्याकांड: फरार मॉडल श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी नहीं, DCP हटाए गए — ACP स्तर पर भी बड़ा फेरबदल
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के चर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड में ₹50,000 की इनामी फरार मॉडल श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी नहीं हो पाने पर 19 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मामले में कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस उपायुक्त विक्रांत वीर को उनके पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही, सहायक पुलिस आयुक्त स्तर पर व्यापक फेरबदल किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
शिवा शर्मा की मौत के करीब दस दिन बाद भी मुख्य संदिग्ध श्रद्धा दुबे पुलिस की पकड़ से बाहर है। इस विफलता की जवाबदेही तय करते हुए पुलिस आयुक्त के निर्देश पर एक के बाद एक कार्रवाइयाँ की गई हैं। इससे पहले हजरतगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया जा चुका था।
अब डीसीपी विक्रांत वीर को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध करने और एसीपी रजनीश वर्मा को हजरतगंज से हटाकर एसीपी अपराध की जिम्मेदारी देने के बाद यह स्पष्ट है कि वरिष्ठ स्तर तक जवाबदेही का दायरा फैलाया जा रहा है। पिछले 12 घंटों के भीतर की गई ये कार्रवाइयाँ प्रशासनिक दबाव की तीव्रता को दर्शाती हैं।
एसीपी स्तर पर हुए बदलाव
पुलिस आयुक्त के आदेश पर लखनऊ कमिश्नरेट में चार एसीपी के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया गया है। एसीपी कैसरबाग अभिषेक कुमार पाण्डेय को एसीपी हजरतगंज बनाया गया है। एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को एसीपी अपराध की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं, एसीपी कार्यालय में तैनात गौरव उपाध्याय को एसीपी कैसरबाग नियुक्त किया गया है। एसीपी महानगर अंकित कुमार को महानगर के साथ कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। गौरतलब है कि थाना स्तर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक इतने व्यापक फेरबदल इस मामले की संवेदनशीलता और सार्वजनिक दबाव को रेखांकित करते हैं।
श्रद्धा दुबे का पक्ष
फरार चल रही श्रद्धा दुबे ने कथित तौर पर एक बातचीत में अपनी सफाई दी है। उसने दावा किया है कि शिवा शर्मा की मौत हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या थी और इसकी वजह शिवा का कर्ज में डूबे होना था। श्रद्धा ने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज की जाँच से उसकी बेगुनाही साबित हो जाएगी।
श्रद्धा के अनुसार, शिवा शर्मा करीब दो महीने पहले उसके घर पर रहने आया था। उसने यह भी स्वीकार किया कि इस दौरान उसके घर से आभूषण चोरी होने की बात सामने आई थी, हालाँकि उसने इसे कोई बड़ी घटना नहीं बताया। उल्लेखनीय है कि श्रद्धा के इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आम जनता और सार्वजनिक दबाव
यह ऐसे समय में आया है जब हत्याकांड में पुलिस की सुस्ती को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश में पुलिस की जवाबदेही एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।
क्या होगा आगे
प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब सबकी निगाहें श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी पर टिकी हैं। नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद जाँच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालाँकि, प्रशासनिक बदलाव के बावजूद फरार आरोपी को पकड़ना अब भी पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।