2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उज्जैन में बनेगी श्रीकृष्ण पर केंद्रित अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी: सीएम मोहन यादव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उज्जैन में बनेगी श्रीकृष्ण पर केंद्रित अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी: सीएम मोहन यादव

सारांश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में श्रीकृष्ण पर केंद्रित अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की घोषणा की — यह श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत 3,200+ मंदिरों और कई तीर्थ स्थलों के समग्र विकास की बड़ी कार्ययोजना का हिस्सा है।

मुख्य बातें

उज्जैन में श्रीकृष्ण पर केंद्रित अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी, जहाँ दुर्लभ पांडुलिपियाँ और शोध पत्र संग्रहीत होंगे।
शोध वृत्त चित्र, नाट्य और संगीत श्रृंखलाओं के लिए समर्पित यूट्यूब डिजिटल प्लेटफॉर्म शीघ्र शुरू किया जाएगा।
सांदीपनि आश्रम उज्जैन के विकास हेतु भूमि-पूजन सम्पन्न; 3,200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव के निर्देश जारी।
श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत नारायण धाम महिदपुर, छतरपुर, जानापाव (इंदौर), धार, चंदेरी, पन्ना और रायसेन में विकास परियोजनाएँ जारी।
मंदिर भूमि पर कृषि व व्यावसायिक गतिविधियाँ और मंदिर आय से गौशालाओं एवं वृंदावन गाँव की व्यवस्था सुधारने की योजना।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 नवंबर 2026 को घोषणा की कि उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित एक अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी, जो दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों का संरक्षण करेगी। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्य समिति की मंत्रालय में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के विचार और उनकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और लाइब्रेरी की योजना

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित शोध वृत्त चित्र, नाट्य और संगीत श्रृंखलाओं के लिए एक समर्पित यूट्यूब डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन भी शीघ्र आरंभ किया जाएगा। उज्जैन में प्रस्तावित रिसर्च लाइब्रेरी न केवल दुर्लभ ग्रंथों का भंडार होगी, बल्कि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोधार्थियों के लिए एक संदर्भ केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी। इन गतिविधियों को जन भागीदारी और विभिन्न शासकीय योजनाओं के समन्वय से व्यापक अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा।

तीर्थ स्थलों का विकास और सांदीपनि आश्रम

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की थी तथा प्रदेश के विभिन्न स्थानों की यात्राएँ की थीं — ऐसे सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम के विकास और जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन पहले ही सम्पन्न हो चुका है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 3,200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव, प्रवेश द्वारों के निर्माण और जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

मंदिर भूमि और आय का उपयोग

मुख्यमंत्री यादव ने मंदिरों से जुड़ी भूमियों का सदुपयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी भूमि पर कृषि के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित करने की कार्य योजना तैयार की जाए। बड़े मंदिरों की आय के एक भाग का उपयोग गौशालाओं और आसपास के वृंदावन गाँव की व्यवस्था बेहतर करने में किया जा सकता है। मंदिरों में विद्यमान जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के लिए जल गंगा अभियान के अंतर्गत कार्य किए जाने का निर्देश भी दिया गया।

श्रीकृष्ण पाथेय योजना: प्रगति समीक्षा

बैठक में श्रीकृष्ण पाथेय योजना के अंतर्गत कई स्थलों पर जारी विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इनमें नारायण धाम महिदपुर, श्रीकृष्ण धाम छतरपुर, जानापाव महू (इंदौर), अमझेरा धार, मां जागेश्वरी लोक चंदेरी, श्रीकृष्ण राधा लोक पन्ना और रायसेन जिले की जमगढ़ की पहाड़ियाँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कृष्ण भक्ति से जुड़े संस्थाओं का सहयोग लेने की भी पहल करने के निर्देश दिए। यह समग्र अभियान मध्य प्रदेश को श्रीकृष्ण की विरासत से जुड़े प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सुनियोजित कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को एक साथ साधना चाहती है। 3,200 से अधिक मंदिरों का एकीकृत विकास और मंदिर भूमि के व्यावसायिक उपयोग का विचार प्रशासनिक दूरदर्शिता दिखाता है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही का ढाँचा भी उतना ही ज़रूरी है। असली कसौटी यह होगी कि ये परियोजनाएँ स्थानीय समुदायों की आजीविका और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में वास्तविक सुधार कर पाती हैं या सिर्फ घोषणाओं की सूची बनाती हैं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन में प्रस्तावित श्रीकृष्ण रिसर्च लाइब्रेरी क्या होगी?
यह एक अत्याधुनिक शोध पुस्तकालय होगी, जो भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों के संरक्षण एवं अध्ययन के लिए उज्जैन में स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 नवंबर 2026 को श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की बैठक में इसकी घोषणा की।
श्रीकृष्ण पाथेय योजना क्या है और इसके तहत कौन-से स्थल शामिल हैं?
श्रीकृष्ण पाथेय योजना मध्य प्रदेश सरकार की वह पहल है जिसके तहत भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें नारायण धाम महिदपुर, श्रीकृष्ण धाम छतरपुर, जानापाव महू (इंदौर), अमझेरा धार, चंदेरी, पन्ना और रायसेन की जमगढ़ पहाड़ियाँ शामिल हैं।
सांदीपनि आश्रम उज्जैन के विकास की क्या स्थिति है?
उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम के विकास और जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन पहले ही सम्पन्न हो चुका है। यह वही स्थान है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी।
मध्य प्रदेश में मंदिरों के विकास के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
प्रदेश में 3,200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव, प्रवेश द्वारों के निर्माण और जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। मंदिरों में जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के लिए जल गंगा अभियान के तहत गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी।
श्रीकृष्ण पर केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म क्या होगा?
सरकार शोध वृत्त चित्र, नाट्य और संगीत श्रृंखलाओं के लिए एक समर्पित यूट्यूब डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं और विरासत को व्यापक जनसमुदाय तक डिजिटल माध्यम से पहुँचाना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले