क्या सिद्धांत चतुर्वेदी ने बॉलीवुड में छोटे शहरों के लेखकों की कठिनाइयों पर चर्चा की?
सारांश
Key Takeaways
- सिद्धांत चतुर्वेदी ने छोटे शहरों के लेखकों की समस्याओं पर चर्चा की।
- हिंदी सिनेमा में असली भारतीय कहानियों की आवश्यकता है।
- भाषाई मुद्दों के कारण छोटे शहरों के लेखकों को कठिनाई होती है।
- आज की युवा पीढ़ी की समझदारी की तारीफ की।
- इंडस्ट्री में प्रतिभा का सम्मान होना चाहिए।
मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी मनोरंजन जगत में एक प्रमुख नाम बन चुके हैं। अपनी मेहनत और समर्पण से उन्होंने इस इंडस्ट्री में एक खास स्थान प्राप्त किया है। हाल ही में, उन्होंने एक पॉडकास्ट में बॉलीवुड से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
अभिनेता का मानना है कि छोटे शहरों और कस्बों से आने वाले लेखकों को इंडस्ट्री में सीमित अवसर मिलते हैं, और हिंदी सिनेमा में असली भारतीय कहानियों को कम महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा, "देश के छोटे शहरों में बेशुमार प्रतिभा है, लेकिन इंडस्ट्री की संरचना के कारण कई लेखक अपनी आवाज नहीं पहुंचा पाते। हिंदी सिनेमा को आम दर्शकों से जुड़ने के लिए पुराने ढांचे से बाहर निकलना होगा।"
सिद्धांत ने यह भी बताया कि लेखकों को उनकी मेहनत के अनुसार उचित पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा, "हमें केवल बड़े पैमाने पर मनोरंजन की फिल्में नहीं चाहिए, बल्कि 'लापता लेडीज' जैसी हार्टलैंड कहानियों की भी आवश्यकता है। लेकिन, इन कहानियों के लेखकों को अवसर नहीं मिलते, क्योंकि इंडस्ट्री अभी भी मुंबई के जुहू, बांद्रा या अंधेरी तक सीमित है।"
गौरतलब है कि सिद्धांत खुद उत्तर प्रदेश के बलिया से हैं और उन्होंने इस इंडस्ट्री में एक बाहरी व्यक्ति के रूप में कदम रखा था। उनकी करियर की शुरुआत सीरीज 'इनसाइड एज' से हुई, लेकिन असली पहचान 'गली बॉय' से मिली। इसके बाद, उन्होंने कई फिल्मों में विविध किरदार निभाए हैं और दर्शकों के बीच एक मजबूत पहचान बनाई है। सिद्धांत इस संघर्ष को भली-भांति समझते हैं, और यही कारण है कि वे अक्सर सच्चाई और गहराई से जुड़ी कहानियों का समर्थन करते हैं।
पॉडकास्ट में आगे बातचीत करते हुए, सिद्धांत ने बताया कि मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा और दर्शकों के बीच एक दूरी बनती जा रही है, जिसका प्रमुख कारण भाषा और सांस्कृतिक जुड़ाव का अभाव है। उन्होंने कहा, "यदि कोई लेखक भोपाल, ग्वालियर, बलिया या बनारस से मुंबई आता है, तो मुझे नहीं लगता कि उसे आसानी से इंडस्ट्री में स्थान मिलेगा, और इसका कारण है उसका अंग्रेजी न बोल पाना।"
भाषाई मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए, सिद्धांत ने आज की युवा पीढ़ी की प्रशंसा की। उनका कहना है कि 'जेन जी' समझदार हैं और तुरंत पहचान लेते हैं कि कौन सी कहानी दिल से लिखी गई है या केवल फार्मूले के अनुसार बनाई गई है।