खड़गे के विवादास्पद बयान पर एनडीए ने व्यक्त की कड़ी आपत्ति
सारांश
Key Takeaways
- खड़गे का बयान एनडीए नेताओं के लिए विवाद का विषय बन गया है।
- भाजपा का मानना है कि कांग्रेस की भाषा जहरीली हो गई है।
- शिवसेना ने खड़गे के मानसिक संतुलन पर सवाल उठाए हैं।
- खड़गे का बयान कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है।
- राजनीतिक बयानों का प्रभाव अधिक होता है।
सिलीगुड़ी, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा और संघ पर विवादित टिप्पणी की है, जिस पर एनडीए के नेताओं ने आपत्ति जताई है।
भाजपा के नेता प्रदीप भंडारी ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में कहा कि राहुल गांधी के निर्देश पर खड़गे का यह बयान स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि कांग्रेस अब एक राष्ट्र-विरोधी और अलोकतांत्रिक पार्टी बन चुकी है, जिसकी भाषा अब जहरीली हो गई है। यह वही पार्टी है जिसने दिल्ली में आयोजित 'वर्ल्ड एआई समिट' के दौरान भारत को बदनाम करने का प्रयास किया था। समिट में देश के खिलाफ नारे भी लगाए गए थे।
भंडारी ने यह भी कहा कि खड़गे का बयान कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है। जनता लगातार कांग्रेस को नकार रही है। कांग्रेस अब एक ऐसी पार्टी बन गई है, जो एक समुदाय के लोगों को दूसरे समुदाय के लोगों से लड़ाने का कार्य कर रही है। खड़गे का बयान यह साबित करता है कि कांग्रेस अब मुस्लिम लीग-माओवादी पार्टी बन गई है। कांग्रेस पार्टी देश के हित की कामना नहीं करती, बल्कि नुकसान चाहती है।
शिवसेना की नेता शाइना एनसी ने भी खड़गे के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। हो सकता है कि कोई जहरीला सांप उन्हें काटने आ जाए। यही कांग्रेस पार्टी है, जिसने कई बार प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। खड़गे के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रवाद के बारे में कुछ भी नहीं पता।
उन्होंने कहा कि खड़गे ने केवल तुष्टीकरण की राजनीति की है। मुझे लगता है कि उन्हें एक डॉक्टर की आवश्यकता है। उन्हें जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए।
भाजपा के अन्य नेताओं ने खड़गे के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि मोहब्बत की दुकान का असली चेहरा सामने आ चुका है। भीतर केवल कट्टरपंथ और नफरत का जहर भरा है। खड़गे का बयान किसी लोकतांत्रिक नेता की भाषण कम, और उकसावे की ट्रेनिंग अधिक है। आखिर तुष्टीकरण और वोट बैंक के लिए कांग्रेस कितना गिर सकती है।