तेलंगाना: गणेश विसर्जन के दौरान तालाब में डूबने से 6 छात्रों की मौत, CM रेवंत रेड्डी ने जताया शोक
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक तालाब में डूबने से छह युवा छात्रों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा साइबराबाद कमिश्नरेट के पटनचेरु पुलिस स्टेशन क्षेत्र के पेड्डाकंजेरला गांव में हुआ। सभी मृतक 17 से 22 वर्ष के आयु वर्ग के थे।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
ये युवक गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए नेरेडु चेरुवु (तालाब) के किनारे गए थे, जहाँ वे गलती से गहरे पानी में जा गिरे और डूब गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल उन्हें पानी से बाहर निकाला और नजदीकी अस्पताल पहुँचाया, लेकिन चिकित्सकों ने सभी छह युवकों को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मृतकों की पहचान नरसिम्हा (21 वर्ष), तेजा (17 वर्ष), सिद्धार्थ (17 वर्ष), गणेश (18 वर्ष), सुमंत रेड्डी (17 वर्ष) और उदय किरण (22 वर्ष) के रूप में की है।
सरकार की प्रतिक्रिया
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को गणेश विसर्जन के दौरान समुचित सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए।
महिला एवं बाल कल्याण मंत्री सीताक्का ने भी इस घटना पर शोक जताया और शोकाकुल परिवारों को आश्वस्त किया कि सरकार इस कठिन घड़ी में उनके साथ है। मंत्री ने संगारेड्डी के जिला कलेक्टर से फोन पर बात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली और राहत कार्यों की समीक्षा की।
अधिकारियों को निर्देश
मंत्री सीताक्का ने महिला एवं बाल कल्याण विभाग की सचिव श्रुति ओझा से भी बात की और अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। उन्होंने विशेष रूप से आदेश दिया कि जिन क्षेत्रों में विसर्जन समारोह आयोजित होते हैं, वहाँ बच्चों और युवाओं को खतरनाक जल निकायों के समीप जाने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध और बैरिकेडिंग सुनिश्चित की जाए।
आम जनता पर असर और सुरक्षा की चिंता
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्यभर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर विसर्जन समारोह जारी हैं। गौरतलब है कि हर वर्ष विसर्जन के दौरान डूबने की घटनाएँ सामने आती हैं, जो जल निकायों के पास पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम न होने की ओर इशारा करती हैं। इस हादसे ने एक बार फिर विसर्जन स्थलों पर गोताखोरों की तैनाती, अस्थायी बाधाओं और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों की ज़रूरत को रेखांकित किया है।
क्या होगा आगे
जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ परिवारों को मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं। राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह आगामी विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त करेगी, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए।