स्लोवाकिया राष्ट्रपति पेलेग्रिनी का ईयू-नाटो पर जोर, भारत-चीन से संबंध बढ़ाने की वकालत
सारांश
मुख्य बातें
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को ब्रातिस्लावा की संसद में 'स्टेट ऑफ द रिपब्लिक' संबोधन के दौरान यूरोपीय संघ (ईयू) और नाटो की सदस्यता को स्लोवाकिया की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए अपरिहार्य बताया। उन्होंने साथ ही भारत और चीन जैसे देशों के साथ मजबूत राजनयिक और आर्थिक संबंध विकसित करने पर बल दिया।
ईयू और नाटो: कोई विकल्प नहीं
पेलेग्रिनी ने स्वीकार किया कि स्लोवाकिया में ईयू और नाटो के कामकाज को लेकर कुछ आलोचनात्मक विचार मौजूद हैं। तथापि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी ऐसा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है जो इन दोनों संगठनों की जगह लेकर देश की सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी दे सके। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक माहौल में यह सदस्यता पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है।
भारत और चीन की बढ़ती भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल में स्लोवाकिया के लिए दुनिया भर के देशों के साथ अच्छे राजनयिक और आर्थिक संबंध बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये देश स्लोवाकिया की खुली अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब यूरोपीय देश अमेरिका के साथ ट्रांसअटलांटिक सहयोग में कमी की भरपाई के लिए वैकल्पिक साझेदारियाँ तलाश रहे हैं।
ईयू की कार्यशैली पर सवाल
पेलेग्रिनी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के तेजी से बदलते परिदृश्य और ट्रांसअटलांटिक सहयोग में आई कमी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने खेद जताया कि इन बड़े बदलावों के बावजूद ईयू न तो अधिक कुशल बन पाया है और न ही उसने अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार किया है। उन्होंने जोर दिया कि ईयू को अपनी कार्यक्षमता बढ़ानी होगी, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा मजबूत करनी होगी, और सदस्य देशों के बीच सहयोग से ऊर्जा की कीमतें कम करनी होंगी।
यूक्रेन संघर्ष: कूटनीति ही समाधान
राष्ट्रपति पेलेग्रिनी ने यूक्रेन में लगभग पाँच साल से जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि यह युद्ध यह साबित कर चुका है कि स्थायी समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, बल्कि कूटनीति की मेज से निकलेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईयू का दृष्टिकोण सैन्य समाधान की बजाय शांतिपूर्ण समाधान खोजने पर केंद्रित होना चाहिए। गौरतलब है कि स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको पहले से ही यूक्रेन को लेकर यूरोपीय मुख्यधारा से अलग रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं, और राष्ट्रपति के इस संबोधन को उसी व्यापक सोच के अनुरूप देखा जा रहा है।
आगे की राह
पेलेग्रिनी के इस संबोधन से संकेत मिलता है कि स्लोवाकिया ईयू और नाटो में बना रहते हुए भी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंध प्रगाढ़ करने और यूक्रेन संघर्ष में शांति प्रयासों को प्राथमिकता देने की नीति पर आगे बढ़ेगा। यूरोपीय राजनीति में बहुध्रुवीयता की बढ़ती माँग के बीच यह भाषण मध्य यूरोप की स्वतंत्र आवाज़ के रूप में महत्व रखता है।