महाराष्ट्र मंत्री का 'पीए' बनकर ठगी: रत्नागिरी में समाजसेवी से ₹5,000 हड़पे, मामला दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के खेड में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर राज्य के मंत्री योगेश कदम का निजी सहायक (पीए) बनकर समाजसेवी विद्याधर दत्ताराम सालुंखे (56) से ₹5,000 ठग लिए। खेड पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 342/2026 के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, सालुंखे चिपलूण तालुका में कथित रूप से संचालित अवैध पत्थर खदानों का मुद्दा सीधे मंत्री के समक्ष उठाना चाहते थे। उनका आरोप था कि इन खदानों के कारण सरकारी राजस्व को भारी क्षति हो रही है।
इसी दौरान आरोपी रवीराज चिखले ने स्वयं को मंत्री योगेश कदम का पीए बताया और मंत्री से मुलाकात कराने तथा काम निपटाने का भरोसा दिलाया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 17 सितंबर 2026 को चिखले ने उनसे ₹5,000 ले लिए।
सालुंखे के अनुसार, रकम लेने के बावजूद न तो मंत्री से भेंट कराई गई और न ही उनका काम हुआ। आरोपी ने अपना वादा पूरी तरह से तोड़ दिया।
पुलिस की कार्रवाई और दर्ज धाराएँ
खेड पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 318(2), 318(4) और 319(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जाँच पूरी होने तक आरोपी पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। फिलहाल मामले की जाँच जारी है।
ऐसे ही एक और मामले की पृष्ठभूमि
इसी तरह की एक घटना में दिल्ली पुलिस ने 29 सितंबर 2026 को 44 वर्षीय भालिंदर पाल सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि सिंह ने खुद को एक प्रमुख राजनीतिक नेता का जीवनसाथी बताकर द्वारका के एक व्यवसायी से ₹1.69 लाख की ठगी की।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने मैसेजिंग ऐप की प्रोफाइल तस्वीर में अशोक चिह्न का उपयोग किया था ताकि उसका अकाउंट आधिकारिक प्रतीत हो। उसने कथित तौर पर एक छात्र की फीस जमा करने के नाम पर तत्काल रकम माँगी और आश्वासन दिया कि राशि बाद में नेता के कार्यालय से लौटा दी जाएगी।
व्यवसायी ने कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए और दिल्ली से लखनऊ की हवाई टिकट भी बुक कर दी। बाद में जब उसे ठगी का एहसास हुआ, तो उसने पुलिस से संपर्क किया।
आम जनता पर असर और सावधानी की जरूरत
गौरतलब है कि नेताओं, अधिकारियों या उनके करीबी बताने वाले ठगों के मामले देश भर में बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नागरिकों को किसी भी अनजान व्यक्ति को सरकारी काम के नाम पर नकद राशि देने से पहले उसकी आधिकारिक पहचान सत्यापित करनी चाहिए।
अधिकारियों ने सलाह दी है कि सरकारी विभागों से जुड़े किसी भी कार्य के लिए सीधे संबंधित कार्यालय से संपर्क करें और किसी बिचौलिए को अग्रिम राशि न दें। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग कर भरोसे का फायदा उठाना एक गंभीर अपराध है।
आने वाले दिनों में खेड पुलिस की जाँच और आरोपी रवीराज चिखले की गिरफ्तारी पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।