19 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र मंत्री का 'पीए' बनकर ठगी: रत्नागिरी में समाजसेवी से ₹5,000 हड़पे, मामला दर्ज

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महाराष्ट्र मंत्री का 'पीए' बनकर ठगी: रत्नागिरी में समाजसेवी से ₹5,000 हड़पे, मामला दर्ज

सारांश

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में एक आरोपी ने मंत्री योगेश कदम का पीए बनकर समाजसेवी से ₹5,000 ठग लिए। मंत्री से मुलाकात और काम कराने का झूठा वादा कर रकम ली गई, पर दोनों में से कुछ नहीं हुआ। खेड पुलिस ने BNS 2023 की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मुख्य बातें

आरोपी रवीराज चिखले ने खुद को मंत्री योगेश कदम का पीए बताकर समाजसेवी विद्याधर सालुंखे से ₹5,000 ठगे।
घटना 17 सितंबर 2026 को हुई; शिकायतकर्ता चिपलूण की अवैध पत्थर खदानों का मुद्दा मंत्री तक पहुँचाना चाहते थे।
खेड पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 342/2026 दर्ज किया; धाराएँ BNS 2023 की 318(2), 318(4) और 319(2) ।
इसी तरह दिल्ली में 29 सितंबर को एक अन्य आरोपी को राजनीतिक नेता का करीबी बताकर ₹1.69 लाख की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने कहा — जाँच पूरी होने तक आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं; मामले की जाँच जारी।

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के खेड में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर राज्य के मंत्री योगेश कदम का निजी सहायक (पीए) बनकर समाजसेवी विद्याधर दत्ताराम सालुंखे (56) से ₹5,000 ठग लिए। खेड पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 342/2026 के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

शिकायत के अनुसार, सालुंखे चिपलूण तालुका में कथित रूप से संचालित अवैध पत्थर खदानों का मुद्दा सीधे मंत्री के समक्ष उठाना चाहते थे। उनका आरोप था कि इन खदानों के कारण सरकारी राजस्व को भारी क्षति हो रही है।

इसी दौरान आरोपी रवीराज चिखले ने स्वयं को मंत्री योगेश कदम का पीए बताया और मंत्री से मुलाकात कराने तथा काम निपटाने का भरोसा दिलाया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 17 सितंबर 2026 को चिखले ने उनसे ₹5,000 ले लिए।

सालुंखे के अनुसार, रकम लेने के बावजूद न तो मंत्री से भेंट कराई गई और न ही उनका काम हुआ। आरोपी ने अपना वादा पूरी तरह से तोड़ दिया।

पुलिस की कार्रवाई और दर्ज धाराएँ

खेड पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 318(2), 318(4) और 319(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जाँच पूरी होने तक आरोपी पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। फिलहाल मामले की जाँच जारी है।

ऐसे ही एक और मामले की पृष्ठभूमि

इसी तरह की एक घटना में दिल्ली पुलिस ने 29 सितंबर 2026 को 44 वर्षीय भालिंदर पाल सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि सिंह ने खुद को एक प्रमुख राजनीतिक नेता का जीवनसाथी बताकर द्वारका के एक व्यवसायी से ₹1.69 लाख की ठगी की।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने मैसेजिंग ऐप की प्रोफाइल तस्वीर में अशोक चिह्न का उपयोग किया था ताकि उसका अकाउंट आधिकारिक प्रतीत हो। उसने कथित तौर पर एक छात्र की फीस जमा करने के नाम पर तत्काल रकम माँगी और आश्वासन दिया कि राशि बाद में नेता के कार्यालय से लौटा दी जाएगी।

व्यवसायी ने कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए और दिल्ली से लखनऊ की हवाई टिकट भी बुक कर दी। बाद में जब उसे ठगी का एहसास हुआ, तो उसने पुलिस से संपर्क किया।

आम जनता पर असर और सावधानी की जरूरत

गौरतलब है कि नेताओं, अधिकारियों या उनके करीबी बताने वाले ठगों के मामले देश भर में बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नागरिकों को किसी भी अनजान व्यक्ति को सरकारी काम के नाम पर नकद राशि देने से पहले उसकी आधिकारिक पहचान सत्यापित करनी चाहिए।

अधिकारियों ने सलाह दी है कि सरकारी विभागों से जुड़े किसी भी कार्य के लिए सीधे संबंधित कार्यालय से संपर्क करें और किसी बिचौलिए को अग्रिम राशि न दें। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग कर भरोसे का फायदा उठाना एक गंभीर अपराध है।

आने वाले दिनों में खेड पुलिस की जाँच और आरोपी रवीराज चिखले की गिरफ्तारी पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में उन लोगों को निशाना बनाती है जो व्यवस्था से न्याय माँगने आते हैं। सालुंखे अवैध खनन की शिकायत लेकर गए थे, और उन्हीं की सत्प्रवृत्ति का फायदा उठाया गया। यह विडंबना है कि जो नागरिक सरकारी राजस्व बचाने की कोशिश कर रहा था, वही ठगी का शिकार बना। BNS के तहत दर्ज धाराएँ सख्त हैं, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या इस बार दोषी को त्वरित न्याय मिलता है या यह मामला भी लंबी जाँच की भेंट चढ़ जाता है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रत्नागिरी खेड ठगी मामले में आरोपी ने क्या किया?
आरोपी रवीराज चिखले ने खुद को महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम का निजी सहायक बताकर समाजसेवी विद्याधर सालुंखे से ₹5,000 लिए और मंत्री से मुलाकात कराने का वादा किया। रकम लेने के बाद न मुलाकात हुई और न काम।
खेड पुलिस ने इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई हैं?
खेड पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 318(2), 318(4) और 319(2) के तहत अपराध क्रमांक 342/2026 दर्ज किया है। मामले की जाँच अभी जारी है।
शिकायतकर्ता विद्याधर सालुंखे मंत्री से क्यों मिलना चाहते थे?
सालुंखे चिपलूण तालुका में कथित रूप से चल रही अवैध पत्थर खदानों का मुद्दा मंत्री योगेश कदम के समक्ष उठाना चाहते थे। उनका आरोप था कि इन खदानों से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
क्या इस तरह की ठगी के अन्य मामले भी सामने आए हैं?
हाँ, दिल्ली में 29 सितंबर 2026 को भालिंदर पाल सिंह (44) को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने एक राजनीतिक नेता का करीबी बताकर द्वारका के व्यवसायी से ₹1.69 लाख की ठगी की और अपने मैसेजिंग ऐप पर अशोक चिह्न की तस्वीर लगाकर खाते को आधिकारिक दिखाया।
ऐसी ठगी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
किसी भी व्यक्ति का सरकारी पदनाम मानने से पहले उसकी पहचान संबंधित कार्यालय से सत्यापित करें। किसी भी काम के लिए अग्रिम नकद राशि किसी बिचौलिए को न दें और सीधे संबंधित सरकारी विभाग से संपर्क करें।
राष्ट्र प्रेस
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