भुवनेश्वर फ्रेंचाइजी ठगी: पूर्व सांसद का बेटा बनकर ₹3 करोड़ हड़पे, आरोपी दार्जिलिंग से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भुवनेश्वर की इन्फोसिटी पुलिस ने रविवार, 28 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले से 51 वर्षीय सचिदानंद भोई को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने खुद को पूर्व लोकसभा सांसद कृपासिंधु भोई का बेटा और एक ऑटो-टेक कंपनी का सीईओ बताकर 200 से 250 से अधिक लोगों से कथित तौर पर ₹3 करोड़ से अधिक की ठगी की। यह मामला ओडिशा में फर्जी फ्रेंचाइजी घोटालों की बढ़ती श्रृंखला में नवीनतम है।
मुख्य घटनाक्रम
आरोपी सचिदानंद भोई मूल रूप से ओडिशा के बरगढ़ जिले के भेड़ेन थाना क्षेत्र के केंदुपाली गांव का निवासी है और हाल तक कटक जिले के फूलनखरा इलाके में रह रहा था। उसने भुवनेश्वर के पाटिया इलाके में 'गो स्पीडी गो' (हाइफर्क टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड) नामक ऑटो-टेक कंपनी का कार्यालय स्थापित किया था, जो घर-घर जाकर वाहन सर्विसिंग देने का दावा करती थी।
इसके अतिरिक्त, आरोपी ने भुवनेश्वर के खंडगिरि और गंजाम जिले में भी कार्यालय खोले थे। खुद को कंपनी का सीईओ और निदेशक बताते हुए उसने कर्मचारियों को नियमित वेतन और फ्रेंचाइजी धारकों को निश्चित कारोबार व मुनाफे की गारंटी का लालच दिया।
ठगी का तरीका
पुलिस जांच के अनुसार, सचिदानंद भोई ने मुख्य रूप से अपने कर्मचारियों को निशाना बनाया और उन्हें अपने रिश्तेदारों व परिचितों को फ्रेंचाइजी दिलाने के लिए प्रेरित किया। फ्रेंचाइजी लेने के इच्छुक लोगों ने ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक का निवेश किया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने फ्रेंचाइजी धारकों से जुटाए गए लगभग ₹2.30 करोड़ और कर्मचारियों के वेतन के लिए रखे गए करीब ₹63 लाख का कथित तौर पर गबन किया। न तो वादा की गई सेवाएं दी गईं और न ही कर्मचारियों को वेतन मिला। इसके बाद वह सभी कार्यालय बंद कर फरार हो गया।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
जोन-6 के सहायक पुलिस आयुक्त मानस रंजन प्रधान ने बताया कि पुलिस ने आरोपी को दार्जिलिंग जिले के खरीबाड़ी थाना क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा के निकट उसके ठिकाने से दबोचा। उसे पहले सिलीगुड़ी की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर ओडिशा लाया गया।
गौरतलब है कि सचिदानंद भोई के खिलाफ पहले से ही क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन, स्पेशल क्राइम यूनिट, शहीद नगर थाना, पहाला थाना और झारसुगुड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में कई मामले दर्ज हैं। एसीपी प्रधान के अनुसार, अब तक 200 से 250 पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई है।
आगे की जांच
पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच के लिए अदालत से आरोपी को रिमांड पर लेने की अनुमति मांगी जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ओडिशा में फर्जी फ्रेंचाइजी और नौकरी के नाम पर ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पीड़ितों की संख्या और ठगी की राशि में और इजाफा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।