दिल्ली पुलिस ने शेयर ट्रेडिंग-IPO ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया, ओडिशा से आरोपी गिरफ्तार; ₹2.97 करोड़ के लेनदेन की जांच
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस के शाहदरा साइबर थाना ने 10 अगस्त 2026 को शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश के नाम पर साइबर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए ओडिशा के भुवनेश्वर से 33 वर्षीय सुब्रत कुमार साहू को गिरफ्तार किया। जांच के अनुसार, आरोपी ठगी से अर्जित धन को कई बैंक खातों के माध्यम से ठिकाने लगाने में सक्रिय भूमिका निभाता था।
मामले का पूरा घटनाक्रम
यह कार्रवाई ई-एफआईआर संख्या 75/2026 के तहत की गई, जो 1 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के अंतर्गत शिकायतकर्ता रामचंद्र यादव की शिकायत पर दर्ज हुई थी। पुलिस के अनुसार, ठगों ने शिकायतकर्ता को एक व्हाट्सएप समूह में जोड़ा, जहाँ वे खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ और निवेश सलाहकार बताकर ऊंचे और सुनिश्चित मुनाफे का प्रलोभन देते थे।
भरोसा जीतने के लिए ठगों ने फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और ऐप पर नकली मुनाफा दिखाया। इन दावों को सच मानकर रामचंद्र यादव ने यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए कुल ₹4.75 लाख निवेश कर दिए। जब उन्होंने मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो उनसे ₹12 लाख अतिरिक्त शुल्क की माँग की गई — तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
वित्तीय नेटवर्क की जांच
जांच के लिए इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा के नेतृत्व में एएसआई राजदीप, हेड कांस्टेबल जावेद, नरेंद्र, दीपक और कांस्टेबल रंजीत की विशेष टीम गठित की गई। वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल में सामने आया कि ठगी की राशि में से लगभग ₹3.75 लाख सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के फ्यूजन एंटरप्राइजेज नामक कॉर्पोरेट खाते में भेजे गए थे।
यह खाता सुब्रत कुमार साहू और संतोष कुमार लेंका के नाम पर भुवनेश्वर में पंजीकृत था। तकनीकी विश्लेषण में पाया गया कि खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर साहू के नाम पर दर्ज था। जांचकर्ताओं को यह भी जानकारी मिली कि साहू और उसके सहयोगी लेंका इस खाते से जुड़ी गतिविधियों के सिलसिले में हवाई मार्ग से गुवाहाटी गए थे।
आरोपी की गिरफ्तारी और खुलासे
तकनीकी निगरानी और कानूनी प्रक्रिया के बाद पुलिस ने सुब्रत कुमार साहू को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अवैध वित्तीय लेनदेन के लिए लगभग सात बैंक खाते — कॉर्पोरेट और बचत खाते दोनों — खुलवाए और संचालित किए। उसके मोबाइल फोन से सह-आरोपियों के साथ बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी बातचीत भी बरामद की गई। आरोपी ने यह भी बताया कि खाते से जुड़ा सिम कार्ड बाद में नष्ट कर दिया गया था।
जांच में पता चला कि मात्र दो महीनों की अवधि में इस खाते में ₹2,97,33,000 जमा हुए। यह खाता देशभर में दर्ज 17 साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा पाया गया है, जो इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
ठगी का तरीका
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। शुरुआत में पीड़ितों को छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता था और फर्जी ऐप पर नकली मुनाफा दिखाया जाता था। कुछ मामलों में भरोसा बढ़ाने के लिए थोड़ी रकम निकालने की अनुमति भी दी जाती थी।
जब पीड़ितों का पूरा भरोसा जीत लिया जाता था, तब उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। पैसे निकालने के समय टैक्स, सत्यापन शुल्क, अनुपालन शुल्क या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर अतिरिक्त रकम माँगी जाती थी। पर्याप्त धन वसूलने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे।
पुलिस की सलाह और आगे की जांच
पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया है। फिलहाल जांच टीम गिरोह के अन्य सदस्यों, पूरे वित्तीय नेटवर्क और साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों का पता लगाने में जुटी है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल, सोशल मीडिया या अनजान निवेश ऐप के जरिए किसी भी निवेश प्रस्ताव में सतर्कता बरतें और किसी भी 'गारंटीड रिटर्न' के लालच में आकर पैसा न लगाएँ।