11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली पुलिस ने शेयर-IPO ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया, ओडिशा के सुब्रत साहू गिरफ्तार; 2 माह में ₹2.97 करोड़ का लेनदेन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली पुलिस ने शेयर-IPO ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया, ओडिशा के सुब्रत साहू गिरफ्तार; 2 माह में ₹2.97 करोड़ का लेनदेन

सारांश

शेयर ट्रेडिंग और IPO में मोटे मुनाफे का झाँसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया। ओडिशा से गिरफ्तार सुब्रत साहू के खाते में दो माह में ₹2.97 करोड़ जमा हुए और यह खाता देशभर के 17 साइबर ठगी मामलों से जुड़ा है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस के शाहदरा साइबर थाना ने शेयर ट्रेडिंग और IPO ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
ओडिशा के सुब्रत कुमार साहू (33 वर्ष) को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया।
आरोपी के बैंक खाते में मात्र दो महीनों में ₹2,97,33,000 जमा हुए; खाता देशभर के 17 साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा।
पीड़ित रामचंद्र यादव ने ₹4.75 लाख निवेश किए; पैसे निकालने पर ₹12 लाख अतिरिक्त शुल्क माँगा गया।
आरोपी ने लगभग 7 बैंक खाते अवैध लेनदेन के लिए संचालित किए; मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद।
पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे वित्तीय नेटवर्क की जाँच जारी रखे हुए है।

दिल्ली पुलिस के शाहदरा साइबर थाना ने शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश के नाम पर संगठित साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है और ओडिशा निवासी सुब्रत कुमार साहू (33 वर्ष) को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के एक बैंक खाते में मात्र दो महीनों में ₹2,97,33,000 जमा हुए, जो देशभर में दर्ज 17 साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़े पाए गए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई ई-एफआईआर संख्या 75/2026 के तहत की गई, जो 1 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के अंतर्गत दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता रामचंद्र यादव को एक व्हाट्सएप समूह में जोड़ा गया था, जहाँ ठगों ने खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ और निवेश सलाहकार बताकर ऊँचे और सुनिश्चित मुनाफे का प्रलोभन दिया।

भरोसा जीतने के लिए ठगों ने फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और ऐप पर नकली मुनाफा दिखाया। इन दावों को सच मानकर यादव ने यूपीआई और नेट बैंकिंग के माध्यम से कुल ₹4.75 लाख निवेश कर दिए। जब उन्होंने मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने ₹12 लाख अतिरिक्त शुल्क की माँग की — तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।

गिरोह का तरीकाकार

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लक्ष्य तय करता था। शुरुआत में पीड़ितों को छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता था और फर्जी ऐप पर नकली मुनाफा दिखाया जाता था। कुछ मामलों में भरोसा बढ़ाने के लिए थोड़ी रकम वापस करने की अनुमति भी दी जाती थी।

जब पीड़ित का विश्वास पूरी तरह जीत लिया जाता था, तब बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी। पैसे निकालने के समय टैक्स, सत्यापन शुल्क, अनुपालन शुल्क या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर और पैसे माँगे जाते थे। पर्याप्त धन वसूलने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे।

जाँच और गिरफ्तारी

मामले की जाँच के लिए इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा, एएसआई राजदीप, हेड कांस्टेबल जावेद, नरेंद्र और दीपक तथा कांस्टेबल रंजीत की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की और पाया कि ठगी की गई राशि में से लगभग ₹3.75 लाख सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के फ्यूजन एंटरप्राइजेज नामक खाते में स्थानांतरित किए गए थे।

यह कॉर्पोरेट खाता सुब्रत कुमार साहू और संतोष कुमार लेंका के नाम पर भुवनेश्वर में पंजीकृत था। तकनीकी विश्लेषण में खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर साहू के नाम पर दर्ज मिला। तकनीकी निगरानी और कानूनी प्रक्रिया के बाद पुलिस ने साहू को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया।

आरोपी का स्वीकारोक्ति और बरामदगी

पूछताछ में साहू ने स्वीकार किया कि उसने अवैध वित्तीय लेनदेन के लिए लगभग सात बैंक खाते — कॉर्पोरेट और बचत खाते दोनों — खुलवाए और संचालित किए थे। उसने यह भी बताया कि खाते से जुड़ा सिम कार्ड बाद में फेंक दिया गया था। पुलिस को उसके मोबाइल फोन की जाँच में सह-आरोपियों के साथ बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित बातचीत भी बरामद हुई।

जाँचकर्ताओं को यह भी जानकारी मिली कि साहू और उसके सहयोगी लेंका इस खाते से जुड़ी गतिविधियों के सिलसिले में हवाई मार्ग से गुवाहाटी गए थे। पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया है।

आगे की जाँच और सावधानी की अपील

पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, पूरे वित्तीय नेटवर्क तथा साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों का पता लगाने में जुटी है। गौरतलब है कि यह खाता देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज 17 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़ा है, जो इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क की ओर संकेत करता है।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल, सोशल मीडिया या अनजान निवेश ऐप के जरिए किसी भी लालच में आकर पैसा निवेश न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन पर दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप के जरिए मध्यम वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। एक अकेले खाते का 17 अलग-अलग मामलों से जुड़ा होना बताता है कि ये अलग-थलग घटनाएँ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा हैं। असली सवाल यह है कि ऐसे खाते महीनों तक बिना बैंकिंग निगरानी के कैसे सक्रिय रहते हैं — और क्या वित्तीय संस्थाओं की केवाईसी प्रक्रिया इतनी कमज़ोर है कि कॉर्पोरेट खाते भी मनी म्यूलिंग का हथियार बन जाएँ। गिरफ्तारी स्वागत योग्य है, लेकिन जब तक मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क तक पहुँच नहीं होती, ऐसे गिरोह नए खाते और नए मोहरे खड़े करते रहेंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने किस मामले में ओडिशा के आरोपी को गिरफ्तार किया?
दिल्ली पुलिस के शाहदरा साइबर थाना ने शेयर ट्रेडिंग और IPO निवेश के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मामले में ओडिशा के सुब्रत कुमार साहू को गिरफ्तार किया। यह मामला 1 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत दर्ज ई-एफआईआर संख्या 75/2026 से जुड़ा है।
ठगी का यह गिरोह किस तरह से लोगों को फँसाता था?
गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जोड़ता था और खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ बताकर ऊँचे मुनाफे का लालच देता था। फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर नकली मुनाफा दिखाकर विश्वास जीता जाता था, फिर बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी और पैसे निकालने पर टैक्स या शुल्क के नाम पर और पैसे माँगे जाते थे।
आरोपी के बैंक खाते में कितनी रकम जमा हुई और यह कितने मामलों से जुड़ा है?
आरोपी सुब्रत कुमार साहू के एक बैंक खाते में मात्र दो महीनों में ₹2,97,33,000 जमा हुए। यह खाता देशभर में दर्ज 17 अलग-अलग साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़ा पाया गया है।
पीड़ित रामचंद्र यादव को कितना नुकसान हुआ?
शिकायतकर्ता रामचंद्र यादव ने यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए कुल ₹4.75 लाख निवेश किए। जब उन्होंने मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने ₹12 लाख अतिरिक्त शुल्क माँगा, जिसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
साइबर निवेश ठगी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
दिल्ली पुलिस ने सलाह दी है कि व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल या अनजान निवेश ऐप के जरिए किसी भी लालच में आकर पैसा निवेश न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन पर दें और किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता सेबी (SEBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाँचें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 9 घंटे पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले