10 अगस्त 2026
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शाहदरा साइबर पुलिस ने स्टॉक ट्रेडिंग फ्रॉड का भंडाफोड़ किया, ओडिशा से आरोपी गिरफ्तार; खाते में ₹2.97 करोड़ की हेराफेरी

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शाहदरा साइबर पुलिस ने स्टॉक ट्रेडिंग फ्रॉड का भंडाफोड़ किया, ओडिशा से आरोपी गिरफ्तार; खाते में ₹2.97 करोड़ की हेराफेरी

सारांश

दिल्ली की साइबर पुलिस शाहदरा ने व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए चलाए जा रहे स्टॉक ट्रेडिंग फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया। ओडिशा से गिरफ्तार आरोपी के खाते में सिर्फ दो महीने में ₹2.97 करोड़ जमा हुए और एक पीड़ित से ₹4.75 लाख ठगे गए। यह खाता देशभर की 17 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़ा है।

मुख्य बातें

साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा ने 10 अगस्त 2026 को स्टॉक ट्रेडिंग निवेश फ्रॉड का पर्दाफाश किया।
ओडिशा से 33 वर्षीय सुब्रत कुमार साहू को गिरफ्तार किया गया; सह-आरोपी संतोष कुमार लेंका की तलाश जारी।
शिकायतकर्ता राम चंद्र यादव से व्हाट्सएप ग्रुप 'बुल मार्केट धन क्लब एच 10608' के ज़रिए ₹4,75,000 की ठगी हुई।
आरोपी के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया खाते में दो महीनों में ₹2.97 करोड़ जमा हुए; यह खाता देशभर की 17 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़ा।
आरोपी ने कथित तौर पर 7 बैंक खाते (कॉर्पोरेट व बचत) गैर-कानूनी लेन-देन के लिए खोले थे।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को अज्ञात निवेश प्लेटफॉर्म और गारंटीड रिटर्न के दावों से सावधान रहने की अपील की।

दिल्ली की साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा ने 10 अगस्त 2026 को एक बड़े स्टॉक ट्रेडिंग निवेश धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए ओडिशा से 33 वर्षीय सुब्रत कुमार साहू को गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता राम चंद्र यादव से शेयर बाज़ार और आईपीओ में निवेश के बहाने ₹4,75,000 की ठगी की गई थी, जबकि आरोपी के बैंक खाते में महज़ दो महीनों में ₹2.97 करोड़ जमा हुए। यह खाता देशभर में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की 17 शिकायतों से जुड़ा पाया गया है।

मामले का घटनाक्रम

1 अप्रैल को राम चंद्र यादव की शिकायत पर साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा में प्राथमिकी दर्ज की गई। यादव ने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें व्हाट्सएप इन्वेस्टमेंट ग्रुप 'बुल मार्केट धन क्लब एच 10608' के ज़रिए संपर्क किया। इस ग्रुप में ठगों ने स्वयं को अनुभवी शेयर बाज़ार ट्रेडर बताया और निश्चित व अधिक रिटर्न का प्रलोभन देकर निवेश के लिए प्रेरित किया।

शुरुआत में आरोपियों ने एक कथित निवेश ऐप पर नकली ट्रेडिंग मुनाफा दिखाकर यादव का विश्वास जीता। भरोसे में आकर यादव ने यूपीआई और नेट बैंकिंग के ज़रिए बताए गए खाते में ₹4,75,000 स्थानांतरित कर दिए। जब उन्होंने कथित मुनाफा निकालने का प्रयास किया, तो ठगों ने प्रोसेसिंग और विड्रॉल चार्ज के नाम पर अतिरिक्त ₹12 लाख की माँग की — तब जाकर यादव को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।

जाँच और गिरफ्तारी

मामले की जाँच के लिए साइबर शाहदरा की एक समर्पित टीम गठित की गई। जाँच में पता चला कि धोखाधड़ी की रकम का एक हिस्सा — लगभग ₹3.75 लाखसेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक कॉर्पोरेट खाते में जमा हुई थी। यह खाता 'फ्यूजन एंटरप्राइजेज' के नाम से खोला गया था, जिसके खाताधारकों के रूप में सुब्रत कुमार साहू और संतोष कुमार लेंका का नाम दर्ज था। फर्म का पंजीकृत पता भुवनेश्वर, ज़िला खुर्दा, ओडिशा पाया गया।

खाते से जुड़े मोबाइल नंबर का तकनीकी विश्लेषण किया गया, जिसमें सिम सुब्रत कुमार साहू के नाम पर पंजीकृत मिली। लगातार तकनीकी जाँच के बाद आरोपी का पता लगाकर उसे ओडिशा से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में साहू ने स्वीकार किया कि उसने गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन को सुगम बनाने के लिए लगभग 7 बैंक खाते — कॉर्पोरेट और बचत, दोनों प्रकार के — खोले और संचालित किए।

रैकेट की कार्यप्रणाली

जाँच से यह भी उजागर हुआ कि आरोपी सुब्रत कुमार साहू, सह-आरोपी संतोष कुमार लेंका के साथ बैंक खाते से जुड़े लेन-देन के सिलसिले में हवाई मार्ग से गुवाहाटी, असम भी गया था। साहू के मोबाइल फोन की जाँच में सह-आरोपियों के साथ बैंक खातों और लेन-देन पर हुई बातचीत के साक्ष्य मिले। आरोपी ने यह भी बताया कि संबंधित सिम कार्ड बाद में नष्ट कर दिया गया था।

पुलिस के अनुसार, इस प्रकार के रैकेट में ठग सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और टेलीग्राम चैनलों के ज़रिए संभावित पीड़ितों से संपर्क करते हैं और स्वयं को विशेषज्ञ ट्रेडर या वित्तीय सलाहकार बताते हैं। नकली निवेश ऐप पर झूठा मुनाफा दिखाया जाता है, और विश्वास जीतने के लिए कुछ मामलों में थोड़ी रकम वापस भी की जाती है। जब पीड़ित बड़ी रकम निवेश कर देता है, तो निकासी के समय टैक्स, वेरिफिकेशन और कंप्लायंस चार्ज के नाम पर और धन ऐंठा जाता है, और अंततः ठग संपर्क तोड़ लेते हैं।

आम जनता के लिए पुलिस की सलाह

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अज्ञात प्लेटफॉर्म के ज़रिए निवेश के किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतें। गारंटीड और अत्यधिक रिटर्न के दावों को कभी विश्वसनीय न मानें, और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग क्रेडेंशियल साझा न करें।

साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और अपने बैंक को बिना देरी के सूचित करें। रैकेट में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान और पूरे वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के लिए जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर ज़्यादा चिंताजनक है — महज़ दो महीनों में एक खाते में ₹2.97 करोड़ और 17 अलग-अलग शिकायतें यह बताती हैं कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क है। सह-आरोपी अभी भी फरार है और रैकेट के अन्य सदस्यों की पहचान बाकी है। गौरतलब है कि 'मनी म्यूल' यानी किराए के बैंक खाताधारकों का इस्तेमाल साइबर ठगी में तेज़ी से बढ़ रहा है — और जब तक इस पर्त को भी कानूनी दायरे में नहीं लाया जाएगा, असली सरगना पकड़ से बाहर रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाहदरा साइबर पुलिस ने किस मामले में गिरफ्तारी की?
साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा ने एक स्टॉक ट्रेडिंग निवेश धोखाधड़ी मामले में ओडिशा से 33 वर्षीय सुब्रत कुमार साहू को गिरफ्तार किया। पीड़ित राम चंद्र यादव से व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए ₹4,75,000 की ठगी की गई थी।
आरोपी के बैंक खाते में कितनी रकम जमा पाई गई?
जाँच के अनुसार, आरोपी के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते में लगभग दो महीनों की अवधि में करीब ₹2.97 करोड़ जमा हुए। यह खाता 'फ्यूजन एंटरप्राइजेज' के नाम से खोला गया कॉर्पोरेट खाता था।
इस धोखाधड़ी रैकेट की कार्यप्रणाली क्या थी?
ठग व्हाट्सएप ग्रुप और टेलीग्राम चैनलों के ज़रिए खुद को विशेषज्ञ ट्रेडर बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे। नकली निवेश ऐप पर झूठा मुनाफा दिखाकर विश्वास जीता जाता था, फिर बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी। निकासी के समय टैक्स और चार्ज के नाम पर और पैसे ऐंठे जाते थे, और अंत में ठग संपर्क तोड़ लेते थे।
यह खाता कितनी साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़ा पाया गया?
जाँच में सामने आया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का यह खाता पूरे भारत में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की 17 अलग-अलग शिकायतों से जुड़ा हुआ है।
साइबर निवेश धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या सावधानियाँ बरतें?
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अज्ञात प्लेटफॉर्म पर गारंटीड रिटर्न के किसी भी दावे पर भरोसा न करें। ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग क्रेडेंशियल किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें, और धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
राष्ट्र प्रेस
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