वाशिम में फर्जी सरकारी नियुक्ति पत्र से ₹1.73 लाख की ठगी, 47 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

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वाशिम में फर्जी सरकारी नियुक्ति पत्र से ₹1.73 लाख की ठगी, 47 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

सारांश

वाशिम में एक 47 वर्षीय व्यक्ति ने बेरोज़गार युवक को पंचायत समिति में नौकरी दिलाने का झाँसा देकर फर्जी नियुक्ति पत्र थमाया और ₹1.73 लाख ऐंठ लिए। दस्तावेजों में विसंगति मिलने पर पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया और एलसीबी ने होटल से आरोपी को दबोचा।

मुख्य बातें

रमेश रामकृष्ण नवघारे (47 वर्ष) को 17 मई 2026 को वाशिम के एक होटल परिसर से गिरफ्तार किया गया।
आरोपी ने वाशिम पंचायत समिति में पीटीओ पद पर नौकरी दिलाने का वादा कर पीड़ित से ₹1.73 लाख वसूले।
करंजा पंचायत समिति के नाम पर जारी फर्जी नियुक्ति पत्र पीड़ित को सौंपा गया था।
दस्तावेजों में विसंगति मिलने पर पीड़ित ने वाशिम नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं में मामला दर्ज।
जाँचकर्ता अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश और वित्तीय लेन-देन की जाँच कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के वाशिम में पुलिस ने 17 मई 2026 को 47 वर्षीय रमेश रामकृष्ण नवघारे को गिरफ्तार किया, जिस पर एक बेरोज़गार युवक को सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देकर ₹1.73 लाख की धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र थमाकर पीड़ित को यकीन दिलाया कि उसे वाशिम पंचायत समिति में पीटीओ (पैनल तकनीकी अधिकारी) के पद पर नियुक्त किया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

वाशिम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, नवघारे ने पीड़ित युवक से भर्ती प्रक्रिया में अपना प्रभाव होने का दावा किया और कई किस्तों में कुल ₹1.73 लाख वसूले। ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर करंजा पंचायत समिति के नाम पर एक फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर पीड़ित को सौंप दिया।

पीड़ित को तब संदेह हुआ जब उसने नियुक्ति विवरण की स्वतंत्र रूप से जाँच की और दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियाँ पाईं। आगे की पड़ताल में स्पष्ट हो गया कि न तो नियुक्ति पत्र असली था और न ही ऐसी कोई आधिकारिक भर्ती हुई थी।

पुलिस कार्रवाई

धोखाधड़ी का एहसास होते ही पीड़ित ने वाशिम पुलिस से संपर्क किया और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने जाँच अपने हाथ में ली। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने नवघारे को वाशिम के एक होटल परिसर से हिरासत में लिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आम जनता पर असर

यह मामला उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जहाँ बेरोज़गारी की मार झेल रहे युवा, सरकारी नौकरी के झाँसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गँवा देते हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में फर्जी नियुक्ति पत्रों से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें पंचायत और नगर निकाय स्तर के पदों का विशेष रूप से दुरुपयोग किया जाता है।

जाँच का दायरा

जाँचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या नवघारे ने इसी तरह के हथकंडे अपनाकर अन्य नौकरी चाहने वालों को भी शिकार बनाया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन जाँच जारी है। यदि और पीड़ित सामने आते हैं, तो मामले का दायरा और बड़ा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

डिजिटल सत्यापन तंत्र नहीं बनता, बेरोज़गार युवा इसी तरह शिकार बनते रहेंगे — और ₹1.73 लाख जैसी रकम उनके परिवारों के लिए जीवनभर की बचत हो सकती है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाशिम फर्जी नियुक्ति पत्र मामले में आरोपी कौन है?
आरोपी की पहचान 47 वर्षीय रमेश रामकृष्ण नवघारे के रूप में हुई है, जिसे 17 मई 2026 को वाशिम के एक होटल परिसर से स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने गिरफ्तार किया।
पीड़ित युवक के साथ कितनी ठगी हुई और कैसे?
पीड़ित से कुल ₹1.73 लाख कई किस्तों में वसूले गए। आरोपी ने वाशिम पंचायत समिति में पीटीओ पद पर नौकरी दिलाने का वादा किया और करंजा पंचायत समिति के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र सौंपा।
धोखाधड़ी का पर्दाफाश कैसे हुआ?
पीड़ित ने जब नियुक्ति विवरण की स्वतंत्र रूप से जाँच की, तो दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियाँ मिलीं। आगे की पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि न तो नियुक्ति पत्र असली था और न ही कोई आधिकारिक भर्ती हुई थी।
आरोपी के विरुद्ध कौन-सी धाराओं में मामला दर्ज हुआ है?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
क्या इस मामले में और पीड़ित हो सकते हैं?
जाँचकर्ता इस संभावना की जाँच कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जाँच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने इसी तरह के हथकंडे अपनाकर अन्य युवाओं को भी ठगा है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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