क्या पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर सांस्कृतिक अटूटता और संघर्ष की गाथा को याद किया?
सारांश
Key Takeaways
- सोमनाथ स्वाभिमान पर्व एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव है।
- यह एक हजार वर्षों की अटूट आस्था का प्रतीक है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक एकता पर जोर दिया।
- देशवासियों से अनुभव साझा करने की अपील की गई।
- यह पर्व हमारे पूर्वजों के बलिदान की याद दिलाता है।
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज से आरंभ हो रहे 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के अवसर पर भारत की सांस्कृतिक अटूटता और संघर्ष की ऐतिहासिक गाथा को पुनः स्मरण किया है। उन्होंने कहा कि यह एक हजार वर्षों की अटूट आस्था का अवसर है, जो हमें राष्ट्र की एकता के प्रति निरंतर समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का शुभारंभ हो रहा है। एक हजार साल पहले, जनवरी 1026 में, सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। उस समय का आक्रमण और उसके बाद के अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को कमजोर नहीं कर सके, बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना और भी मज़बूत हुई और सोमनाथ का बार-बार पुनरोद्धार होता रहा।"
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ की अपनी पूर्व यात्राओं की कुछ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि अगर वे भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें 'हैशटैग सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के साथ साझा करें।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "यह पर्व उन अनगिनत सपूतों को याद करने का है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। चाहे समय कितना भी कठिन क्यों न रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। यह एक हजार वर्षों की अटूट आस्था का अवसर हमें राष्ट्र की एकता की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।"
प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की कुछ झलकियों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि यह वह वर्ष था, जब 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया था। उन्होंने लिखा, "1951 में वह ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ था। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल और केएम मुंशी जैसे महान विभूतियों के प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं।"
उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा, "साल 2026 में हम 1951 में हुए भव्य समारोह के 75 वर्ष पूर्ण होने का भी स्मरण कर रहे हैं।"