दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग फ्रैंकफर्ट पहुंचे, पाँच देशों के दौरे का अंतिम पड़ाव
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग रविवार, 2 अगस्त को फ्रैंकफर्ट पहुंचे, जो उनके पाँच देशों के विदेश दौरे का अंतिम पड़ाव है। सोल वापसी से पूर्व वे जर्मनी में बसे प्रवासी कोरियाई समुदाय के सदस्यों से मुलाकात करेंगे।
दौरे की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
यह दौरा 24 जुलाई को सैन फ्रांसिस्को से शुरू हुआ था, जहाँ राष्ट्रपति ली ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से भेंट की। इन बैठकों का केंद्र दक्षिण कोरिया को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के विज़न को आगे बढ़ाना था।
इसके बाद राष्ट्रपति ली ब्राज़ील, चिली और अर्जेंटीना पहुंचे, जहाँ उन्होंने आवश्यक खनिज आपूर्ति और द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार पर इन देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ शिखर वार्ता की।
अर्जेंटीना में अहम समझौते
ब्यूनस आयर्स में राष्ट्रपति ली ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली से विशेष द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेता आवश्यक खनिजों में सहयोग को मज़बूत करने पर सहमत हुए, जिसमें लिथियम वैल्यू चेन में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाना शामिल है।
इसके अतिरिक्त, अर्जेंटीना से कच्चे तेल के आयात पर सहमति बनी और दक्षिण कोरिया तथा दक्षिण अमेरिकी व्यापार गुट मर्कोसुर के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत को शीघ्र पुनः आरंभ करने की दिशा में काम करने का वादा किया गया।
राष्ट्रपति ली के प्रमुख वक्तव्य
अर्जेंटीना में प्रवासी दक्षिण कोरियाई समुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ली ने कहा, 'मुझे भरोसा है कि अर्जेंटीना और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग का एक नया दौर पूरी तरह से शुरू होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि 'बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में — AI क्रांति से लेकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव तक — रणनीतिक द्विपक्षीय सहयोग पहले से कहीं अधिक ज़रूरी है।'
ली ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सहयोग अब ठोस परिणामों के चरण में प्रवेश कर चुका है।
फ्रैंकफर्ट में कोरियाई समुदाय से मुलाकात
राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, ली फ्रैंकफर्ट में जर्मनी में निवासरत कोरियाई समुदाय के सदस्यों से मिलेंगे और उसके बाद सोल के लिए रवाना होंगे। यह दौरा दक्षिण कोरिया की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को नई दिशा देने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।