'कर्ज' की नाकामी से ऋषि कपूर हो गए थे बेहद उदास, 46 साल बाद सुभाष घई ने खोला राज
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने क्लासिक फिल्म 'कर्ज' के 46 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक भावुक किस्सा साझा किया — कि कैसे 27 जून 1980 को रिलीज होते ही इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप करार दे दिया गया था और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर इस असफलता से गहरे अवसाद में चले गए थे। आज वही फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार म्यूजिकल कृतियों में शुमार की जाती है।
इंस्टाग्राम पर घई ने क्या साझा किया
सुभाष घई ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक विशेष कोलाज पोस्ट किया, जिसमें 'कर्ज' के सेट की पुरानी बिहाइंड-द-सीन्स तस्वीरें, फिल्म का मूल पोस्टर और सफलता का जश्न मनाती यादगार फोटो शामिल थीं। एक तस्वीर में सुभाष घई, ऋषि कपूर और अभिनेत्री टीना मुनीम को शूटिंग के दौरान देखा जा सकता है।
अपनी पोस्ट में घई ने लिखा, 'आज लोग इसे एक शानदार म्यूजिकल शो कहते हैं, लेकिन 27 जून 1980 को रिलीज के समय इसे फ्लॉप शो कहा गया था। हम सभी बहुत निराश थे और खासकर ऋषि कपूर काफी दुखी थे। आज वही फिल्म सदाबहार म्यूजिकल फिल्म के रूप में मनाई जाती है। हम सभी इसके 46 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं और अपने प्रिय दोस्त और महान अभिनेता ऋषि कपूर को याद कर रहे हैं।'
ब्रॉडवे स्टाइल स्टेज शो की तैयारी
घई ने यह भी घोषणा की कि 'कर्ज' जल्द ही ब्रॉडवे शैली के म्यूजिकल स्टेज शो के रूप में दर्शकों के सामने आएगी। यह खुलासा उस फिल्म के लिए एक नई पारी की शुरुआत का संकेत है, जिसे रिलीज के वक्त दर्शकों ने नकार दिया था, लेकिन दशकों बाद जिसे कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला।
फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट
'कर्ज' का निर्माण और निर्देशन सुभाष घई ने मुक्ता आर्ट्स के बैनर तले किया था। फिल्म में ऋषि कपूर, टीना मुनीम, सिमी ग्रेवाल, राज किरण, प्रेमनाथ, प्राण और दुर्गा खोटे ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई थीं।
फिल्म की कहानी 'मोंटी' नामक एक सफल गायक पर केंद्रित है, जिसे अपने पिछले जन्म की रहस्यमयी स्मृतियाँ सताने लगती हैं। धीरे-धीरे उसे पता चलता है कि वह अमीर कारोबारी रवि वर्मा का पुनर्जन्म है, जिसकी उसकी पत्नी कामिनी ने संपत्ति के लालच में हत्या कर दी थी। इसके बाद न्याय और बदले की रोमांचक यात्रा शुरू होती है।
संगीत जो बन गया अमर
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत और आनंद बख्शी के बोलों ने 'कर्ज' को एक अलग ऊँचाई दी। 'ओम शांति ओम', 'एक हसीना थी', 'दर्द-ए-दिल दर्द-ए-जिगर', 'मैं सोलह बरस की' और 'पैसा ओ पैसा' जैसे गाने आज भी श्रोताओं की पसंद बने हुए हैं।
समय ने बदला नज़रिया
यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड की कई पुरानी फिल्में OTT प्लेटफॉर्म पर नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुँच रही हैं और उन्हें नई पहचान मिल रही है। 'कर्ज' की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बॉक्स ऑफिस की सफलता और कालजयीता हमेशा एक साथ नहीं चलतीं। ब्रॉडवे स्टेज शो की घोषणा के साथ यह क्लासिक फिल्म एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।