10 अगस्त 2026
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'दिल दिया है जान भी देंगे' पर सुभाष घई का गर्व — 1986 का यह गीत आज भी हर राष्ट्रीय आयोजन की शान

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'दिल दिया है जान भी देंगे' पर सुभाष घई का गर्व — 1986 का यह गीत आज भी हर राष्ट्रीय आयोजन की शान

सारांश

चार दशक बाद भी फिल्म 'कर्मा' का गीत 'दिल दिया है जान भी देंगे' हर स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर गूंजता है। सुभाष घई ने इस विरासत पर गर्व जताते हुए बताया कि मुक्ता आर्ट ने इसे संस्कृत में भी रिलीज किया है, जिसे कविता कृष्णमूर्ति ने गाया है।

मुख्य बातें

फिल्म निर्माता सुभाष घई ने 10 अगस्त को इंस्टाग्राम पर फिल्म कर्मा का पोस्टर साझा कर गर्व व्यक्त किया।
गीत 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' 1986 में रिलीज हुआ था और आज भी हर राष्ट्रीय आयोजन में गाया जाता है।
गीत का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने, बोल आनंद बख्शी ने लिखे; आवाज मोहम्मद अजीज व कविता कृष्णमूर्ति ने दी थी।
मुक्ता आर्ट ने अगस्त 2023 में इस गीत का संस्कृत संस्करण रिलीज किया, जिसे कविता कृष्णमूर्ति ने ही गाया।
संस्कृत संस्करण को यूट्यूब पर दर्शकों की व्यापक सराहना मिल रही है।

फिल्म निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने सोमवार, 10 अगस्त को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म कर्मा का पोस्टर साझा करते हुए खुशी और गर्व जताया कि 1986 में रिलीज हुआ देशभक्ति गीत 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' आज भी भारत के हर राष्ट्रीय आयोजन में गाया जाता है। घई ने यह भी बताया कि इस कालजयी गीत को अब संस्कृत में भी रिलीज किया जा चुका है, जिसे यूट्यूब पर दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

फिल्म कर्मा 1986 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का संगीत प्रसिद्ध जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था, जबकि गीत के बोल मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे। गीत को मोहम्मद अजीज और कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी आवाज दी थी। सुभाष घई ने अपनी पोस्ट में याद किया कि जब फिल्म का म्यूजिक एल्बम रिलीज हुआ था, तब उस पर सभी कलाकारों के साथ-साथ लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बख्शी के भी हस्ताक्षर थे।

सुभाष घई का बयान

घई ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'जब हमारी फिल्म कर्मा का म्यूजिक एल्बम रिलीज हुआ था तो उस पर सभी स्टार्स के साथ-साथ लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आनंद बख्शी के भी सिग्नेचर थे। ये 1986 में हुआ था। उस एल्बम में एक नेशनल आइकॉनिक गाना 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' आज भी ये गाना भारत के हर नेशनल इवेंट में गाया जाता है।' यह गीत चार दशकों बाद भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर बजाया और गाया जाता है — यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

संस्कृत संस्करण की रिलीज

घई की संस्था मुक्ता आर्ट ने अगस्त 2023 में इस प्रतिष्ठित गीत का संस्कृत संस्करण लॉन्च किया था। इस संस्करण को भी मूल गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने ही अपनी आवाज दी। घई ने लिखा, 'अब मुक्ता आर्ट को गर्व है कि हमने इसी गाने को संस्कृत में रिलीज किया है। इसे गाया है कविता कृष्णमूर्ति जी ने और यूट्यूब पर लोगों को बहुत पसंद आ रहा है।' संस्कृत संस्करण को यूट्यूब पर दर्शकों की सराहना मिल रही है।

गीत की स्थायी विरासत

हिंदी सिनेमा के इतिहास में देशभक्ति गीतों की एक लंबी परंपरा रही है, लेकिन 'दिल दिया है जान भी देंगे' उन गिने-चुने गीतों में से है जो सरकारी और सामाजिक दोनों मंचों पर समान रूप से गूंजते हैं। यह गीत न केवल सिनेमाई धरोहर का हिस्सा है, बल्कि राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बन चुका है। गौरतलब है कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले घई का यह संदेश देशप्रेम की उस भावना को फिर से जीवंत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब मुक्ता आर्ट ने संस्कृत जैसी शास्त्रीय भाषा में इसे नया जीवन देने का रास्ता चुना। यह प्रयोग सांस्कृतिक संरक्षण और नवाचार का एक दुर्लभ संगम है। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले इस गीत की चर्चा यह भी बताती है कि देशभक्ति की असली पूंजी नारों में नहीं, संगीत की स्मृति में बसती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'दिल दिया है जान भी देंगे' गाना किस फिल्म का है?
यह गाना 1986 में रिलीज हुई फिल्म कर्मा का है, जिसे निर्देशक-निर्माता सुभाष घई ने बनाया था। इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया और बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे।
इस गाने को किसने गाया था?
गीत के हिंदी संस्करण को मोहम्मद अजीज और कविता कृष्णमूर्ति ने गाया था। संस्कृत संस्करण को भी कविता कृष्णमूर्ति ने ही अपनी आवाज दी है।
गाने का संस्कृत संस्करण कब रिलीज हुआ?
गीत का संस्कृत संस्करण अगस्त 2023 में मुक्ता आर्ट द्वारा रिलीज किया गया था। यह संस्करण यूट्यूब पर उपलब्ध है और दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है।
सुभाष घई ने इस गाने को लेकर क्या कहा?
सुभाष घई ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि उन्हें गर्व है कि यह गाना आज भी भारत के हर राष्ट्रीय आयोजन में गाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि मुक्ता आर्ट ने इसे संस्कृत में रिलीज किया है जिसे यूट्यूब पर लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है।
यह गाना आज भी क्यों प्रासंगिक है?
यह गाना स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर नियमित रूप से बजाया और गाया जाता है। चार दशकों से अधिक समय बाद भी इसकी लोकप्रियता इसे हिंदी सिनेमा के सबसे स्थायी देशभक्ति गीतों में से एक बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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