क्या सुप्रीम कोर्ट ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के प्रमोशन पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के प्रमोशन पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के प्रमोशन पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की कहानी और इसकी कानूनी बारीकियों के बारे में।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
वानखेड़े का प्रमोशन जनवरी 2021 से प्रभावी हो सकता है।
केंद्र सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज की गई।
इस निर्णय ने कानून के प्रति न्यायपालिका की स्थिरता को दर्शाया।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है, जिसमें भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी और पूर्व एनसीबी अधिकारी समीर ज्ञानदेव वानखेड़े के प्रमोशन को बनाए रखा गया था।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिंह और आलोक अराढे की बेंच ने केंद्र सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत इस फैसले में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस खारिज का किसी अन्य मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

यह एसएलपी दिल्ली हाईकोर्ट के 28 अगस्त 2025 के फैसले से संबंधित थी, जिसमें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) के आदेश को मान्यता दी गई थी। सीएटी ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वानखेड़े के प्रमोशन विवरण वाले सील बंद लिफाफे को खोला जाए और यदि यूपीएससी ने अनुशंसा की तो उन्हें जनवरी 2021 से एडिशनल कमिश्नर के पद पर पदोन्नत किया जाए।

इसके बाद, 17 अक्टूबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की रिव्यू पिटीशन खारिज करते हुए उस पर 20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

इससे पहले, न्यायमूर्ति नवीन चावला और मधु जैन की बेंच ने केंद्र सरकार के व्यवहार की आलोचना की थी और कहा था कि रिव्यू पिटीशन दाखिल करने से पहले सभी तथ्य सही-सही उजागर किए जाने चाहिए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार ने सीएटी द्वारा अगस्त 2025 में दिए गए आदेश का खुलासा नहीं किया, जिसमें वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को रोकने का निर्देश था।

सीएटी ने दिसंबर 2024 में सरकार को आदेश दिया था कि सील बंद लिफाफा खोला जाए और यदि यूपीएससी वानखेड़े का नाम सुझाए, तो उन्हें जनवरी 2021 से एडिशनल कमिश्नर के पद पर पदोन्नत किया जाए।

अब एसएलपी खारिज होने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने सीएटी और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों की वैधता और सही होने की पुष्टि कर दी है और केंद्र सरकार द्वारा की गई सभी चुनौती को खारिज कर दिया है।

वानखेड़े का नाम पहली बार तब चर्चा में आया था, जब 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग केस की छापेमारी की गई थी और इसमें कथित तौर पर अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का भी नाम जुड़ा था। बाद में उन पर दुराचार और नकली जाति प्रमाण पत्र से संबंधित आरोप भी लगे थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि एक महत्वपूर्ण संदेश है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने समीर वानखेड़े के प्रमोशन पर क्या निर्णय लिया?
सुप्रीम कोर्ट ने समीर वानखेड़े के प्रमोशन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
वानखेड़े का प्रमोशन कब से प्रभावी होगा?
यदि यूपीएससी ने अनुशंसा की, तो वानखेड़े का प्रमोशन जनवरी 2021 से प्रभावी होगा।
सीएटी ने केंद्र को क्या निर्देश दिए थे?
सीएटी ने केंद्र को निर्देश दिया था कि वानखेड़े के प्रमोशन विवरण वाले सील बंद लिफाफे को खोला जाए।
राष्ट्र प्रेस
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