पीएम आवास योजना से बदली जिंदगी: सूरत के लाभार्थियों ने कहा — 'पहले छत टपकती थी, अब पक्का घर मिला'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत पक्के मकान मिलने से गुजरात के सूरत शहर के गरीब परिवारों के जीवन में ठोस बदलाव आया है। सिटी लाइट इलाके के लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह इस केंद्रीय योजना ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाया है।
लाभार्थियों के अनुभव
पिछले 40 वर्षों से सूरत में रह रहे शिव प्रसाद मिश्रा ने बताया कि वे लंबे समय तक कच्चे और असुविधाजनक मकानों में रहने को मजबूर थे। PMAY के तहत मिली आर्थिक सहायता ने उनकी स्थिति बदल दी।
उन्होंने कहा, 'पिछले 5 साल से मैं इस पक्के मकान में रह रहा हूँ। पहले इस इलाके में सड़क, पानी और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी, लेकिन आज सब कुछ व्यवस्थित है।'
इसी इलाके की एक अन्य लाभार्थी हंसाबेन राजूभाई राठौड़ ने भावुक होकर अपनी पुरानी परेशानियाँ याद कीं। उन्होंने कहा, 'पहले मेरा घर बहुत खराब स्थिति में था। मानसून के दिनों में छत से पानी टपकता था और हमें घर के अंदर जगह-जगह बर्तन और टब रखने पड़ते थे। जब इस योजना का फॉर्म निकला और पैसे सीधे हमारे खाते में आए, तब हमने यह पक्का घर बनाया। अब हम बहुत खुश और सुरक्षित महसूस करते हैं।'
डीबीटी से भ्रष्टाचार पर रोक
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली की सराहना करते हुए शिव प्रसाद मिश्रा ने कहा कि अब योजनाओं की राशि या सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आती है, जिससे बिचौलियों और कमीशनखोरी की गुंजाइश समाप्त हो गई है। यह व्यवस्था लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
आम जनता पर असर
PMAY का लाभ उठाने वाले परिवारों के अनुसार, पक्के मकान मिलने से न केवल आवास की समस्या हल हुई, बल्कि बुनियादी सुविधाओं — सड़क, पेयजल और राशन वितरण — में भी सुधार देखा गया है। हंसाबेन ने सरकार का आभार जताते हुए कहा कि गरीब तबके के लिए यह योजना वरदान साबित हुई है।
क्या होगा आगे
केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जमीनी असर सूरत जैसे शहरी क्षेत्रों में स्पष्ट दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि DBT-आधारित वितरण प्रणाली और पारदर्शी क्रियान्वयन से योजना की विश्वसनीयता बढ़ी है। आने वाले समय में PMAY के शहरी और ग्रामीण दोनों घटकों के विस्तार पर सरकार का ध्यान केंद्रित रहने की उम्मीद है।