2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या मुंबई के बाद हैदराबाद में तालिबान प्रतिनिधि ने वाणिज्य दूतावास का कार्यभार संभाल लिया?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या मुंबई के बाद हैदराबाद में तालिबान प्रतिनिधि ने वाणिज्य दूतावास का कार्यभार संभाल लिया?

सारांश

क्या तालिबान प्रतिनिधि ने हैदराबाद में वाणिज्य दूतावास का कार्यभार संभाल लिया है? इस लेख में जानें कि कैसे तालिबान भारत में अपने राजनयिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

तालिबान ने हैदराबाद में वाणिज्य दूतावास का कार्यभार संभाला।
यह भारत में तालिबान के राजनयिक संबंधों को बढ़ाने का संकेत है।
अफगानिस्तान में प्रतिनिधियों के लगातार नियुक्ति से काबुल की गंभीरता प्रकट होती है।
काबुल से उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली आ सकता है।
भारत और तालिबान के बीच व्यापार बढ़ाने पर चर्चा हो रही है।

नई दिल्ली, 6 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई के बाद हैदराबाद में भी अफगान तालिबान के प्रतिनिधि ने वाणिज्य दूतावास से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी ले ली है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तालिबान शासन भारत में अपने राजनयिक क्षेत्र को बढ़ाने के लिए गंभीर है।

बुधवार को राष्ट्र प्रेस को एक सूत्र ने बताया कि तालिबान शासन के नए प्रतिनिधि एम. रहमान इस वर्ष जून से अफगानिस्तान के हैदराबाद वाणिज्य दूतावास का नेतृत्व कर रहे हैं।

इससे पहले, पिछले साल इकरामुद्दीन कामिल ने अफगानिस्तान के मुंबई स्थित वाणिज्य दूतावास का कार्यभार संभाला था। वहीं, नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास की जिम्मेदारी सईद मोहम्मद इब्राहिम खिल के पास है, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार ने नियुक्त किया था।

आधिकारिक तौर पर, सईद मोहम्मद इब्राहिम खिल अभी भी हैदराबाद मिशन के प्रभारी हैं, लेकिन मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, जून से वाणिज्य दूतावास संबंधी कार्यों की कमान तालिबान के नए प्रतिनिधि ने संभाल ली है।

मुंबई और हैदराबाद में तालिबान के प्रतिनिधियों की नियुक्तियां यह संकेत देती हैं कि काबुल भारत के साथ सौहार्दपूर्ण राजनयिक संबंध बनाए रखने के लिए इच्छुक है।

तालिबान के सत्ता में आने के बाद कुछ अफगान राजनयिक भारत छोड़कर अन्य देशों में चले गए, जबकि जो भारत में रहे, उन्होंने युद्धग्रस्त देश के राजनयिक मिशनों को बनाए रखने की जिम्मेदारी ली।

पिछले महीने, रूस पहला ऐसा देश बना जिसने आधिकारिक रूप से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता दी। हालाँकि, महिलाओं के प्रति तालिबान के रवैये के कारण उसे वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यही एक प्रमुख कारण है कि तालिबान शासन को वैश्विक मान्यता में बाधाएँ आ रही हैं।

एक अन्य सूत्र ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि नई दिल्ली द्वारा अफगान नागरिकों को वीजा देना पुनः शुरू करने के बाद, काबुल से एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल अगले महीने नई दिल्ली आ सकता है।

एक अधिकारी ने कहा, "यदि यह प्रतिनिधिमंडल आता है और सब कुछ सुचारू रूप से चलता है, तो यह काबुल के साथ राजनयिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। सच्चाई यह है कि तालिबान नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहता है, जबकि वर्तमान में वहां की कमान पूर्व शासन के प्रतिनिधि के पास है। ऐसा लगता है कि साल के अंत तक तालिबान की ओर से नियुक्त अधिकारी नई दिल्ली स्थित दूतावास की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। यह भारत-तालिबान संबंधों की एक नई शुरुआत होगी।"

गौरतलब है कि हाल ही में नई दिल्ली और काबुल के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत हुई है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से बात की और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए उनकी सराहना की। इसके अलावा, जनवरी में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी यूएई यात्रा के दौरान मुत्ताकी से मुलाकात की, जहां दोनों पक्षों ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि तालिबान भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। यह स्थिति न केवल अफगानिस्तान के लिए बल्कि भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तालिबान का भारत में वाणिज्य दूतावास खोलने का क्या मतलब है?
यह संकेत देता है कि तालिबान भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों को मजबूत करने के लिए गंभीर है।
क्या तालिबान को वैश्विक मान्यता मिल रही है?
हालाँकि, तालिबान को महिलाओं के प्रति अपने रवैये के कारण वैश्विक स्तर पर मान्यता में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
क्या भारत तालिबान के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है?
हाँ, हाल ही में भारत और तालिबान के बीच व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 9 महीने पहले
  2. 1 साल पहले
  3. 1 साल पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले