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तमिलनाडु: 'मींडुम मंजाप्पई' अब 'थुनिप्पई स्कीम', TVK सरकार ने बदला नाम, 105 जगहों पर लागू होगी योजना

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तमिलनाडु: 'मींडुम मंजाप्पई' अब 'थुनिप्पई स्कीम', TVK सरकार ने बदला नाम, 105 जगहों पर लागू होगी योजना

सारांश

तमिलनाडु में सरकार बदली, पर पर्यावरण की मुहिम नहीं — TVK सरकार ने DMK की 'मींडुम मंजाप्पई' को 'थुनिप्पई स्कीम' नाम देकर जारी रखने का फैसला किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 105 स्थानों पर वेंडिंग मशीनों के लिए टेंडर शुरू कर दिए हैं।

मुख्य बातें

TVK सरकार ने DMK की 'मींडुम मंजाप्पई' कपड़े के थैले वाली मुहिम को 'थुनिप्पई स्कीम' के नाम से जारी रखने का फैसला किया।
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 105 स्थानों पर वेंडिंग मशीनें लगाने और थैलों की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की।
मूल मुहिम दिसंबर 2021 में शुरू हुई थी; पहले पीले कपड़े के थैले ₹10 प्रति थैला की दर से वेंडिंग मशीनों से उपलब्ध कराए जाते थे।
सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध 2019 में तत्कालीन AIADMK सरकार ने लगाया था।
स्थानों का विवरण, थैलों की संख्या और समय-सीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के दौरान शुरू की गई कपड़े के थैले वाली मुहिम — 'मींडुम मंजाप्पई' — को अब तमिलनाडु वेलाई वाई्प्पू कझगम (TVK) सरकार ने नया रूप देते हुए 'थुनिप्पई स्कीम' के नाम से जारी रखने का फैसला किया है। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नए नाम के साथ इस योजना के पहले चरण के लिए वेंडिंग मशीनों और कपड़े के थैलों की आपूर्ति हेतु टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

योजना का इतिहास और पृष्ठभूमि

'मींडुम मंजाप्पई' का अर्थ है 'पीले थैले की वापसी'। इस मुहिम को दिसंबर 2021 में DMK सरकार ने सिंगल-यूज प्लास्टिक के विकल्प के रूप में शुरू किया था। शुरुआत में सार्वजनिक स्थानों पर लगी वेंडिंग मशीनों के ज़रिए पीले कपड़े के थैले ₹10 प्रति थैला की दर से उपलब्ध कराए गए थे। इस मुहिम की जड़ें उससे भी पहले की हैं — 2019 में तत्कालीन अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) सरकार ने प्लास्टिक कैरी बैग समेत कई एकल उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया था।

गौरतलब है कि पुनः उपयोग योग्य कपड़े के थैले आसानी से उपलब्ध कराने का मूल उद्देश्य खरीदारों और विक्रेताओं को डिस्पोजेबल प्लास्टिक थैलों की जगह टिकाऊ विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

सरकार बदलने के बाद उठे सवाल

TVK सरकार के सत्ता में आने के बाद यह सवाल उठने लगे थे कि क्या पिछली DMK सरकार द्वारा शुरू की गई इस पर्यावरण मुहिम को आगे फंड मिलता रहेगा या नहीं। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि योजना आगे बढ़ेगी, भले ही उसका नाम बदल दिया गया हो।

यह ऐसे समय में आया है जब पर्यावरण नीतियों की निरंतरता को लेकर राज्यों में बहस चलती रहती है। नाम परिवर्तन राजनीतिक स्वामित्व को नए सिरे से स्थापित करने की एक सामान्य प्रशासनिक प्रवृत्ति के रूप में देखा जा रहा है।

नई योजना का पहला चरण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 105 स्थानों पर वेंडिंग मशीनें लगाने और उनके संचालन के लिए आवश्यक कपड़े के थैलों की आपूर्ति हेतु टेंडर मंगाए हैं। टेंडर प्रक्रिया में मशीनों की स्थापना और उनमें थैलों की नियमित आपूर्ति दोनों शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभी तक स्थानों का विवरण, आपूर्ति किए जाने वाले थैलों की सटीक संख्या और मशीनें लगाने की समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।

आम जनता और पर्यावरण पर असर

'थुनिप्पई स्कीम' के तहत वेंडिंग मशीनों के ज़रिए वितरण की प्रणाली पहले की तरह जारी रहेगी। इससे तमिलनाडु में प्लास्टिक कचरे को कम करने की दिशा में अब तक की गई प्रगति बाधित होने की आशंका कम हो गई है। योजना का उद्देश्य खरीदारों को सिंगल-यूज प्लास्टिक छोड़ने के लिए किफायती और सुलभ विकल्प देना है, जो पर्यावरण संरक्षण के दीर्घकालिक लक्ष्यों से सीधे जुड़ा है।

क्या होगा आगे

पहले चरण के क्रियान्वयन से यह तय होगा कि TVK सरकार इस योजना को किस गति और पैमाने पर आगे बढ़ाती है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मशीनों की स्थापना और थैलों की उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट होगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलों की सफलता टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और क्रियान्वयन की निरंतरता पर निर्भर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 'थुनिप्पई स्कीम' में वेंडिंग मशीनों की संख्या और वितरण का पैमाना पुरानी मुहिम से बढ़ेगा या केवल नाम बदलकर पुराना ढाँचा ही चलता रहेगा। 105 स्थानों की संख्या और स्थानों का अभी तक सार्वजनिक न होना पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। तमिलनाडु में प्लास्टिक प्रतिबंध 2019 से लागू है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग अभी भी एक चुनौती बना हुआ है — और वेंडिंग मशीन मॉडल की वास्तविक प्रभावशीलता का कोई सार्वजनिक मूल्यांकन सामने नहीं आया है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'थुनिप्पई स्कीम' क्या है?
'थुनिप्पई स्कीम' तमिलनाडु की TVK सरकार द्वारा पुनः नामित वह योजना है जो पहले 'मींडुम मंजाप्पई' के नाम से जानी जाती थी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर वेंडिंग मशीनों के ज़रिए किफायती कपड़े के थैले उपलब्ध कराकर सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करना है।
'मींडुम मंजाप्पई' मुहिम कब और किसने शुरू की थी?
यह मुहिम दिसंबर 2021 में तमिलनाडु की DMK सरकार ने शुरू की थी। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर वेंडिंग मशीनों से पीले कपड़े के थैले ₹10 प्रति थैला की दर से उपलब्ध कराए जाते थे।
नई 'थुनिप्पई स्कीम' कहाँ-कहाँ लागू होगी?
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार पहले चरण में 105 स्थानों पर वेंडिंग मशीनें लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि अभी तक इन स्थानों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
तमिलनाडु में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध कब से है?
तमिलनाडु में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध 2019 में तत्कालीन AIADMK सरकार ने लगाया था। इसी प्रतिबंध की पृष्ठभूमि में कपड़े के थैलों को बढ़ावा देने की यह पहल शुरू की गई थी।
क्या नई सरकार में योजना के लिए फंडिंग जारी रहेगी?
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह संकेत मिलता है कि योजना के लिए फंडिंग जारी रहेगी। हालांकि बजट आवंटन की सटीक राशि या विवरण अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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