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'नान मुधलवन' का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु': स्टालिन ने सरकार के फैसले को बताया युवाओं के साथ अन्याय

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'नान मुधलवन' का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु': स्टालिन ने सरकार के फैसले को बताया युवाओं के साथ अन्याय

सारांश

DMK अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी ड्रीम स्कीम 'नान मुधलवन' का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु' किया गया। एक्स पर पोस्ट कर स्टालिन ने कहा — नाम बदलने से हज़ारों युवाओं की बदली ज़िंदगियाँ नहीं मिटाई जा सकतीं।

मुख्य बातें

स्टालिन ने 20 जून 2026 को तमिलनाडु सरकार के 'नान मुधलवन' स्कीम का नाम बदलने के फैसले की कड़ी आलोचना की।
राज्य सरकार ने स्कीम का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु' कर दिया है और कथित तौर पर आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों से संबंधित कंटेंट भी हटाया जा रहा है।
स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि स्कीम ने हज़ारों युवाओं को करियर गाइडेंस, कौशल विकास और रोज़गार के अवसर दिए।
DMK नेता ने चेताया कि इस प्रोग्राम को कमज़ोर करना तमिलनाडु की युवा पीढ़ी के विकास में बाधा डालने जैसा होगा।
स्टालिन ने कहा — 'तमिलनाडु के युवाओं की तरक्की कभी भी राजनीति की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।'

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने 20 जून 2026 को राज्य सरकार के उस निर्णय की कड़ी आलोचना की, जिसमें उनकी महत्वाकांक्षी 'नान मुधलवन' स्कीम का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु' कर दिया गया है। स्टालिन ने चेतावनी दी कि इस प्रोग्राम को कमज़ोर करने की किसी भी कोशिश का सीधा असर राज्य के हज़ारों युवाओं की संभावनाओं पर पड़ेगा।

स्टालिन की एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया

स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'आप 'नान मुधलवन' सोशल मीडिया पेजों का नाम बदल सकते हैं। आप वहाँ प्रकाशित पोस्ट हटा सकते हैं। लेकिन आप उस स्कीम की उपलब्धियों को नहीं मिटा सकते, जिसने हज़ारों युवाओं को उनके सपने पूरे करने में मदद की।' उन्होंने यह भी कहा कि स्कीम का नाम बदलने या सोशल मीडिया से इससे जुड़ा कंटेंट हटाने से उन लाभार्थियों का आभार समाप्त नहीं होगा, जिनकी ज़िंदगी इस योजना ने बदली है।

क्या है 'नान मुधलवन' और क्यों है यह विवाद

गौरतलब है कि 'नान मुधलवन' (अर्थात 'मैं पहला हूँ') स्कीम स्टालिन सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य तमिलनाडु के छात्रों और नौकरी तलाश करने वालों को करियर गाइडेंस, उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर प्रदान कर शिक्षा और रोज़गार के बीच की खाई को पाटना था। अब वर्तमान राज्य सरकार ने इस स्कीम का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु' कर दिया है और कथित तौर पर आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों से इससे जुड़ा कंटेंट भी हटाया जा रहा है।

स्टालिन का दावा: युवाओं की यादें नहीं मिटाई जा सकतीं

DMK नेता ने ज़ोर देकर कहा कि यह प्रोग्राम पूरे तमिलनाडु में छात्रों और नौकरी चाहने वालों की उम्मीदों से गहराई से जुड़ चुका था। उन्होंने कहा, 'किसी स्कीम का नाम बदलने से उसके लाभार्थियों की यादें या उनके जीवन पर पड़े असर को मिटाया नहीं जा सकेगा।' स्टालिन ने यह भी स्मरण कराया कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने पाँच साल के कार्यकाल में उन्होंने लगातार छात्रों को पढ़ाई और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया था।

राजनीतिक संदर्भ और युवा सशक्तीकरण की माँग

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व सरकार की नीतियों और योजनाओं की समीक्षा का दौर चल रहा है। स्टालिन ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद युवाओं का सशक्तीकरण सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने चेताया कि छात्रों और नौकरी चाहने वालों की मदद करने वाली पहलों में बाधा डालना तमिलनाडु की युवा पीढ़ी के विकास में रुकावट डालने के समान होगा।

आगे क्या होगा

स्टालिन ने कहा, 'तमिलनाडु के युवाओं की तरक्की कभी भी राजनीति की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।' यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा कि वर्तमान राज्य सरकार इस आलोचना पर क्या प्रतिक्रिया देती है और नई नामकरण के साथ इस योजना के क्रियान्वयन में क्या बदलाव आते हैं। DMK के इस आक्रामक रुख से तमिलनाडु की राजनीति में युवा-केंद्रित नीतियों को लेकर बहस और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब यह कदम पूर्ववर्ती सरकार की पहचान मिटाने की कोशिश जैसा दिखे, तो यह राजनीतिक संदेश भी देता है। असली सवाल यह नहीं है कि स्कीम का नाम क्या है — बल्कि यह है कि 'थिरन तमिलनाडु' के रूप में इसकी फंडिंग, क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पहुँच बरकरार रहेगी या नहीं। तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व सरकार की योजनाओं की ब्रांडिंग बदलने का यह पैटर्न नया नहीं है — यह देश के कई राज्यों में दोहराया जाता रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि युवा लाभार्थियों पर इस प्रशासनिक बदलाव का व्यावहारिक असर क्या पड़ेगा — और इसका जवाब सिर्फ नाम से नहीं, ज़मीनी क्रियान्वयन से मिलेगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नान मुधलवन' स्कीम क्या है और इसे क्यों बदला गया?
'नान मुधलवन' (अर्थात 'मैं पहला हूँ') तमिलनाडु में DMK सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई एक युवा कौशल विकास योजना थी, जो छात्रों को करियर गाइडेंस और उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण देती थी। वर्तमान राज्य सरकार ने इसका नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु' कर दिया है।
एम. के. स्टालिन ने नाम बदलने पर क्या कहा?
स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सोशल मीडिया पेजों का नाम बदला जा सकता है और पोस्ट हटाई जा सकती हैं, लेकिन उस स्कीम की उपलब्धियाँ नहीं मिटाई जा सकतीं जिसने हज़ारों युवाओं के सपने पूरे किए। उन्होंने इसे युवाओं के हितों के साथ राजनीति बताया।
क्या 'नान मुधलवन' स्कीम पूरी तरह बंद हो गई है?
स्रोत के अनुसार स्कीम का नाम बदलकर 'थिरन तमिलनाडु' किया गया है और कथित तौर पर आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों से संबंधित कंटेंट हटाया जा रहा है। स्कीम पूरी तरह बंद हुई है या नहीं, इस पर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
इस विवाद से तमिलनाडु के युवाओं पर क्या असर पड़ सकता है?
स्टालिन के अनुसार, यदि इस प्रोग्राम को कमज़ोर किया गया तो राज्य के उन हज़ारों युवाओं की तरक्की प्रभावित होगी जो करियर गाइडेंस और कौशल विकास के लिए इस पर निर्भर थे। व्यावहारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नई सरकार नई ब्रांडिंग के तहत इसका क्रियान्वयन कैसे करती है।
'नान मुधलवन' स्कीम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
यह स्कीम शिक्षा और रोज़गार के बीच की खाई पाटने के लिए बनाई गई थी। इसमें छात्रों को करियर गाइडेंस, उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर दिए जाते थे, ताकि वे अपनी रोज़गार क्षमता बेहतर कर सकें।
राष्ट्र प्रेस
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